एकता कपूर के नाटक अगर देखे होंगे, तो आपको सपा का ड्रामा बड़ी ही आसानी से समझ आसकता है. एकता कपूर के सीरियल में लीड किरदार के चारों तरफ ऐसा जाल बुना जाता है किशुरू में उसको हर तरफ से हार मिलती है और फिर एकदम से वो किरदार उन सब परेशानियोंसे उभरता है कि दुश्मनों की सारी साजिशें नाकाम हो जाती हैं. कुछ ऐसा ही अखिलेशयादव के साथ हुआ है. चाचा से भतीजा गुस्सा गया. और इस वजह से मुलायम सिंह बेटेअखिलेश से नाराज हो गए. ये ड्रामा अभी पता नहीं कब तक चले, लेकिन इसमें बाजी अखिलेशयादव के हाथ में है. इसकी वजह है पार्टी कार्यकर्ताओं का सपोर्ट और मुलायम सिंह कातकनीकी साथ. क्योंकि सारा जाल तो मुलायम सिंह का ही बुना नजर आता है जैसे उन्होंनेअपने बेटे को प्रोजेक्ट करने के लिए ही ये भाई-भाई वाला नाटक खेला हो. खैर परदे केपीछे चाहे कुछ भी हो इस ड्रामे के हीरो तो अखिलेश बन ही चुके हैं. इंडियन एक्सप्रेसकी रिपोर्ट के मुताबिक अखिलेश क्यों आगे हैं, उनमें सबसे पहली वजह उनके साथविधायकों और ग्राउंड वर्कर्स का नंबर ज्यादा होना है. दूसरा वजह उनकी पीआर टीम है,जिसमें टॉप ब्यूरोक्रेट्स शामिल हैं. तीसरा पार्टी मेंबर उन्हें अपना यंग फेस लीडरमान रहे हैं, न कि शिवपाल और मुलायम को. परिवार और पार्टी की लड़ाई ने अखिलेश कोअपना किरदार चमकाने का मौका दिया है. और इस लड़ाई में वो जीते भी. उनकी इस जीत काऐलान तो उसी दिन हो गया, जब मुलायम सिंह की मीटिंग में अखिलेश के फेवर मेंकार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की. हुआ ये था कि शिवपाल यादव बोल रहे थे. उन्होंनेअखिलेश के खिलाफ बोलना शुरू किया तो कार्यकर्ता नारेबाजी करने लगे. यानी ये मैसेजक्लियर था कि पार्टी कार्यकर्ताओं को मुलायम और शिवपाल के मुकाबले अपना लीडर अखिलेशको मानने में कोई हिचक नहीं. अखिलेश की जीत का दूसरा ऐलान उस वक्त हुआ जब मुलायमसिंह ने कहा कि सीएम पद के उम्मीदवार अखिलेश ही होंगे. और वो ही तय करेंगे कि जिनचार मंत्रियों को कैबिनेट से बाहर किया गया है, उन्हें वापस लिया जाएगा या नहीं.अखिलेश की जीत का तीसरा ऐलान थोड़ा तकनीकी है. वो ये है कि अखिलेश यादव ने मीटिंगमें कहा, वो मुख्यमंत्री हैं, उन्हें इस बात का हक़ होना चाहिए कि वो ही इलेक्शन केलिए टिकट बांटें. और इस बात पर मुलायम सिंह चुप्पी साध गए. क्योंकि वो शिवपाल कोराजी रखने के साथ-साथ अखिलेश को नाराज नहीं करना चाहते. क्योंकि आगामी चुनाव मेंसपा के पास कुछ ऐसा नहीं है, जिसके जरिए वो चुनाव में उतर सके. अगर कुछ है तो सिर्फअखिलेश का ही चेहरा. दूसरी तरफ अखिलेश की पीआर टीम भी उन्हें प्रोजेक्ट करने मेंजुट गई है. अखिलेश को पार्टी में ईमानदार और कायापलट करने वाले शासक के तौर पर पेशकिया जा रहा है, जो करप्ट और पुरानी