कौन हैं जहांगीर खान जिन्हें IPS अजयपाल शर्मा ने घर पर जाकर दी चेतावनी? TMC क्यों कर रही 'यूपी से घसीट' लाने की बात
सोशल मीडिया पर एक वीडियो आग की तरह फैल रहा है जिसमें यूपी कैडर के आईपीएस ऑफिसर अजयपाल शर्मा टीएमसी प्रत्याशी जहांगीर खान के घर पर खड़े होकर खुली चेतावनी दे रहे हैं. जवाब में जहांगीर खान का भी वीडियो आया है और तृणमूल कांग्रेस का भी, जो 4 मई के बाद अजयपाल को घसीटकर लाने की बात कर रही है.

पश्चिम बंगाल चुनाव के दूसरे चरण की वोटिंग से ठीक पहले माहौल एकदम गरमा गया है. इस बार मामला यूपी के एक अधिकारी और टीएमसी के नेताओं के बीच तनातनी का है. उत्तर प्रदेश के 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' और बंगाल के 'बाहुबली' नेता के बीच भिड़ंत देखने को मिल रही है. दरअसल सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है. इसमें यूपी कैडर के आईपीएस ऑफिसर अजयपाल शर्मा, टीएमसी प्रत्याशी जहांगीर खान के घर पर खड़े होकर खुली चेतावनी दे रहे हैं.
अजयपाल शर्मा केंद्रीय पर्यवेक्षक (Police Observer) के तौर पर बंगाल में तैनात हैं. वीडियो में वो जहांगीर खान के घर वालों और कार्यकर्ताओं को दो-टूक कह रहे हैं कि
अगर कहीं से भी खबर आई कि आम वोटर को धमकाया गया या उसे वोट देने से रोका गया, तो फिर पुलिस और केंद्रीय फोर्स ऐसी 'खबर' लेगी कि बाद में रोने का भी मौका नहीं मिलेगा.
इस वीडियो के सामने आते ही टीएमसी के खेमे में मानों खलबली मच गई. पार्टी ने फौरन प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और सीधे-सीधे अजयपाल शर्मा को धमकी दे डाली. दरअसल टीएमसी प्रत्याशी पर स्थानीय लोगों और मतदाताओं को धमकाने का आरोप था. आईपीएस शर्मा इन्हीं शिकायतों के आधार पर उनके घर चेतावनी देने के लिए पहुंचे थे. इस पूरे प्रकरण पर टीएमसी नेताओं ने कहा कि
4 मई को नतीजे आने दीजिए, इसके बाद अजयपाल के खिलाफ एफआईआर होगी और उन्हें यूपी से घसीट कर बंगाल लाया जाएगा.
उधर जहांगीर खान ने भी अपनी तरफ से मोर्चा खोल दिया है. उनका भी एक वीडियो वायरल है जिसमें वो भारी भरकम अंदाज में कह रहे हैं कि
‘खेल अजयपाल ने शुरू किया है, मगर खत्म हम करेंगे.
अब सवाल ये है कि आखिर ये जहांगीर खान कौन है जिसके घर पर खुद यूपी का एक दबंग आईपीएस जा पहुंचा? क्यों अजयपाल शर्मा को इस तरह सीधे मैदान में उतरना पड़ा? और क्या ये वाकया बंगाल चुनाव के नतीजों की दिशा बदल देगा? चलिए, इस पूरे 'सियासी दंगल' की एक-एक परत खोलते हैं.
अजयपाल शर्मा: 'सिंघम' की बंगाल में एंट्री और वो वायरल चेतावनी
अजयपाल शर्मा उत्तर प्रदेश में सीनियर अधिकारी हैं और उन्हें 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' के नाम से भी जाना जाता है. चुनाव आयोग ने उन्हें दक्षिण 24 परगना जैसे संवेदनशील इलाके में पुलिस ऑब्जर्वर बनाकर भेजा था. इस नियुक्ति की मीडिया में काफी चर्चा भी हुई थी. अजयपाल शर्मा फिलहाल प्रयागराज में एडिशनल सीपी (लॉ एंड ऑर्डर) हैं और उन्हें यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का भरोसेमंद अफसर माना जाता है.
