गुजरात के चर्चित ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर ने कांग्रेस से नाता तोड़ लिया है.उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा को अपना इस्तीफा भेज दिया है. ठाकोरने कहा कि ठाकोर समुदाय के हित की लड़ाई लड़ते रहेंगे. अल्पेश राधनपुर से विधायकहैं. अल्पेश के साथ दो और विधायकों ने भी पार्टी छोड़ दी है. ये विधायक हैंधावलसिंह ठाकोर और भरतजी ठाकोर हैं. अल्पेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस मेंशामिल हुए थे. इससे पहले अल्पेश ठाकोर की ठाकोर सेना ने उनसे कांग्रेस पार्टी सेइस्तीफा देने और 24 घंटे के भीतर अपना रूख स्पष्ट करने को कहा था.क्यों छोड़ दी कांग्रेस? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अल्पेश ठाकोर पाटन लोकसभा सीटसे चुनाव लड़ना चाहते थे. मगर कांग्रेस ने अल्पेश को टिकट न देकर पूर्व सांसद जगदीशठाकोर को टिकट दे दिया. कांग्रेस ने साबरकांठा लोकसभा सीट से ठाकोर सेना के एकसदस्य को टिकट देने की मांग भी नहीं मानी. गुजरात में एक प्रमुख ओबीसी नेता के रूपमें उभरने के बाद अल्पेश 2017 गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल होगए थे. वे पाटन जिले में राधानपुर सीट से चुनाव जीते थे. अल्पेश को कांग्रेस ने ऑलइंडिया कांग्रेस कमेटी का सचिव नियुक्त किया था और बिहार का सह प्रभारी भी बनायाथा.बीजेपी में जाने की हैं अटकलें अल्पेश की कांग्रेस छोड़ने की अटकलें काफी अरसे सेलग रही थीं. चर्चाएं उनके बीजेपी में भी जाने की भी थीं. मगर बाद में उनकी कांग्रेसके नेताओं से बातचीत हो गई थी. इसके बाद ये अटकलें बंद हो गई थीं. कांग्रेस छोड़नेके बाद अब एक बार फिर से ये चर्चा ने जोर पकड़ा है कि अल्पेश की भाजपा में बात होचुकी है. उन्होंने पिछले महीने ही मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और गुजरात भाजपा अध्यक्षजीतूभाई वघाणी से मुलाकात कर कांग्रेस नेतृत्व की नींद उड़ा दी थी. बाद मेंकांग्रेस नेताओं के साथ बैठक के बाद उन्होंने अपना इरादा बदल दिया था. तबअल्पेश ने कहा था, 'एक समय मैं अपने समुदाय की बेहतर सेवा करने के लिए मंत्री पदचाह रहा था, लेकिन अब संघर्ष करने का फैसला कर लिया है. अगर मैं भाजपा में चला जातातो मैं छह महीने पीछे चला जाता.' ठाकोर ने ये भी माना था कि वे प्रदेश कांग्रेस केकुछ नेताओं के काम करने के तौर तरीकों से नाराज थे. लेकिन अब ये बीती बात हो चुकीहै.कौन हैं अल्पेश ठाकोर? अल्पेश को पूरे गुजरात में शराबबंदी के कानून को सख्ती सेलागू कराने की लड़ाई लड़ने के लिए जाना जाता है. उन्होंने ओबीसी समुदाय से ताल्लुकरखने वाले ठाकोर समुदाय को संगठित करके आंदोलन शुरू किया था. अल्पेश ने 'जनता रेडटीम' बनाई और गैरकानूनी देसी शराब बनाने वालों के यहां छापेमारी शुरू कर दी. गुजरात में 22 से 24 फीसदी ठाकोर हैं. अल्पेश खुद युवा हैं और हमेशा ओबीसी समुदायके हक और हुकूक की बात करते रहते हैं. रहने वाले अहमदाबाद के एंडला गांव के हैं, जोहार्दिक पटेल के गांव के पास में ही है. अल्पेश समाजसेवा के साथ ही खेती और रियलएस्टेट का कारोबार करते हैं. 23 अक्टूबर को उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुलगांधी की मौजूदगी में कांग्रेस का दामन थाम लिया था. ये उनकी कांग्रेस में घर वापसीथी. इससे पहले भी अल्पेश 2009 से 2012 तक कांग्रेस में रह चुके थे.अल्पेश (काले घेरे में) कांग्रेस के टिकट पर जिला पंचायत का चुनाव लड़ चुके हैं.अल्पेश का परिवार भी कांग्रेसी रहा हैअल्पेश ठाकोर के पिता खोड़ाजी ठाकोर कांग्रेस के अहमदाबाद के ग्रामीण जिलाध्यक्षरहे हैं. इसके पहले खोड़ाजी शंकर सिंह वाघेला के साथ बीजेपी से जुड़े थे. जब वाघेलाने बीजेपी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया तो खोड़ाजी भी कांग्रेसी हो गए.हालांकि 2017 में ही शंकर सिंह वाघेला ने कांग्रेस भी छोड़ दी, लेकिन खोड़ाजी बनेरहे. उनके बेटे अल्पेश ने 2012 के जिला पंचायत चुनाव में मांडल सीट से बतौरकांग्रेस प्रत्याशी चुनाव लड़ा था. लेकिन वो हार गए थे. हालांकि इसके बाद अल्पेश नेअपना सियासी कद इतना बढ़ा लिया कि पहले बीजेपी और फिर कांग्रेस दोनों ने उनपर डोरेडालने शुरू कर दिए. कांग्रेस को इसमें कामयाबी भी मिली और चुनाव के ठीक पहले अल्पेशकांग्रेस में शामिल हो गए.