यादव परिवार में चार महीने से चल रहा दंगल खत्म हुए चार दिन हो चुके हैं. अब यूपीकी सियासत नए कारनामे दिखा रही है. जिस महागठबंधन को जिताऊ माना जा रहा था, उसके नबनने की आधिकारिक घोषणा होना ही बचा है. RLD खुद ही बाहर हो चुकी है और कांग्रेस केसाथ सपा ने ऐसा सलूक किया है, उसके बाद वो न घर की रही, न घाट की. अखिलेश को मिलरहीं शुभकामनाएं उन पर दबाव बढ़ा रही हैं. अब अगर सपा चुनाव हारती है, तो अखिलेशपिता को 'राजनीति सिखाने' और कांग्रेस के साथ 'गलत करने' के दोषी कहलाएंगे. लेकिन,इन सारी पेचीदगियों के बीच सामने आए RJD मुखिया लालू प्रसाद यादव और वो अपने फ्लेवरका शिगूफा छोड़ गए. अखिलेश को साइकिल मिलने के बाद लालू ने उन्हें बधाई दी और कहा,'यूपी में बीजेपी की हार तय करने के बाद हम 2019 में नरेंद्र मोदी की भगवा पार्टीको जड़ से उखाड़ फेंकेंगे. समाजवादी ताकतों की जीत पक्की करने के लिए मैंमुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए प्रचार करूंगा और इसलिए हम यूपी में अपना कोईप्रत्याशी नहीं उतारेंगे.' Oh Really??? लालू के मुताबिक अगर वो RJD से कैंडिडेटनहीं उतारेंगे, तो सपा के लिए थोड़ी टेंशन कम हो जाएगी और वो आराम से चुनाव जीतजाएगी. लेकिन कोई ये बताएगा कि अगर लालू अपने कैंडिडेट उतार भी दें, तो क्या उचारलेंगे. लालू और नीतीश अपने प्रचार के बूते पूर्वांचल में भले थोड़ा सा माहौल बनादें, लेकिन सपा को मजबूती देने के लिए वो इससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकते. कम से कमआंकड़े तो यही कहते हैं.2002 विधानसभा चुनावयूपी के 2002 विधानसभा चुनाव में RJD ने अपने 25 कैंडिडेट उतारे थे. इन 25 के 25,आई रिपीट, 25 के 25 कैंडिडेट्स की जमानत जब्त हो गई थी. पार्टी को कुल वोट मिले थे0.04%. और ये कह रहे हैं कि अखिलेश के भले के लिए नहीं लड़ेंगे. इसी चुनाव मेंनीतीश की पार्टी JDU से 16 प्रत्याशी उतरे थे चुनाव लड़ने. इनके दो कैंडिडेट जीत गएथे, लेकिन आठ की जमानत जब्त हो गई थी. वोट परसेंटेज था 0.58%. कहने के लिए लालू कीपार्टी से तो बेहतर ही था.2007 विधानसभा चुनावपांच साल बाद एक बार फिर दोनों यूपी चुनाव के दंगल में उतरे. इस बार लालू ने दिलकर्रा करके 66 उम्मीदवार उतार दिए. यूपी ने जनता ने इस बार भी कोई रहम नहीं दिखाया.65 की जमानत जब्त हो गई. 66वां भी सिर्फ जमानत ही बचा पाया था. चुनाव नहीं. इस बार66 कैंडिडेट थे, तो वोट परसेंट हो गया 0.26%. JDU ने थोड़ी समझदारी दिखाते हुए एकबार फिर 16 ही कैंडिडेट उतारे, लेकिन यूपीवालों ने कुछ ज्यादा ही समझदारी दिखा थी.पिछली बार दो कैंडिडेट चुनाव जीते थे, इस बार सिर्फ एक जीता. इस चुनाव में JDU के12 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी और वोट प्रतिशत रहा 0.42%.2012 विधानसभा चुनावपिछले चुनाव में RJD को न जाने कौन सा ब्रह्मज्ञान मिला, उसने सिर्फ चार कैंडिडेटउतारे. 66 से सीधे चार पर आ गई पार्टी. लेकिन परिणाम वही रहा. चार के चारों अपनीजमानत नहीं बचा पाए. वो परसेंटेज भी बड़ा राइमिंग वाला था. सिर्फ 0.04%. इसी चुनावमें JDU को ठीक उल्टा ज्ञान मिला था. इस बार नीतीश ने न जाने क्या सोचकर 219कैंडिडेट्स को मैदान में उतार दिया. मायावती के खिलाफ एंटी-इन्कम्बेंसी थी, तो सोचाहोगा कि जीत जाएंगे. लेकिन, सारे के सारे, पूरे 219 उम्मीदवारों की जमानत जब्त होगई. और इतने उम्मीदवार मिलकर सिर्फ 0.36% वोट हासिल कर पाए. अब बताइए. इस बार भीलड़ लेते, तो क्या कबार लेते. एक बार फिर इनके कैंडिडेट्स की जमानत जब्त (इसेबेइज्जती ही पढ़ें) हो जाती. और अगर कहीं बीजेपी जीत गई, तो अब तक जित्ती बयानबाजीकी है, वो एक झटके में उल्टी पड़ जाती. बिहार चुनाव तो एक होकर निकाल ले गए थे,लेकिन वहां और यूपी की सियासत में फर्क है. मुलायम और लालू, दोनों अपने-अपनेराज्यों में मुस्लिम-यादव समीकरण पर निर्भर रहे हैं, लेकिन दोनों एक-दूसरे केराज्यों में सीटें नहीं निकाल सकतें.लालू यादव ने बड़ी चालाकी से खुद की बेइज्जती बचा ली.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें :यूपी का ये मुख्यमंत्री अपने अकाउंट में मात्र दस हजार रुपये लेकर मराजब फुफ्फो घर आती हैं, तो लगता है 'ईस्ट इंडिया कंपनी' आई है