अजयपाल शर्मा का कहना है कि जब जहांगीर खान के इलाके में पहुंचे, तो उन्हें खबर मिली थी कि वहां वोटर्स को डराया-धमकाया जा रहा है. वायरल वीडियो में दिख रहा है कि वो जहांगीर के घर के बाहर खड़े हैं और उनके साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों (CAPF) के जवान मुस्तैद हैं. वो साफ लहजे में कहते हैं कि टीएमसी प्रत्याशी के समर्थक लोगों को धमका रहे हैं, ये बंद होना चाहिए. आगे बढ़ने से पहले आपको अजयपाल शर्मा का वो वीडियो दिखाते हैं.
उनकी भाषा एकदम वैसी ही थी जैसी यूपी में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान सुनी जाती है. उन्होंने चेतावनी दी कि 'अच्छी तरह समझ लें, अगर किसी ने बदमाशी की तो उसका कायदे से इलाज होगा. बाद में रोने से काम नहीं चलेगा'.
कौन है जहांगीर खान? अभिषेक बनर्जी के माने जाते हैं खास
जहांगीर खान कोई मामूली प्रत्याशी नहीं हैं. वो ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के बेहद करीबी माने जाते हैं. दक्षिण 24 परगना के फाल्टा इलाके में जहांगीर का सिक्का चलता है. स्थानीय लोग बताते हैं कि इस इलाके में बिना जहांगीर की मर्जी के पत्ता भी नहीं हिलता. उनका सियासी सफर पंचायत स्तर से शुरू हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने अपनी पकड़ इतनी मजबूत कर ली कि वो जिले के सबसे ताकतवर टीएमसी चेहरों में गिने जाने लगे.
जहांगीर खान का प्रभाव सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है. उन पर आरोप लगते रहे हैं कि वो 'मसल पावर' के जरिए चुनाव जीतते हैं. विपक्ष का आरोप है कि जहांगीर के समर्थक गांवों में जाकर लोगों को पहले ही बता देते हैं कि किसे वोट देना है और किसे नहीं. अगर कोई उनकी बात नहीं मानता, तो उसे चुनाव के बाद 'देख लेने' की धमकी दी जाती है.
जहांगीर खान को दक्षिण 24 परगना में टीएमसी के संगठन की रीढ़ माना जाता है. स्थानीय राजनीति में उनका कद इतना बड़ा है कि उन्हें डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र (जो अभिषेक बनर्जी का निर्वाचन क्षेत्र है) के सबसे प्रभावशाली रणनीतिकारों में गिना जाता है. उनके बारे में कहा जाता है कि इलाके के हर बूथ पर उनकी सीधी पकड़ है.
जहांगीर खान का 'दहशत' वाला एंगल और विपक्ष के आरोप
विपक्ष का आरोप है कि जहांगीर खान का प्रभाव सिर्फ लोकप्रिय समर्थन पर नहीं, बल्कि 'दहशत' पर टिका है. स्थानीय बीजेपी नेताओं का दावा है कि फाल्टा में विपक्ष को चुनाव प्रचार तक करने में मुश्किल होती है. जहांगीर खान पर आरोप लगते रहे हैं कि वो 'मसल पावर' के जरिए चुनाव को एकतरफा बनाने की कोशिश करते हैं.
टीएमसी की बौखलाहट: 'यूपी नहीं है ये' वाला तर्क
अजयपाल शर्मा के इस एक्शन ने टीएमसी को बैकफुट पर धकेल दिया है. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और महुआ मोइत्रा जैसे दिग्गज नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. महुआ मोइत्रा ने तो सोशल मीडिया पर यहां तक लिख दिया कि 'अपनी हीरोपंती संभालकर रखिए, ये यूपी नहीं है'. टीएमसी का आरोप है कि अजयपाल शर्मा एक 'एजेंट' की तरह काम कर रहे हैं और उनका मकसद बीजेपी को फायदा पहुंचाना है.
