समाजवादी पार्टी में अचानक ऐसा क्या हुआ? क्यों बेटे की सरकार से पिता के करीबीबाहर कर दिए गए? मुलायम ने क्यों प्रोफेसर रामगोपाल यादव को पार्टी से निकाल दिया?सपा के झगड़े की असल वजह क्या है? पर बहुत सारी कॉन्सपिरेसी थ्योरीज तैर रही हैं.ये नुक्कड़ों की थ्योरीज हैं और कुछ लखनऊ के पुराने पंछियों की उड़ाई बातें हैं.इसलिए ये पर्याप्त मासूम हैं. फिर भी ये देखना दिलचस्प है कि लोग चुनाव-पूर्व की इसउथल-पुथल पर किस तरह रिएक्ट कर रहे हैं.थ्योरी 1: बीजेपी का गेमप्लान हैबीजेपी यूपी चुनाव जीतने को उतावली है और अखिलेश यादव का कराया विकास-कार्य उसकीराह में सबसे बड़ी रुकावट है. थ्योरी ये है कि अमित शाह और नरेंद्र मोदी ने मुलायमसिंह को 'मैनेज' कर लिया है. वह सीबीआई का डर भी हो सकता है याउपराष्ट्रपति/राष्ट्रपति पद का लालच भी. इसलिए मुलायम खुद अपनी पार्टी में दो-फाड़करके अखिलेश के पर कतर रहे हैं. इस बीच यूपी चुनाव से पहले अमर सिंह को जिस तरहपुरानी नाराजगी भुलाकर सपा में लाया गया, उसके आधार पर लोग इस थ्योरी को मजबूतबताते हैं. कुछ दिन पहले इसी तरह के आरोप बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी लगाए थे.https://www.youtube.com/watch?v=cAKAceI6R5cथ्योरी 2: अखिलेश को हीरो बनाने की स्क्रिप्ट हैPhoto: Reutersदूसरी थ्योरी है कि सपा के सारे दिग्गजों ने मिलकर ये पूरा खेल रचा गया है, ताकिअखिलेश यादव के समांतर शिवपाल को विलेन बनाकर, अखिलेश को हीरो बनाया जा सके. उनकेपक्ष में एक इमोशनल-विकासवादी हवा बनाई जा सके.ये थ्योरी सोशल मीडिया पर सक्रिय भाजपा समर्थकों ने खूब उड़ाई है. उनका कहना है किमुलायम, शिवपाल, रामगोपाल, अमर सिंह और अखिलेश यादव ने मिलकर इसकी पटकथा लिखीहै. ये सारी लड़ाई एक ड्रामे का हिस्सा है.थ्योरी 3: मुलायम को कोई और चला रहा हैमुलायम के दिमाग पर उनकी दूसरी पत्नी साधना गुप्ता, उनके भाई शिवपाल यादव औरभाई-समान अमर सिंह का कब्जा हो चुका है. ये तीनों मिलकर उन्हें अखिलेश के खिलाफभड़का रहे हैं. 2014 के बाद से अखिलेश यादव ने पार्टी से बढ़कर अपनी छवि पर कामकिया है और इससे मुलायम के हाथ से ताकत छिटकी है.मुलायम कई बार सार्वजनिक मंचों पर अखिलेश के काम पर सवाल करते हुए उन्हें डांट पिलाचुके हैं. इसलिए यह एक निजी मसला है, जिसे परिवार के अखिलेश विरोधियों ने हवा दीहै. जनता को सिर्फ नेताओं का सार्वजनिक जीवन दिखता है और उनके बयानों के आधार परही वे सारे अंदाज़े लगाते हैं. लेकिन परिवार के भीतर यह बड़ा मुद्दा है कि अखिलेशने मुलायम के पांव छुए या नहीं. बजाय इसके कि सीबीआई का केस फिर खुल रहा है यानहीं.https://www.youtube.com/watch?v=B6CJkUn4nrQथ्योरीज में दम?आप इन पर जितने चाहे चटखारे ले लें, पर अंतत: ये मासूम थ्योरीज हैं. कोई सबूत नहींहैं किसी के पास. सपा मुलायम की खड़ी की हुई पार्टी है और वह उपराष्ट्रपति याराष्ट्रपति पद के लालच में अपनी ही पार्टी के बंटाधार में जुट जाएंगे, इस पर यकीनकरना मुश्किल है. और मुलायम क्या सियासत के इतने कच्चे खिलाड़ी हैं कि बीजेपी केवादे पर यकीन कर लेंगे? मान लीजिए, किसी खुमारी में कर भी लिया तो अपनी पार्टी कोकमजोर क्यों करेंगे? अंतत: उन्हें राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों के लिएविधायकों के वोट की दरकार होगी.हो सकता है कि सीबीआई के इस्तेमाल से मुलायम को कई बार ब्लैकमेल किया गया हो, लेकिनऐसा भी क्या डर कि वे राजनीति की सबसे अहम परीक्षा यूपी चुनावों में पहले हीआत्मसमर्पण कर दें. फिर सीबीआई के केस में अखिलेश यादव भी आरोपी हैं. अगर डर दिखानाहोता तो सीधे अखिलेश को क्यों नहीं दिखाया गया.https://www.youtube.com/watch?v=AJCmImuMRM8अभी तो यही मालूम पड़ता है कि अगर पूरा खेल स्क्रिप्टेड होता तो इतना आगे नहींजाता. मामला चुनाव आयोग तक पहुंच गया है. अब चुनाव आयोग अपने तरीके से सुनवाई औरकार्रवाई करेगा. दोनों खेमे साइकिल का सिम्बल खो दें, ऐसी नौबत भी आ सकती है.ये बड़ा नुकसान होगा. आज़म खां जैसे चालाक राजनेता इसे समझते हैं. इसीलिए उन्होंनेएक खेमा चुनने के बजाय दोनों तरफ अच्छे संबंध बनाए रखे हैं.खबर ये भी आई है कि वे फिर एक बार सुलह का फॉर्मूला लेकर आए हैं. सूत्रों ने बतायाहै कि इस फॉर्मूले के मुताबिक, मुलायम और अखिलेश दोनों की पसंद के कुछ लोगों कोपार्टी से बाहर कर दिया जाए, ताकि दोनों खेमों को संतोष रहे. इसमें रामगोपाल और अमरसिंह के नाम हो सकते हैं. साथ ही, अखिलेश राष्ट्रीय अध्यक्ष पद मुलायम के लिए छोड़दें और टिकट बंटवारे का काम अपने पास रखें. ये पिता-पुत्र में सुलह की आज़म खान कीआखिरी कोशिश है. देखिए, क्या होता है.-------------------------------------------------------------------------------- सपा का सारा हिसाब-किताबमुलायम सिंह यादव ने अपने जीवन की सबसे बड़ी गलती कर दीअखिलेश, मुलायम को असली झटका तो अब लग सकता हैशिवपाल यादव कल शाम को पत्रकारों के साथ गाना गा रहे थे, आप भी सुनिए