'ओवैसी-हुमायूं को फंड कौन दे रहा', ममता बनर्जी के करीबी का इशारा BJP की तरफ?
पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए असदुद्दीन ओवैसी ने हुमायूं कबीर की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी से गठबंधन किया है. राज्य की सत्ता पर काबिज तृणमूल कांग्रेस का मानना है कि इस गठबंधन के चलते मुस्लिम वोटों का बिखराव नहीं होने वाला है. उन्होंने ओवैसी और कबीर पर बीजेपी से फंडिंग लेने का आरोप भी लगाया है.

बंगाल चुनाव 2026 में असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री हो गई है. उन्होंने हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ गठबंधन किया है. कबीर तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा थे. मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनवाने के ऐलान को लेकर चर्चा में आए थे. इसके बाद पार्टी से निकाले गए. अब उनकी पुरानी पार्टी TMC ने इस गठबंधन को निशाने पर लिया है. दावा किया कि ओवैसी-कबीर के गठजोड़ को ‘बीजेपी की फंडिंग’ मिल रही है.
इंडिया टुडे ने ममता बनर्जी सरकार में मंत्री और उनके करीबी सहयोगी फिरहाद हकीम से एक्सक्लूसिव बात की है. उन्होंने दावा किया,
ओवैसी और हुमायूं कबीर के गठबंधन के चलते मुस्लिम वोटों में बंटवारा नहीं होगा. ममता सरकार में सभी समुदाय सुरक्षित हैं. बंगाल कभी भी गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे भाजपा शासित राज्यों की राह नहीं चलेगा.
TMC से निकाले जाने के बाद हुमायूं कबीर ने दिसंबर 2025 में अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई थी. आम जनता उन्नयन पार्टी. बंगाल चुनाव में उनकी पार्टी ने AIMIM के साथ गठबंधन करने का फैसला किया है. इस फैसले ने राज्य में मुस्लिम वोट बैंक की सियासत को दिलचस्प मोड़ दे दिया है. हालांकि फिरहाद हकीम का मानना है कि यह गठजोड़ बेअसर रहेगा. उन्होंने बताया,
कोई असर नहीं होगा. बंगाल के मुस्लिम बहुत जागरूक हैं. यहां के लोग खुद को सिर्फ हिंदू या मुसलमान के तौर पर नहीं देखते. बंगाली मुस्लिम और हिंदू का भरोसा सेक्युलरिज्म में है.
TMC के सीनियर नेता ने ओवैसी और कबीर की पार्टियों को ‘सांप्रदायिक’ करार दिया है. उनका दावा है कि इन पार्टियों की फंडिंग बीजेपी कर रही है. हुमायूं कबीर को साल 2025 में पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया था. क्योंकि उन्होंने मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद नाम से मस्जिद बनाने का संकल्प किया था. फिरहाद हकीम ने सवाल उठाया,
इस तरह के अभियान के लिए फंड कहां से आ रहा है. यह उन्हीं सोर्सेज से आ रहा है, जिनसे ओवैसी को फंड मिल रहा है. अगर आप खुद कह रहे हैं कि मुस्लिम वोट बंट रहे हैं. इसका मतलब है कि आप इस बंटवारे से फायदा उठाने वाले गठबंधन का समर्थन कर रहे हैं.
पिछले कई सालों से ओवैसी की AIMIM पर मुस्लिम वोटों में बंटवारा करके बीजेपी को फायदा पहुंचाने का आरोप लगता रहा है. उन पर बीजेपी की बी टीम होने के आरोप भी लगते रहे हैं. इसे लेकर TMC नेता ने कहा,
ओवैसी पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं. यह बिहार या उत्तर प्रदेश नहीं है. यहां न तो हिंदू सांप्रदायिकता को बर्दाश्त करेंगे और न ही मुस्लिम. बंगाल की बुनावट सेक्युलर है.
बीजेपी ममता बनर्जी सरकार पर मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप लगाती रही है. बंगाल सरकार के वरिष्ठ मंत्री हकीम ने इसके जवाब में कहा,
जो लोग विकास की रेस में पीछे हैं ममता बनर्जी उनके साथ खड़ी हैं. आप यह क्यों नहीं कहते कि हम अनुसूचित जनजातियों को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं? क्योंकि बीजेपी ने आपके दिमाग में हिंदू बनाम मुस्लिम का विचार डाल दिया है. सरकार का कर्तव्य है कि वह पीछे रह गए लोगों को साथ लेकर चले.
पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो फेज में वोटिंग होनी है. रिजल्ट 4 मई को घोषित किया जाएगा. ममता बनर्जी लगातार चौथी बार सत्ता की चाभी हासिल करने की कवायद में जुटी हैं. वहीं बीजेपी बंगाल में पहली बार सरकार बनाने को लेकर पुरजोर कोशिश कर रही है.
वीडियो: राजधानी: क्या पश्चिम बंगाल में ओवैसी की एंट्री से ममता बनर्जी का मुस्लिम वोट बैंक घट जाएगा?

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