टीएमसी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा गया कि एक पुलिस ऑब्जर्वर का काम शांति बनाए रखना है, न कि किसी प्रत्याशी के घर जाकर उसे या उसके परिवार को धमकाना. आइये आपको सुनाते हैं कि टीएमसी ने इस पूरे मुद्दे पर क्या कहा,
पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है. लेकिन इसके पीछे की असली वजह कुछ और ही बताई जा रही है. दरअसल, बीजेपी का आरोप है कि टीएमसी को डर है कि अगर केंद्रीय फोर्स और सख्त अफसरों ने जमीन पर कब्जा जमा लिया, तो उनका 'बूथ मैनेजमेंट' फेल हो सकता है.
जहांगीर खान का 'खेल' वाला बयान और सियासी मायने
जहांगीर खान का वीडियो भी कम चर्चा में नहीं है. वो जिस 'खेल' की बात कर रहे हैं, वो असल में बंगाल की राजनीति का एक पुराना मुहावरा बन चुका है-'खेला होबे'.
जहांगीर का कहना है कि अजयपाल शर्मा ने उनके परिवार को परेशान करके आग से खेलने का काम किया है. वो दावा कर रहे हैं कि 4 मई के बाद पुलिस प्रशासन राज्य सरकार के हाथ में होगा और तब इन अफसरों से हिसाब चुकता किया जाएगा.
जहांगीर के लिए ये साख की लड़ाई है. अगर वो अपने इलाके में अजयपाल शर्मा के सामने झुकते नजर आए, तो उनके कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर सकता है. इसलिए वो जानबूझकर आक्रामक तेवर दिखा रहे हैं ताकि अपने समर्थकों को ये संदेश दे सकें कि वो डरे नहीं हैं. लेकिन अजयपाल शर्मा के साथ जिस तरह से केंद्रीय बल तैनात हैं, उसने जहांगीर की राह मुश्किल कर दी है.
अजयपाल को क्यों उतरना पड़ा मैदान में? इनसाइड स्टोरी
सूत्रों की मानें तो अजयपाल शर्मा को खुफिया इनपुट मिले थे कि फाल्टा और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर फर्जी वोटिंग और डराने की साजिश रची गई है. जब वो जांच के लिए जहांगीर के घर की तरफ बढ़े, तो उन्हें स्थानीय पुलिस और कुछ लोगों ने रास्ता भटकाने की भी कोशिश की. बताया जा रहा है कि जहांगीर के घर पर तय सीमा से ज्यादा सुरक्षाकर्मी मौजूद थे, जिस पर अजयपाल ने कड़ी आपत्ति जताई और वहां के एसपी को नोटिस भी जारी कर दिया.
ये पहली बार है जब यूपी का कोई अफसर बंगाल में इस तरह खुलकर बाहुबलियों को चुनौती दे रहा है. चुनाव आयोग का मकसद भी यही था कि एक ऐसी 'Psychological War' जीती जाए जिससे आम जनता बिना किसी डर के पोलिंग बूथ तक पहुंच सके.
बंगाल चुनाव का दूसरा चेहरा: हिंसा और सुरक्षा का पेंच
बंगाल में चुनाव मतलब हिंसा-ये एक ऐसी कड़वी हकीकत है जिसे नकारा नहीं जा सकता. पहले चरण में भी मुर्शिदाबाद और कूचबिहार जैसे इलाकों से बमबाजी और मारपीट की खबरें आई थीं. दूसरे चरण में दक्षिण 24 परगना सबसे संवेदनशील है. यहां की 23 सीटों पर महिला वोटर्स की संख्या पुरुषों से ज्यादा है और यही साइलेंट वोटर अक्सर डर की वजह से घर से नहीं निकलता.
