नेताओं के चुनाव प्रचार का अलग ही माहौल होता है. इसकी अपनी कहानियां भी होती हैं.सबके दिमाग में घुसी होती हैं. लोग भूल नहीं पाते. छोटे शहर-कस्बों में नेताओं केआने से पहले उनका आधा प्रचार तो ये कहकर ही हो जाता है, 'वो हेलिकॉप्टर से आ रहेहैं'. कुछ नेता 'रथ' से भी आते हैं. इस बार के यूपी चुनाव से पहले सपा ने 'विकासरथ' छोड़ रखा है. 2012 के चुनाव में सपा ने 'क्रांति रथ' छोड़ा था. इनका नाम भले हीपौराणिक हो लेकिन ये होते बड़े हाइटेक हैं. किसी एयरकंडिशन वाली बस या वैन पर तामझामसजाया जाता है. 2012 में अखिलेश यादव अपने क्रांति रथ पर खूब घूमे थे. हालांकि, येरथ वाला कॉन्सेप्ट 80 के दशक में आया था. पहली रथ यात्रा 1983 में तेलुगुदेशमपार्टी के एनटी रामा राव ने की थी. 75,000 किमी की यात्रा की थी तब उन्होंने. लालकृष्ण आडवाणी की राम रथ यात्रा के किस्से तो खूब कहे सुने गए हैं. इसके बाद बहुतोंने रथ हांके. आज आपके लिए अखिलेश की रथ-यात्रा के किस्से. 2009 में अखिलेश सपा केप्रदेश अध्यक्ष चुने गए थे. 2012 के चुनावों में वो सपा के फायरब्रांड प्रचारक बनकरउभरे. अखिलेश तब ताबड़तोड़ रथ यात्राएं किया करते थे.1. सैमसंग को लेकर टीपू ने किया था मजाकएक रथयात्रा में अखिलेश यादव उर्फ़ टीपू हैदरगंज में बोल रहे थे. सड़क के दोनों तरफपार्टी कार्यकर्ता थे. एक आदमी सेलफ़ोन से उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहा था. अखिलेशने उसकी तरफ इशारा किया और कहा, ''देखिए ये सैमसंग का सबसे नया मॉडल है और ये हमारीपार्टी के पास है.'' इसके बाद अखिलेश हंसने लगे. इसी दौरान उन्होंने एक औरकार्यकर्ता को देखा. तुरंत बोले. ''अरे इसको तो मैंने ही पार्टी में शामिल कियाथा.'' लोग रथ पर बैठने के लिए उधम मचाए थे. शोर मचाने लगे. अखिलेश ने उनसे कहा,''आगे बैठा लेंगे, छोटा रथ है, कैसे बैठेंगे सब?'' उनका रथ एक बार जाम में फंस गया,तो उन्होंने एक ट्रक ड्राइवर को देखकर कहा,''हैलो ट्रक ड्राइवर भइया, साइड तो देदो."2. अखिलेश की बेटी भी रथ पर होती थी3 जनवरी 2012 को अखिलेश का रथ चुनाव प्रचार में घूम रहा था. अखिलेश की बेटी अदितिभी उनके साथ थी. उसके हाथ में एक आई-पैड था. वो न्यू इयर में कहीं बाहर नहीं जापाई, इसलिए पापा के साथ रथ पर घूम रही थी. उसके पास एक बैग था. अखिलेश ने उसेखंगालते हुए कहा, ''अरे, अपनी थोड़ी चॉकलेट बाकी लोगों को भी तो दो.'' बस हाईटेक थी.लिफ्ट भी लगी थी उसमें. अखिलेश खूब घूम रहे थे ऊपर-नीचे. बीच-बीच में लोगों से बातभी करते जाते.3. युवराज वर्सेज राजकुमारनरेंद्र मोदी राहुल गांधी को शहजादा कहते रहे हैं. अखिलेश को भी उस दौरान मीडिया नेराजकुमार कहा था. प्रचार के दौरान युवराज और राजकुमार वाले सवाल पूछने पर अखिलेशबोलते थे, 'अपने-अपने घर में हम सभी युवराज और राजकुमार हैं. चुनौती ये है कि येपदवी बाहर के लोगों से हासिल की जाए.''4. अमर सिंह को तब भी नहीं पसंद करते थे अखिलेश आज अमर सिंह को लेकर पार्टी में बवाल मचा हुआ है. 2012 में भी अमर पार्टी अखिलेश केलिए 'बाहरी' ही थे. उस वक्त भी अमर सिंह को पसंद नहीं करते थे. चुनाव के दौरान उनसेपूछा गया कि क्या उन्हें अमर सिंह की कमी खलती है? इस सवाल पर उन्होंने कहा,''पार्टी उन्हें याद नहीं करती है. हमारी मुलाक़ात भी नहीं होती हैं. कभी अगर मिलजाएं, तो मैं उनसे नमस्कार कर लेता हूं.'' ये तो सिर्फ अखिलेश के चुनाव प्रचार कीकुछ बातें थीं. यूपी चुनाव सिर पर हैं. आपको अभी दूसरे नेताओं के चुनावी प्रचार केपुराने-नए किस्से भी सुनाएंगे. Stay Tuned.--------------------------------------------------------------------------------ये स्टोरी निशांत ने की है.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें- जब मुलायम ने अखिलेश की बेटी से कहा 'तुम्हारे पापा बहुत ज़िद्दी हैं'तो अखिलेश का चुनाव चिह्न बदल दिया रामगोपाल ने क्या अखिलेश-राहुल की दोस्ती सेमोदी-माया को घबराना चाहिए?