कहानी 'झुलनी के धक्के' की जिससे लालू यादव अपने विरोधियों को धकियाते हैं!
Bihar के Sasaram में Lalu Yadav ने भोजपुरी गीत 'लागल लागल झुलनिया के धक्का बलम कलकत्ता निकरि गए' की शुरुआती लाइनें दोहरायीं. हालांकि, उनका मकसद राजनीतिक था लेकिन इस गाने के पीछे प्रवासी बिहारी समाज की दर्द और पीड़ा छिपी है.
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भोजपुरी गीतों में कोलकाता पलायन के प्रतीक के तौर पर आता है. (FB)
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