पांच राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं. माहौल जम चुका है. टिकटों के लिएजोर-आजमाइश हो रही है और खूब प्रचार किया जा रहा है. इसी बीच मेरठ की सरधना सीट सेबीजेपी कैंडिडेट संगीत सोम निपुर गए हैं. अपने इलाके में प्रचार करते समय वो ऐसावीडियो दिखा रहे थे, जिसमें मुजफ्फरनगर दंगों और अखलाख हत्याकांड से जुड़ीआपत्तिजनक क्लिप्स थीं. उन पर आचार संहिता के उल्लंघन का केस दर्ज हुआ है. लेकिन एकसीक्रेट बताएं आपको! भारत में न, आचार संहिता उल्लंघन एक मजाक है. देखिए कैसे.--------------------------------------------------------------------------------साल था 2004 और तारीख 12 अप्रैल. उत्तर प्रदेश में अटल बिहारी वाजपेयी की छत्रछायामें पले-बढ़े बीजेपी नेता लालजी टंडन का जन्मदिन था. बड़े खुश थे, तो लखनऊ मेंमहिलाओं के बीच साड़ी बांटने का ऐलान कर दिया. असल में कुछ ही दिनों बाद लोकसभाचुनाव होने थे, तो रवायत के मुताबिक रेवड़ियां बंटनी थीं. सैकड़ों की तादाद मेंमहिलाएं इकट्ठी हो गईं. साड़ियां बंटने लगीं, लेकिन थोड़ी ही देर में कम पड़ गईं.ये देखकर महिलाओं ने छीना-झपटी मचा दी और वहां भगदड़ मच गई. हर हाथ एक साड़ी खींचकरभाग जाना चाहता था. भगदड़ में 22 महिलाओं की मौत हो गई.चुनाव का मौसम था, तो टंडन पर आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज हो गया. लेकिन,ये मामला आज भी, 13 साल बाद भी, कोर्ट में ही है. कोई फैसला नहीं, कोई सजा नहीं,किसी को भी नहीं.टंडन पर जब साड़ियों के बदले वोट खरीदने के आरोप लगे, तो उन्होंने जवाब दिया, 'लोगतो छुप-छुपकर घूस देते हैं, तो हम तो खुले आम दे रहे थे.' ये वही लालजी टंडन हैं,जो सिफारिश पर लोगों को टिकट दिलाते हैं. बिना जनाधार वाले लोगों को टिकट मिलने परउनके विरोधी एक नारे से उनका मजाक उड़ाते थे कि 'टिकट लाए हैं टंडन से, वोट लाएंगेलंडन से.'खैर, चुनाव खत्म होते-होते ये 22 महिलाएं भी भुला दी गईं और लालजी टंडन पर लदा आचारसंहिता उल्लंघन का केस भी. ये सिर्फ 2004 या टंडन की बात नहीं है. ऐसे मामले चुनावआयोग की हनक दिखाने और दूसरों को डराने तक सीमित हो गए हैं. जिस नेता की पार्टी जीतजाती है, उस पर हुए केस तो आमतौर पर खत्म ही हो जाते हैं. भारत में हमेशा यही होताहै. चुनाव के बाद ऐसे मामलों में कोई ऐक्शन नहीं लिया जाता और आज तक किसी भी नेताको आचार संहिता उल्लंघन के मामले में कोई सजा नहीं हुई.ऐसे कई उदाहरण हैं.बीजेपी और भड़काऊ सीडीउत्तर प्रदेश में 2007 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के कई नेताओं पर भड़काऊ सीडीबांटने का आरोप लगा था. सीडी में बाबरी मस्जिद, गोधरा कांड और मुसलमानों पर कमेंटकिए गए थे. ये सीडी लालजी टंडन ने ही लॉन्च की थी, लेकिन बवाल के बाद खुद को इससेदूर कर लिया. चुनाव आयोग को पता चला, तो नेताओं पर आचार संहिता उल्लंघन का मामलादर्ज हो गया. इस मामले में जितने बड़े नेता शामिल थे, वो सारे धीरे-धीरे बरी हो गएऔर छोटे नेताओं का मामला अब भी कोर्ट में है.अमित शाह के भड़काऊ भाषण का मामला2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के यूपी प्रभारी अमित शाह ने मुजफ्फरनगर में नफरतफैलाने वाला भाषण दिया था. शाह ने कथित तौर पर कहा था, 'ये आम चुनाव पिछले सालमुजफ्फरनगर में हुए सांप्रदायिक दंगों में हुई 'बेइज्जती' का बदला लेने का मौकाहै'. कांग्रेस की शिकायत पर शाह के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्जकिया गया था. इस मामले में पहले तो शाह पर यूपी में रैली करने पर बैन लगा दिया गया,लेकिन बाद में बैन वापस ले लिया गया. पिछले साल दिसंबर में उन्हें क्लीन चिट भी मिलगई.