मुलायम सिंह यादव नींद से जाग गए हैं. साइकिल छिनने के बाद वो शीत कटिबंधीयप्राणियों के माफिक शीतनिद्रा में चले गए थे. अब जगे हैं, तो जबड़े की मांसपेशियोंको भी काम पर लगाया है. 'अच्छे लड़के' के पप्पा जी ने बयान दिया है,'समाजवादी पार्टी अपने दम पर बहुमत हासिल कर सकती है और उसे किसी गठबंधन की जरूरतनहीं है. मैं कांग्रेस का हमेशा से विरोध करता रहा हूं. इन्होंने देश के विकास केलिए कुछ नहीं किया है. ये गठबंधन समाजवादी पार्टी को खा जाएगा. मैं पार्टी को खत्मनहीं होने दूंगा. 105 सीटों पर हमारे कार्यकर्ता क्या करेंगे. उन्होंने भी तो मेहनतकी है. मैं चुनाव में पार्टी के लिए प्रचार नहीं करूंगा.'मुलायम की उम्र और पार्टी में उनकी मौजूदा भूमिका देखते हुए मुमकिन है कि उनका बयानधुएं में उड़ा दिया जाए. पर मुलायम ने ये बातें यूं ही नहीं कही हैं. यूपी कीसियासत रही ही ऐसी है. जिन पार्टियों ने भी गठबंधन किया, उनका चींटा कभी दीवार नहींचढ़ पाया. गठबंधन करने वाली पार्टियों का वोटबैंक खिसका और सीटें भी कम हुईं. आइए,नजर डालते हैं पिछले 20 साल के इतिहास पर.- 1996 में कांग्रेस ने BSP से गठबंधन किया और RLD का पार्टी में विलय करवा लिया.चुनाव में कांग्रेस को 29.13% वोट मिले और 33 सीटों पर जीत. लेकिन, थोड़ा ही वक्तबीता था, गठबंधन में गांठ आ गई. अजित सिंह कांग्रेस से अलग हो गए. कांग्रेस ने सबकलिया और 2002 में अकेले मैदान में उतरी, लेकिन तब तक उसका वोटर बिखर चुका था.कांग्रेस के वोट 29.13% से घटकर 8.99% हो गया और सीटें भी 33 से 25 हो गईं.कांग्रेस ने 2012 में फिर RLD के साथ गठबंधन किया, लेकिन न तो वोट प्रतिशत बढ़ा औरन सीटें. ये 1996 का गठबंधन ही था, जिसकी वजह से आज कांग्रेस यूपी में चौथे नंबर कीपार्टी है.कल्याण सिंह- राम मंदिर के मुद्दे ने 1991 में बीजेपी को यूपी में 31% वोट और 221 सीटें दीं.1993 के चुनाव में वोट 3.30% और बढ़े, लेकिन सीटें 177 रह गईं. सत्ता से बाहरबीजेपी ने 1996 में फिर कलेजा मजबूत किया और अकेले लड़ी. सीटें मिलीं 174. फिरपार्टी ने गठबंधन की राह पकड़ी. राजनाथ के नेतृत्व में राष्ट्रीय लोकदल, अपना दल,लोकतांत्रिक कांग्रेस और JDU से गठबंधन किया गया. बीजेपी 320 सीटों पर उतरी, लेकिनसीटें जीतीं सिर्फ 88 और वोट रह गए 25.31%. 2007 में बीजेपी ने फिर अपना दल के साथगठबंधन किया. 350 सीटों पर उतरी, लेकिन सीटें और घटकर 51 रह गईं और वोट प्रतिशत रहा19.62%. 2012 में जसपा के साथ गठबंधन किया. फिर लुटिया डूबी. सीटें रह गईं 47 औरवोट महज 15.21%.- यूपी में गठबंधन राष्ट्रीय पार्टियों के लिए घाटे का सौदा रहा है, लेकिन स्थानीयपार्टियों को इससे फायदा हुआ है. 1991 के चुनाव में बीएसपी को सिर्फ 10.26% वोट और12 सीटें मिली थीं. 1996 में बीएसपी ने कांग्रेस से हाथ मिलाया, तो वोट बढ़कर27.23% और सीटें 67 हो गईं. इस बढ़े वोटर्स का इस्तेमाल पार्टी ने सत्ता की सीढ़ीके तौर पर किया. 2007 में बीएसपी अपने दम पर सत्ता में आई और 2012 में सत्ता सेबाहर भी हुई. लेकिन, अब माया गठबंधन से किनारा कर रही हैं. जनता के मूड को भांपतेहुए इस बार भी वो अकेले ही चुनाव मैदान में हैं.- जनता दल के रास्ते यूपी की सत्ता पर काबिज होने वाले मुलायम ने जब खुद की पार्टीबनाई, तो 1993 में बीएसपी से गठबंधन कर लिया. 256 सीटों पर लड़ने वाली सपा ने 109सीटें जीती थीं. हालांकि, गठबंधन लंबा नहीं चला. 1996 का चुनाव आया, तो मुलायम नेमाया को छोड़कर वामपंथी दलों के साथ कई अन्य पार्टियों के साथ समझौते किए. इससेसीटें और वोट प्रतिशत, दोनों बढ़े. लेकिन, 2002 के गठबंधन ने मुलायम की सीटेंबढ़ाईं, लेकिन वोटर्स घटा दिए. 2007 के गठबंधन ने वोटर्स बढ़ाए, तो सीटें घटा दीं.बाकी, 2012 तो पूरी तरह सपा के नाम रहा.ये आंकड़े मुलायम के बयान को जस्टिफाई करते हैं, लेकिन उनकी राजनीति को नहीं.मुलायम का मानना है कि गठबंधन सपा को खत्म कर देगा, जबकि अपनी नेताई के दिनों मेंउन्होंने जिससे चाहा, उसके साथ गठबंधन किया और जब मन किया, गठबंधन से पीछे हट गए.आज कांग्रेस को कोसने वाले मुलायम वही मुलायम हैं, जो 1996 में गठबंधन की वजह से हीप्रधानमंत्री पद के दावेदार बने थे. इन्हीं मुलायम ने यूपीए-1 और यूपीए-2 कोराजी-खुशी समर्थन दिया था. खैर, नेताजी हैं, गलतियां हो जाती हैं.मुलायम के बयान के बाद जब इस पर अखिलेश से उनकी राय पूछी गई, तो उन्होंने कहा, 'मैंचाहता हूं कि नेताजी कैंपेनिंग में आएं, क्योंकि सरकार उन्हीं की बनने जा रही है.और सबसे ज्यादा खुश अगर कोई होगा सरकार दोबारा बनने पर, तो वो नेताजी ही होंगे. सपातो दो-ढाई सौ सीटें ला ही रही है, लेकिन अगर कांग्रेस साथ आ गई, तो हम 300 के पारचले जाएंगे.' ये बयान ही अखिलेश हैं. मुलायम के बेटे अखिलेश.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:अतरौली से ग्राउंड रिपोर्ट: एक परिवार से दिल्लगी तमाम समीकरणों पर भारी हैशामली से ग्राउंड रिपोर्ट: मदरसे की छत पर तिरंगा था, मगर दिखावा नहीं थाहेलिकॉप्टर से उड़ने वाले ये नेताजी कहते हैं, 'वोट मांगने में शर्म आती है'यूपी में बीजेपी-कांग्रेस की इन पांच बेटियों का जीतना तय है!