हनुमान बेनीवाल की सीट खीमसर पर किसका पलड़ा भारी है?
कांग्रेस प्रत्याशी सवाई सिंह से मिल रही है कड़ी टक्कर.
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फोटो - thelallantop
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1. सीट: खींवसर
2. चुनने की वजह: चुनाव से ठीक पहले नई पार्टी बनाने वाले निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल यहां से मैदान में हैं.
3. चैलेंजर कौन: हनुमान के खिलाफ कांग्रेस ने इस बार कड़ी चुनौती पेश की थी. कांग्रेस ने यहां से रिटायर्ड आईपीएस सवाई सिंह को मैदान में उतारा है. सवाई सिंह हनुमान बेनीवाल की तरह ही जाट समुदाय से आते हैं. हनुमान के लिए मुकाबला कड़ा होने की एक वजह यह भी है कि दो चुनाव से उन्हें चुनौती दे रहे दुर्ग सिंह ने सवाई सिंह के पक्ष में अपनी उम्मीदवारी वापिस ले ली.
4. ट्रिविया
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- यह सीट परिसीमन के बाद 2008 में अस्तित्व में आई थी. तब से हनुमान बेनीवाल यहां के विधायक हैं. 2008 का चुनाव वो बीजेपी की टिकट पर लड़े थे. 2009 में वसुंधरा राजे के साथ अनबन के बाद वो पार्टी से अलग हो गए. 2013 के चुनाव में उन्होंने बसपा के दुर्ग सिंह को 23,020 वोट के अंतर से चुनाव हराया था.
- पिछले 10 सालों में मारवाड़ में जाटों के दो बड़े सियासी घराने नेपथ्य में चले गए. मिर्धा खानदान के चश्म-ए-चिराग हरेन्द्र मिर्धा को 2008 और 2013 में नागौर विधानसभा सीट से हार का सामना करना पड़ा. वहीं ज्योति मिर्धा को 2014 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. इधर जोधपुर का मदेरणा परिवार भी भंवरी देवी हत्याकांड के बाद कमजोर पड़ गया. 2013 के विधानसभा चुनाव के दौरान महिपाल मदेरणा जेल में थे, कांग्रेस ने उनकी पत्नी लीला मदेरणा को ओसियां सीट से मैदान में उतारा लेकिन उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा. ऐसी स्थिति हनुमान बेनीवाल के उपजाऊ साबित हुई. उन्होंने पांच साल मेहनत करके खुद को जाटो के नेता के तौर पर स्थापित करने की कोशिश की. वो एक हद तक इसमें कामयाब भी रहे. रावणा राजपूत बिरादरी से आने वाले आनंदपाल के एनकाउंटर के बाद राजपूत समाज का एक तबका सड़क पर था. राजपूत बिरादरी के इस उभार ने हनुमान को एंटी राजपूत ध्रुवीकरण में काफी मदद की.
- हनुमान तीसरे मोर्चे बनाने की जुगत में लगे हुए थे. उनकी इस कोशिश को झटका दिया किरोड़ी लाल मीणा ने. मीणा चुनाव से छह महीने पहले हनुमान का दामन छोड़कर बीजेपी में चले गए. बेनीवाल डटे रहे. उन्होंने इस चुनाव कुल 57 उम्मीदवार उतारे हैं. जाट परम्परागत तौर पर कांग्रेस के वोटर माने जाते हैं. मारवाड़ बेल्ट में हनुमान कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं.
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