आजम खान भी तो थेसमाजवादी पार्टी में बवाल के बावजूद अखिलेश और मुलायम, दोनों के करीबी बने रहे आजमखान ने भी 2014 के लोकसभा चुनाव में भड़काऊ भाषण दिया था. आजम सपा कैंडिडेट नाहिदहसन के समर्थन में रैली करने गए थे, जहां उन्होंने कहा था कि कारगिल युद्धमुस्लिमों सैनिकों की वजह से जीता गया था. आजम पर आचार संहिता उल्लंघन का मामलादर्ज हुआ और उनके यूपी में रैली करने पर रोक लगा दी गई. इससे गुस्साए आजम ने चुनावआयोग को ललकारते हुए कहा था कि अगर आयोग में हिम्मत है, तो वो उनकी यूपी असेंबली सेसदस्यता खत्म कर दे और आयोग राजनीति का खुदा नहीं है. इतने के बावजूद आजम को कोईसजा नहीं हुई.सपा के नाहिद हसन पर भी आचार संहिता उल्लंघन का एक मामला दर्ज हुआ था, जिसमें उन परकोई ऐक्शन नहीं लिया गया. नाहिद ने अपनी एक रैली में कहा था कि मायावती तीन बारनरेंद्र मोदी की गोदी में बैठ चुकी हैं. इसके वीडियो भी सोशल मीडिया पर मौजूद हैं.https://www.youtube.com/watch?v=c_6DeJZsPeYइमरान मसूद को कैसे भूल सकते हैंकांग्रेसी नेता इमरान मसूद को पार्टी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में सहारनपुर सेकैंडिडेट बनाया था. तब इमरान का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वो पीएम कैंडिडेटनरेंद्र मोदी के बारे में कह रहे थे, 'मैं तो सड़क का आदमी, मैं तो अपने साथी केलिए मार भी दूंगा और मर भी जाऊंगा. नरेंद्र मोदी से कौन डरेगा? हम ठोंककर जवाब देनाजानते हैं. वो गुजरात समझ रहा है, जहां 4% मुसलमान हैं, यहां 42% हैं. उसकीबोटी-बोटी काट देंगे.' वीडियो आने पर कांग्रेसी नेताओं ने इस पर नाराजगी जताई थी औरराहुल गांधी का सहारनपुर दौरा रद्द हो गया था.https://www.youtube.com/watch?v=0EDFBAHuXE8सजा के नाम पर इमरान के साथ इतना हुआ कि वो 14 दिन जेल में रहे. केस अब भी कोर्टमें चल रहा है, लेकिन सजा मिलने की कोई उम्मीद नहीं है. हां, अब वो यूपी केविधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की प्रदेश चुनाव समिति में शामिल हो चुके हैं,जिसमें उनके साथ सलमान खुर्शीद और श्रीप्रकाश जायसवाल जैसे दिग्गज कांग्रेसी नेताहैं. वो राहुल के साथ रैलियों में भी नजर आते हैं.--------------------------------------------------------------------------------ये सब तो किस्से हैं. आंकड़ों पर निगाह फिराएं, तो और भी बहुत कुछ पता चलता है.यूपी में 2012 के विधानसभा चुनाव में 1452 लोगों पर आचार संहिता उल्लंघन के 522 केसदर्ज किए गए थे. 2014 के लोकसभा चुनाव में 1012 लोगों पर 374 केस दर्ज किए गए थे.इनमें से अधिकतर बरी हो गए, जबकि बहुत ही कम लोगों को कोई सजा हुई. जिन्हें हुई थी,वो छोटे कार्यकर्ता थे. ऐसे मामलों में नेता हमेशा कॉलर खड़ा करके बाहर आए हैं.यूपी के रिटायर्ड डीजीपी विक्रम सिंह बताते हैं कि ऐसे मामलों में अगर किसी को सजाहोती भी हो, तो वो सांकेतिक होती है. जैसे कुछ सौ का जुर्माना या दो-तीन की जेल.यानी चुनाव में आप कुछ भी गंध फैलाइए, आचार संहिता के दिखावे के अलावा आपके साथ कुछनहीं होगा.बवाल कराओ झोंक के, आचार संहिता को ठोंक के--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:यूपी के उस चुनाव में एक साथ 8,645 कैंडिडेट की जमानत जब्त हो गई थीइस तरकीब से मुलायम ने बीजेपी को दी थी ऐसी पटखनी कि वो कभी उबर नहीं पाईआजम खान में ऐसा क्या है, जो उनकी बाप-बेटे दोनों से छनती हैभितरघात की ये पांच खबरें मोदी-शाह के माथे पर पसीना ले आएंगीराहुल गांधी का हाथ, बलात्कारियों के साथ!