खस्ताहाल व्यवस्था के खिलाफ लड़ रहे हैं. कहा जारहा है कि पांच साल में अखिलेश पर कोई दाग नहीं. जबकि दूसरा खेमा करप्शन औरसाम्प्रदायिक हिंसा से स्टेट और पार्टी को बीमार बना रहा है. इस लड़ाई में अखिलेश नेयूथ को खुद से जोड़ लिया है. इसका सबूत ये है कि जब मंगलवार को सपा हेडक्वॉर्टर मेंमुलायम सिंह मीटिंग कर रहे थे, तो बाहर अखिलेश के फेवर में नारेबाजी हो रही थी.अखिलेश के सपोर्टर की भीड़ शिवपाल के घर के बाहर जुटती है. सपोर्टर कहते हैं किमुख्यमंत्री जी गुंडे हैं, ये गलत मैसेज फैलाया जा रहा है. वो पूछते हैं कि क्या वोएक ऐसा उदहारण अखिलेश के खिलाफ दे सकते हैं. अब ऐसे में शिवपाल के समर्थक सिर्फ मचलही सकते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के खिलाफ बोल नहीं सकते. तभी तो शिवपाल समर्थकसिर्फ इतना ही कह पाते हैं कि वो हमारे मुख्यमंत्री हैं. और उनके अंडर में हीइलेक्शन लड़ा जाएगा. लेकिन बाकी लोगों का भी सम्मान होना चाहिए. अखिलेश के सपोर्टरमुलायम सिंह के सामने जमके नारेबाजी करते हैं. यहां तक बोलते हैं कि सब कुछ अखिलेशके हाथ में होना चाहिए. यानी स्टेट पार्टी प्रेसिडेंट होने के साथ साथ उन्हें हीटिकट बांटने का अधिकार होना चाहिए. वीमेन सपोर्टर भी उस भीड़ में थीं. जिनमें वीमेनकमीशन की मेंबर शीला चतुर्वेदी भी मौजूद थीं. सपा की वीमेन विंग की स्टेट सेक्रेटरीतरन्नुम परवीन कहती हैं कि जब चीफ मिनिस्टर के नाम पर ही वोट मांगे जाने हैं, तोउन्हें ही टिकट बांटने का अधिकार होना चाहिए. बहुत से स्टेट ब्यूरोक्रेट्स अखिलेशके पीछे हैं. जो लोगों को इस बात पर यकीन दिला रहे हैं कि अखिलेश बाकी सीनियरनेताओं के मुकाबले सही फैसले ले सकते हैं. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिकये वक्त अखिलेश यादव के लिए अपनी पॉलिटिकल इमेज गढ़ने और मजबूत युवा नेता के तौर परउभरने का अहम मौका है. हालांकि वो ऐसे वक्त पर एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं, जब इलेक्शनबेहद नजदीक हैं. अब तक उन्हें साढ़े चार साल में साढ़े चार सीएम में से आधा सीएम हीकहा जाता रहा है, क्योंकि आजम खान और शिवपाल यादव का सरकार में दखल रहा है. अखिलेशने ये दम थोड़ी देर से दिखाया. इस संघर्ष में समाजवादी पार्टी का वोटर खिसक भी सकताहै.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ेंवो पॉलिटिक्स कौन सी थी, जिसका मुलायम भुट्टा भूनकर खा गएअखिलेश यादव का सामान कमरे से निकाल फ़ेंका था शिवपाल ने!नेताजी आपकी पार्टी है, पर मेरा भी तो करियर है: रोते हुए बोले अखिलेश यादवप्रतीक यादव, मुलायम सिंह यादव के बेटे नहीं हैं!साइकिल को बचाने का 'काटजू जुगाड़' सुन अखिलेश लहलहा जाएंगेफैमिली के झगड़े ने साबित किया कि मुलायम से संस्कारी कोई नहीं