||मेरा चुनाव में कोई मुद्दा नहीं है, मेरा अपना पर्सनल मुद्दा है. मुझे पैसा कमानाहै, इन्वेस्ट करना है. विधायक बन कर अपनी सारी सुविधा खड़ी करनी है||- गोपाल चौधरी अागरा में ताजमहल और पागलखाना ही बस नहीं है. गोपाल चौधरी भी हैं. मैं इनके लिएअपार श्रद्धा से भर गया हूं. सच्ची में. इस लिए आगे मैं इन्हें नेता जी ही लिखूंगा.आप 'सायकिल' वाले नेताजी के चक्कर में कंफ्यूज़ मत होइएगा. हां, तो ये नेताजीपर्चा भरकर जब निकले, तो पत्रकारों ने उनसे वही क्लीशे सवाल पूछ लिया - 'चुनावक्यों लड़ने जा रहे हैं, क्या आपके मुद्दे हैं.' लेकिन नेता जी का जवाब क्लीशेबिल्कुल नहीं था. ऐसा था कि सुनने वाले के कान खड़े हो जाएं. ह्रदय परिवर्तन होजाए. और पता नहीं क्या-क्या हो जाए. पहले आप अपनी आंखों से देख लीजिए कि मैं बातबढ़ा चढ़ा कर तो नहीं कह रहाः सही कहा था न मैंने? नेता जी के जवाब को आप भारत के राजनैतिक इतिहास का सबसेईमानदार जवाब कहें तो भी चलेगा. ईमानदारी खुद इनके यहां पानी भरती है. राजाहरीशचंद्र और महात्मा गांधी होते तो पक्का आगरा जाकर ही बसते. आगरा में भी भटकतेनहीं. पहले पता करते कि उत्तर प्रदेश विधानसभा के लए जो परिसीमन हुआ है, उस हिसाबसे सीट नंबर 88 कहां पड़ती है. हम बता दें, आगरा साउथ में पड़ती है. नेता जी यहींसे चुनाव लड़ेंगे. नेता जी आज की राजनीति के लिए साक्षात वरदान हैं. दलगत दलगतराजनीति से उपर की चीज़ हैं. इसलिए निर्दलीय लड़ते हैं. उनके दांतों का भी एक हीसेट है. दिखाना - खाना सब एक से ही. इसलिए वो साफ बात करते हैं. लोगों को उनकी बातका मतलब निकालना नहीं पड़ता. नेता जी साफ बता रहे हैं कि उनका मकसद क्या है. उनकाऑफर भी कम आकर्षक नहीं है. वो बजट में अलॉट होने वाले पैसे में से 75 फीसदी पैसाविकास कार्य में ही लगाने की बात कर रहे हैं. अपने लिए सिर्फ एक-चौथाई हिस्सा रखनाचाह रहे हैं. और ये भी लालच नहीं है. यही मार्केट रेट है. मीडिया का भी नेता जी नेखास ध्यान रखा है. उनके बयानों में बिटवीन द लाईन्स छुपा ज्ञान निकालने के लिएपत्रकारों को रातें खराब करने की ज़रूरत नहीं है. नेता जी अपने फ्रेशर होने की बातभी नहीं छुपा रहे हैं. बता रहे हैं कि अभी कमाई के तौर-तरीके उन्हें मालूम नहींहैं. लेकिन कॉन्फिडेंट हैं कि जीतने के बाद सीख जाएंगे. सरकारी मशीनरी पर उन्हेंपूरा भरोसा है. कह भी रहे हैं कि जीतने के बाद अधिकारी ही उन्हें गाइड करेंगे. सहीबात है, नेता-अधिकारी का तोलमेल जनता की भलाई के लिए बहुत ज़रूरी है. नेताजी काप्रचार प्लान भी साफ है. पर्चा (नॉमिनेशन) दाखिल करने के बाद वो सारा ध्यान इस-उससमीकरण में नहीं लगाएंगे. ये सोचेंगे कि जनता को बवकूफ कैसे बनाएं. नेता जी कीसाफगोई का कायल होकर मैं उनकी हिम्मत का कसीदा भी पढ़ना चाहता हूं. सवा-सौ करोड़मितरों के बेवकूफ बनने की बात इतने दिल से आज तक किसी ने नहीं कही. और ये कहते हुएउनके भाव द्वेष या ईर्श्या के नहीं हैं, सम्मान के हैं. स्पोर्टस्मैनशिप का अद्भुतउदाहरण हैं नेता जी.मैं नेता जी को दिल दे देना चाहता हूं. लेकिन क्या करूं, एक ही दिल था. पर वो तोमोदी जी ले गए :(--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ेंः यूपी का वो मुख्यमंत्री जिसे जामुन के पेड़ से बांधकर पीटा गया थाकहानी उस कत्ल की, जिसने यूपी में माफियाराज स्थापित कर दिया