अजयपाल शर्मा जैसे अफसरों की तैनाती इसी साइलेंट वोटर को सुरक्षा का अहसास दिलाने के लिए की गई है. केंद्र सरकार और चुनाव आयोग इस बार बंगाल में किसी भी तरह की कोताही नहीं बरतना चाहते. यही वजह है कि इस बार केंद्रीय बलों की संख्या पिछले चुनावों के मुकाबले काफी ज्यादा रखी गई है.
क्या कहता है कानून: क्या एक अफसर को धमकाना सही है?
टीएमसी ने जिस तरह 4 मई के बाद एफआईआर की धमकी दी है, वो कानून की नजर में काफी पेचीदा मामला है. चुनाव के दौरान सभी अफसर चुनाव आयोग के अधीन होते हैं. उनके काम में बाधा डालना या उन्हें निजी तौर पर धमकी देना चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है. टीएमसी का तर्क है कि अजयपाल ने अपनी मर्यादा लांघी है.
इस पूरे मामले पर यूपी के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह का कहना है,
आम तौरपर ऑब्जर्वर का काम स्थिति पर नजर बनाए रखना और उसकी रिपोर्ट चुनाव आयोग को देना होता है. लिहाजा बतौर पर्यवेक्षक अजयपाल शर्मा का यूं चेतावनी देना समझ से परे है.
मगर साथ ही पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रकाश सिंह ये भी जोड़ते हैं कि अगर चुनाव आयोग के जॉब डिस्क्रिप्शन में कुछ अधिकार जोड़े हैं तो फिर कहानी पलट सकती है.
एक सीनियर आईपीएस अधिकारी ने हमसे बातचीत में कहा कि इस तरह की धमकियों से अधिकारियों के मनोबल पर असर पड़ सकता है, लेकिन अजयपाल शर्मा जैसे 'हार्ड टास्क मास्टर' पर इसका कितना असर होगा, ये देखने वाली बात होगी. कानूनी तौर पर अगर किसी अफसर ने अपनी ड्यूटी के दौरान कुछ गलत किया है, तो उसकी शिकायत चुनाव आयोग से की जा सकती है, लेकिन 'घसीट कर लाने' जैसी भाषा राजनीतिक स्टंट ज्यादा लगती है.
क्या बदलेगा 4 मई के बाद?
अगर बंगाल में सत्ता परिवर्तन होता है, तो अजयपाल शर्मा जैसे अफसरों के लिए राह आसान होगी. लेकिन अगर ममता बनर्जी की सरकार फिर से लौटती है, तो टीएमसी अपनी धमकी को अमली जामा पहनाने की कोशिश कर सकती है. हालांकि, आईएएस और आईपीएस अफसरों को केंद्र सरकार का संरक्षण प्राप्त होता है, इसलिए उन्हें किसी राज्य सरकार के लिए सीधे तौर पर निशाना बनाना इतना आसान नहीं होता.
लेकिन राजनीतिक संदेश साफ है-बंगाल का चुनाव अब सिर्फ दो दलों की लड़ाई नहीं, बल्कि दो अलग-अलग तरह की 'वर्किंग स्टाइल' का मुकाबला है. एक तरफ यूपी का मॉडल है तो दूसरी तरफ बंगाल का.
क्या ये अंत है या सिर्फ शुरुआत?
अजयपाल शर्मा और जहांगीर खान की ये भिड़ंत आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है. अंत में जीत किसकी होगी, ये तो 4 मई को ही पता चलेगा, लेकिन फिलहाल बंगाल की गलियों में अजयपाल शर्मा की उस चेतावनी की गूंज सुनाई दे रही है, जिसने बाहुबलियों की नींद उड़ा दी है.
वीडियो: राजधानी: बंगाल का मुस्लिम वोटर किसके साथ?