ओबीसी को किया था एकजुटपंचायत चुनाव हारने के बाद अल्पेश ने कांग्रेस का साथ छोड़ दिया था. गुजरात मेंओबीसी समुदाय में 146 जातियां हैं. अल्पेश ने इन सभी को एकजुट करने का बीड़ा उठायाऔर इसके लिए सामाजिक आंदोलन की ओर चले. राज्य में बिक रही अवैध शराब के खिलाफ मुहिमके लिए उन्होंने गुजरात क्षत्रिय-ठाकोर सेना का गठन किया. इस मुहिम से ही उन्हेंओबीसी का साथ मिला. फरवरी 2017 में अहमदाबाद में ओबीसी की एक रैली में उन्होंनेऐलान किया कि गुजरात का अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से नहीं, हमारा होगा. उनके इससंगठन में 6.5 लाख लोग रजिस्टर्ड हैं.बनाया था एकता मंचजनवरी 2016 में अल्पेश ने एकता मंच बनाया था. इसके तहत उन्होंने ओबीसी, एससी औरएसटी समुदाय के लोगों को अपने साथ जोड़ा है. अल्पेश ने ये मंच पाटीदार आंदोलन केखिलाफ बनाया है. 2016 में मीडिया को दिए बयान में उन्होंने कहा था कि पाटीदारआंदोलन की वजह से और जातियों में डर बैठ गया है कि उनके आरक्षण में किसी तरह कीकटौती की जा सकती है. अल्पेश ने फरवरी 2016 में एकता मंच की रैली में कहा था कि वोन तो चुनाव लड़ेंगे और न ही किसी पार्टी को समर्थन देंगे. अल्पेश ने कहा था कि उनकामकसद है कि गुजरात चुनाव में अच्छे लोग जीतकर विधानसभा पहुंचें. लोग उनको वोट करें,जो गरीबों की चिंता करे और गरीबों के लिए काम करे.किसानों की कर्जमाफी के लिए किया था आंदोलनकिसानों का लोन माफ करने के लिए अल्पेश के नेतृत्व में आंदोलन हुआ, जिसमें किसानोंने सड़क पर दूध बहाया था.6 जुलाई 2017 को मीडिया में तस्वीरें आईं कि गुजरात की सड़क पर किसान दूध बहा रहेहैं. ये किसान कर्जमाफी की मांग कर रहे थे. इस आंदोलन के पीछे भी अल्पेश ठाकोर काही हाथ था. उन्होंने किसानों को संगठित किया और कहा कि वो लोग अपना दूध शहरों तक नभेजें. अल्पेश के समर्थन में किसानों ने दूध सड़क पर बहा दिया. इस पर भी किसानों कीबात नहीं मानी गई, तो अल्पेश ने आमरण अनशन करने की चेतावनी दी. इससे पहले अल्पेश नेगुजरात सरकार से बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की मूर्ति की मांग को लेकर आंदोलन कियाथा. जब बीजेपी ने सरदार सरोवर बांध के पास सरदार वल्लभ भाई पटेल की 182 मीटर ऊंचीमूर्ति लगाने का प्रस्ताव रखा था और उस पर अमल शुरू किया था, तो अल्पेश ने भी मांगरखी. अल्पेश ने कहा था कि वो सरदार पटेल की मूर्ति का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिनजिस बाबा साहब अम्बेडकर ने देश को संविधान दिया है, उनकी भी उतनी ही ऊंची मूर्तिलगनी चाहिए. इसके अलावा अल्पेश ने निजी संस्थानों में भी आरक्षण देने की मांग कीथी.सोशल मीडिया पर सर्वे कर 25 लाख लोगों के समर्थन का दावा23 अक्टूबर, 2017 में राहुल की मौजूदगी में अल्पेश ने कांग्रेस जॉइन कर ली थी.गुजरात क्षत्रिय-ठाकोर सेना और उसके बाद एकता मंच बनाने वाले अल्पेश ठाकुर कीसियासत में एंट्री कैसे हुई. इसका जवाब खुद अल्पेश देते हैं. उन्होंने बताया- मेरेसलाहकारों ने कहा कि मुझे राजनीति में आना चाहिए. इसे परखने के लिए हमने डोर-टू-डोरसर्वे करवाया. इसके नतीजे मेरे पक्ष में थे. लगभग 25 लाख लोगों ने मुझे राजनीति मेंआने और कांग्रेस पार्टी जॉइन करने के लिए कहा. इसके अलावा 1 लाख 40 हजार लोगों नेमुझे बीजेपी जॉइन करने के लिए कहा था. इसका रिजल्ट हमने सोशल मीडिया पर भी शेयरकिया था. अलग-अलग मीडिया समूहों को दिए बयान में अल्पेश ने दावा किया है कि उनकाबनाया हुआ एकता मंच का संगठन गुजरात की 182 सीटों में से 138 पर मजबूत स्थिति मेंहै. इसके अलावा उनकी बनाई हुई गुजरात क्षत्रिय-ठाकोर सेना की पहुंच लगभग 9000गांवों में है. अल्पेश खुद कहते हैं- दोनों को मिलाकर गुजरात में करीब 78 फीसदीवोटों पर हमारे संगठन का प्रभाव है. दोनों संगठनों में तकरीबन 35 से 40 लाख लोगसदस्य हैं.--------------------------------------------------------------------------------वीडियोः BJP के घोषणापत्र और राहुल की तस्वीर इस वजह से ट्रोल हो गई