हिंदी में एक कहावत है चिराग तले अंधेरा. मतलब ये कि दीपक अपने आस-पास तो रोशनी करदेता है, लेकिन उसके ठीक नीचे अंधेरे की भी जगह होती है. ये बात जमुई लोकसभाक्षेत्र पर भी पूरी तरह से लागू है. जमुई से सांसद हैं लोक जन शक्ति पार्टी के नेताचिराग पासवान. उनका एक परिचय ये भी है कि वो केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान केबेटे हैं. उनका दूसरा परिचय ये है कि वो एक ऐक्टर रहे हैं. उनका तीसरा परिचय ये हैकि वो एक बार फिर से जमुई से चुनाव लड़ रहे हैं. लेकिन उनके ही लोकसभा क्षेत्र मेंएक गांव है जहां विकास की रोशनी अब तक नहीं पहुंच पाई है.खैरा मुसहड़ा गांव की एक तस्वीरजमुई से करीब 10 किलोमीटर दूर ब्लॉक है खैरा. ये इतना तो विकसित हो चुका है कि इसेकस्बे का नाम दे दिया जाए, लेकिन इस क्षेत्र में अब भी नक्सल का प्रभाव दिख जाताहै. खैरा ब्लॉक से दाएं तरफ एक सड़क मुड़ती है, जो एक गांव में ले जाती है. गांव कानाम है खैरा मुसहड़ा. दलितों की बस्ती है. सड़क किनारे घर बने हुए हैं. दोपहर मेंलोग काम पर गए हैं और महिलाएं घर पर हैं. और जब बात शुरू होती है, तो ये महिलाएंबताती हैं कि विकास का मतलब क्या है. टूटी हुई झोपड़ी, पानी के लिए दूर लगा एकचापाकल, घर के बाहर पड़ी एक खाट और रसोई में रखे कुछ बर्तन. ये किसी एक आदमी कीनहीं, बल्कि पूरे गांव की मिली-जुली संपत्ति है. गांव की पिट्टी देवी बताती हैं किउनका घर खपरैल का बना है. इंदिरा आवास क्या होता है, उन्हें पता है, लेकिन कुछ लोगहैं जो उनसे कहते हैं कि इस ज़मीन पर घर नहीं बन सकता है.समस्याएं बताती महिलागांव की ही शांति कहती हैं कि सरकारी मुलाजिम कहते हैं कि जिस जगह पर वो लोग रहतीहैं, वो सरकारी ज़मीन है. लिहाजा उन्हें घर नहीं मिल सकता. शांति के पास अपनी कोईज़मीन नहीं है और जिस ज़मीन पर खड़ी होकर वो बात कर रही हैं, उस ज़मीन पर वो पिछले40 साल से रह रही हैं. गांव में सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलिंडर दिएहैं, सौभाग्य योजना के तहत बिजली दे दी है, लेकिन जब बात घर की आती है, तो सरकार केपास इन गरीबों के लिए कोई ज़मीन ही नहीं है.लेकिन गांव की पिट्टी देवी के पास न तो उज्ज्वला का सिलिंडर है और न ही सौभाग्य कीबिजली. वो अब भी लकड़ी पर खाना बनाती हैं और रोशनी के लिए केरोसिन तेल का इस्तेमालकरती हैं. पिट्टी देवी और उनकी तरह की तमाम महिलाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कानाम तो जानती हैं, लेकिन ये नहीं जानतीं कि वो देश के प्रधानमंत्री हैं. उनके जेहनमें मोदी का जो नाम है, वो इस वजह से है कि जब वो जमुई में आए थे, तो तीन ज़हाज सेआए थे और ये महिलाएं उन्हें देखने के लिए गई थीं. गांव की ही सन्मतिया देवी कहतीहैं कि इस गांव की कोई सुनने वाला नहीं है. वोट किसे देंगी के सवाल पर वो कहती हैंकि जो भी उन्हें वृद्धा पेंशन देगा, उसे वो वोट दे देंगी. गांव की एक महिला सौभाग्ययोजना पर भी सवाल उठाती हैं, वो कहती हैं कि जब सरकार को बिजली का बिल लेना था, तोफिर बिजली दी ही क्यों? उनका कहना था कि जब देश में इंदिरा गांधी की सरकार थी, तभीइस गांव में बिजली आ गई थी. इंदिरा सरकार बिजली का बिल नहीं लेती थी, जबकि मोदीसरकार तो बिजली के लिए पैसे मांग रही है.इसी गांव में रहती हैं चिंता देवी. वो कहती हैं कि जब वोट मांगना होता है तो नेताघर-घर घूमते हैं, दादी-चाची कहते हैं और जब जीत जाते हैं तो फिर कभी झांकने भी नहींआते. चिंता देवी की चिंता सिर्फ एक बात की है और वो है पानी. वो कहती हैं कि जो भीउनके लिए एक चापाकल लगा देगा, वो उसे वोट दे देंगी. और सिर्फ अपना ही क्यों घर केऔर भी लोगों के वोट उसी को जाएंगे, जो उनकी पानी की कमी दूर करेगा. चिंता देवी गांवके उन चुनिंदा लोगों में हैं, जिन्हें आवास योजना का लाभ मिला है. आवास बनाने केलिए उन्हें 45,000 रुपए मिले थे, लेकिन इनमें से भी 20,000 रुपए घूस देने पड़े. बचेहुए 25,000 रुपए में ही उन्हें अपना घर बनवाना था. और 25,000 रुपए में तो घर बनतानहीं है. चिंता देवी कहती हैं कि उन्हें पता है कि अगर घर नहीं बनवाया, तो सरकारउन्हें गिरफ्तार कर लेगी. लेकिन चिंता देवी कहती हैं कि उन्हें गिरफ्तारी का डरनहीं है. अगर पुलिस या कोई भी सरकारी कारिंदा उन्हें गिरफ्तार करने आता है, तो वोबताएंगी कि उन्होंने 20,000 रुपये की घूस दी है, इसलिए घर नहीं बन पा रहा है.केरोसिन और राशन की बात पर भी चिंता देवी कहती हैं कि उनका डीलर उनसे पूरे पैसेलेता है, लेकिन तेल भी कम देता है और राशन भी.चिंता देवी और उनके गांव के लोग दलित समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. खुद जमुई लोकसभाएक सुरक्षित लोकसभा क्षेत्र है और चिराग पासवान यहां से सांसद हैं. अपनी ही जाति कासांसद होने पर चिंता देवी कहती हैं कि जाति को तो जाति ही काटती है. लेकिन इन तमामनाकामियों और सरकार की उपेक्षा के बीच चिंता देवी लोकतंत्र को ज़िंदा रखी हुई हैं.वो कहती हैं कि कोई भी जीते-कोई भी हारे, मैं हर हाल में अपना वोट दूंगी. मेरा कामहो, न हो, घर बने न बने, लेकिन मैं वोट ज़रूर दूंगी.--------------------------------------------------------------------------------वीडियो- जमुई के खैरा मुसहड़ा गांव का हाल, जहां घर तो दूर पीने के लिए पानी तकनहीं है