कभी बुल्लेशाह ने कहा था कि अगर ख़ुदा नाचने से मिल सकता है तो मुझे भी मिलेगा औरताउम्र वो हाथों में चूड़े पहने नाचता रहा. भाव में आकर साधु संन्यासी नाचते हैं.स्वामी विवेकानंद के आध्यात्मिक गुरु रामकृष्ण परमहंस भी ज़्यादातर नाच उठते थे.लेकिन नाचना भी कई तरीके का होता है. कौन किसलिए किसके सामने नाच रहा है, सब इसी परडिपेन्ड करता है.चुनाव में जनता की चलती है डेमोक्रेसी भी अजीब चीज़ है.हर पांच साल में एक बार कइयोंको सिर के बल नचा देती है.इस बार नाचते पाई गई हैं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर. जो जेल सेवापस आने के बाद वीलचेयर पर ही दिखाई देती हैं.नॉमिनेशन के वक्त भोपाल में कलेक्ट्रेट ऑफिस जाती हुईं साध्वी प्रज्ञा ठाकुरलोकतंत्र में वोट ख़ुदा तो नहीं, पर ख़ुदा से कम भी नहीं. और वोटर है कि मान के हीनहीं देता. मन करे नाचो, मन करे गाओ.पहले ये वीडियो देखिए -साध्वी नामांकन दाख़िल करने व्हीलचेयर पर गईं और एक प्रोग्राम में डांस कर रही है,#sadhavipragyapic.twitter.com/LnJevyWj15— Jeetendra Sharma (@Jeetendra214) April 24, 2019भोपाल के ईदगाह हिल्स में चुनाव प्रचार के दौरान सिंधी समाज के कार्यक्रम मेंपहुंची थीं साध्वी प्रज्ञा. महिला समाज सामने था, डीजे बजा तो महिलाएं नाचीं. अबजैसा अक्सर होता है कि सबसे ज़्यादा नचास वाला शख़्स अपनी नचास दबाए कोने में खड़ारहता है. जब लोग-बाग देखते हैं तो फ़्लोर पर घसीट लाते हैं, और फ़िर देखिए स्टेप्सभाई साब. तो यही हुआ होगा ईदगाह हिल्स वाले कार्यक्रम में भी. नाचती जनता में कोईवीलचेयर पर बैठा अच्छा लगता है क्या? नहीं, आप ख़ुद सोचो न यार.ना वीलचेयर रही, ना कोई सहारा लिया जब प्रज्ञा ठाकुर थिरकीं, तो ना वीलचेयर कालिहाज रखा, ना किसी का सहारा लिया. अपने दोनों पांवों पर पूरी की पूरी खड़ी हुईं औरलगीं नाचने.इसमें ध्यान देने वाली बात यही है, कि चलने फ़िरने में बिल्कुल लाचार दिखने वालीसाध्वी वीलचेयर से उठ पड़ीं. खैर जब प्रज्ञा ठाकुर का कैंसर तक गोबर-गोमूत्र से ठीकहो सकता है, तो इत्ती एनर्जी भी आ ही सकती है.