ट्रंप डील करना चाह रहे, ईरानी सेना ने एक और हमला कर दिया
डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान से बातचीत का संकेत दिया है. लेकिन ईरान की ओर से इसका खंडन किया जा रहा है. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने उनके दावे को सिरे से खारिज कर दिया है. यही नहीं IRGC और ईरानी विदेश मंत्रालय ने भी उनके दावे का खंडन किया है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध को खत्म करने का संकेत दिया है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच इसको लेकर 'अच्छी' बात हो रही है. लेकिन ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने उनके दावे को सिरे से खारिज कर दिया है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया है. गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत नहीं हुई है. राष्ट्रपति ट्रंप के दावे पूरी तरह से गलत हैं. उन्होंने आरोप लगाया,
इस तरह की फेक न्यूज का इस्तेमाल तेल और वित्तीय बाजार को प्रभावित करने और मौजूदा हालात से ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है.
ईरानी स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने आगे बताया,
ईरान के लोगों की मांग है कि हमलावरों को ऐसी सजा दी जाए कि उन्हें अपने किए का पछतावा हो. ईरानी नेतृत्व अपने सुप्रीम लीडर और जनता के साथ मजबूती से खड़ी है. लक्ष्य हासिल करने तक संघर्ष जारी रहेगा.
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी राष्ट्रपति ट्रंप के दावे पर सवाल उठाए हैं. उनकी ओर से कहा गया कि राष्ट्रपति ट्रंप के विरोधाभासी बयानों से इस युद्ध पर कोई असर नहीं रहेगा. IRGC ने बताया कि उन्होंने इजरायल और मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर नया हमला किया है.
IRGC के हमलों के दावे के बीच बहरीन में सायरन की आवाज सुनी गई है. बहरीन के गृह मंत्रालय की ओर से बताया गया कि मिसाइल और ड्रोन हमले की जानकारी देने वाले सायरन की आवाज सुनी गई है. मंत्रालय ने सभी नागरिकों और निवासियों को नजदीकी सुरक्षित ठिकानों में शरण लेने का अनुरोध किया है.
ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी बातचीत से इनकार किया
ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी अमेरिका से किसी तरह की बातचीत से इनकार किया है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है. उन्होंने बताया कि कुछ मित्र देशों के जरिए अमेरिका की ओर से बातचीत के संदेश जरूर आए हैं. लेकिन ईरान ने जवाब में अपनी शर्तें साफ कर दी हैं.
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