--------------------------------------------------------------------------------लेटर, शायरी और फिर लेटर. पैर छूना और फिर मौके बनाना. अखिलेश को राजनीति में ये सबदेखना पड़ा है. इसी चक्कर में रोये भी हैं. कभी लगता है कि बदला लेने के लिए किसीको पिटवाये भी हैं. पर मन नहीं मानता. मुख्यमंत्री हैं. स्कूली बच्चों जैसी हरकत तोकरेंगे नहीं.-------------------------------------------------------------------------------- सपा की कबड्डी के दौरान बाप, बेटे और चाचा की बातें तो खूब हुईं. पर इस बीच मेंकई और नाम भी उछलते रहे. कोई तो इतना उछल गया कि उनको पार्टी से बाहर कर दिया गया.इसमें सबसे ताजा नाम मंत्री पवन पांडे का है. इनको एमएलसी आशु मलिक को पीटने काआरोप है. ये आशु मलिक वही हैं जिनका नाम लिया था अखिलेश ने और तभी शिवपाल ने उनसेमाइक छीन लिया था. फिर एक नाम था उदयवीर सिंह. जिन्होंने बाकायदा लेटर लिखकर अपनीनाराजगी जताई. मुलायम की दूसरी बीवी को भी दोषी ठहरा दिया. इस बात पर मुलायम भीदुखी हो गये थे. इन सबके अलावा एक और नाम था. गायत्री प्रजापति. जिनको फुटबॉल बनादिया गया था. समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है. अखिलेश ने निकाल दिया.मुलायम वापस ले के आये. गायत्री ने बाप-बेटे दोनों के पैर छुए. फिर सिर पर तलवारमंडराने लगी.कौन हैं ये लोग और कैसे ये सपा के ड्रामे में अपना योगदान कर रहे हैं:1. पवन पांडेफैजाबाद जिले के अयोध्या के हैं पवन. 35 साल के हैं. सरस्वती शिशु मंदिर से शुरुआतीपढ़ाई हुई है. फिर लखनऊ यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएशन कियाहै. इसी दौरान पवन राजनीति से भी जुड़ गये. 1998 में समाजवादी पार्टी से जुड़ गये.2004 में लखनऊ यूनिवर्सिटी छात्र संघ के उपाध्यक्ष भी रहे. उसके बाद सपा केस्टूडेंट यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष बन गये. बाद में जब अखिलेश यादव ने अपनी टीमबनानी शुरू की तो छात्र नेताओं को मौका दिया. इसमें पवन भी थे. 2012 विधानसभा चुनावमें अखिलेश ने बड़े-बड़े लोगों को छोड़कर पवन को टिकट दे दिया. अयोध्या से.पवन पांडे1992 में बाबरी मस्जिद गिरने के बाद से इस सीट पर भाजपा के लल्लू सिंह ही जीत रहेथे. पर पवन ने 2012 में उनको हरा दिया. आज-कल के फैशन के मुताबिक पवन को भी फैजाबादजिले में विकास पुरुष के नाम से जाना जाता है. 2013 में पवन को राज्य मनोरंजनमंत्री बनाया गया. पर 2014 लोकसभा चुनाव में सपा के खराब प्रदर्शन के बाद पवन नेमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया. पर बाद में पवन फिर मंत्री बन गये. पर अभी यादवखानदान में चल रही कबड्डी के बाद पवन को पार्टी से 6 साल के लिए बर्खास्त कर दियागया. वजह बड़ी अजीब थी. आरोप था एमएलसी आशु मलिक को पीटने का. आशु के मुताबिकअखिलेश ने आशु का नाम लिया था एक अखबार के आर्टिकल के बारे में. जिसमें लिखा था किअखिलेश औरंगजेब और मुलायम शाहजहां हैं. तो इसी बात की सफाई देने आशु अखिलेश के घरगये थे. वहां अचानक से पवन और उनके समर्थक बाहर आ गये. और आशु को पीटने लगे. बादमें अखिलेश बाहर आये और उनको बचाया. आशु के मुताबिक अगर अखिलेश ना आते तो ये लोगउनको जान से मार दिए होते.2. आशु मलिकउदयवीर सिंह की चिट्ठी के बाद आशु मलिक की चिट्ठी आई. कहा कि:उदय की चिट्ठी के बाद मैं सो नहीं पाया हूं. मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि अपनीजिंदगी में ये दिन देखने को मिलेगा. कुछ लोग इतना होश खो देंगे कि देश के सबसे बड़ेराजनैतिक परिवार को कुछ भी कह देंगे. लोगों को पता ही नहीं कि माननीय नेताजी औरमाननीय मुख्यमंत्री जी एक-दूसरे को कितना प्यार करते हैं. नेताजी का अपमान बर्दाश्तनहीं किया जाएगा.हम समंदर हैं हमें खामोश रहने दो, जरा मचल गये तो शहर ले डूबेंगे.पार्टी के लोगों से अपील है कि सपा विरोधियों के बहकावे में ना आएं. जिस पेड़ कीछांव में बैठे हैं, हमें उसकी कदर करनी है. उस पेड़ का नाम नेताजी है.जुल्मी जब-जब जुल्म करेगा सियासत के गलियारों सेजर्रा-जर्रा गूंज उठेगा मुलायम सिंह के नारों सेआशु मलिकसपा में आशु मुस्लिम चेहरा हैं. नये हैं, इसलिए आजम खान को भी खटकते हैं. क्योंकिअपने मन से आजम तो मुस्लिमों के एकमात्र नेता हैं. आशु वेस्ट यूपी में सपा के बड़ेनेता के तौर पर आगे आ रहे हैं. 2014 में उन्हें एमएलसी बनाकर लाया गया था बड़े मंचपर. जब अखिलेश के समर्थकों ने चिट्ठी लिख सबको परेशान कर दिया था, तब जवाबीकार्रवाई आशु ही कर रहे थे शिवपाल की तरफ से.आशु ने अपना राजनीतिक प्रभाव बनाने के लिए कोई मौका छोड़ा नहीं है. हाशिमपुरा कांडके पीड़ितों को लेकर लोग कंफ्यूज थे. आजम खान धरना देने का प्रस्ताव कर रहे थे. परआशु एक हाथ बढ़कर पीड़ितों को मुख्यमंत्री के पास ले गये और 5 लाख का मुआवजादिलाया. दादरी बीफ कांड में अखलाक के परिवार को लखनऊ ले जाने वाले आशु ही थे. आजमखान इस बात से इतना चिढ़ गये थे कि गाजियाबाद में हज हाउस के उद्घाटन के बाद आशु केखिलाफ पैंतरा बनाना भी शुरू कर दिये थे.फिर अमर सिंह के वापस आने के बाद आशु उनके साथ भी हो लिए. जब उदयवीर और रामगोपाल नेअखिलेश के पक्ष में कार्यकर्ताओं को चिट्ठी लिखी तो आशु ने ही जवाब देना शुरू किया.इसी चक्कर में आशु को पिलना भी पड़ा. हुआ ये कि जिस दिन मुलायम की उपस्थिति मेंअखिलेश और शिवपाल बोल रहे थे और बात जब खत्म होने वाली थी तभी मंच से मुलायम ने एकचिट्ठी का जिक्र किया. इस बात पर अखिलेश भड़क गए. और औरंगजेब वाली बात आ गई. अखिलेशने कहा कि अमर सिंह सारी साजिश कर रहे हैं और आशु मलिक को सब पता है. आशु मंच परपहुंच गए सफाई देने. और बाद में अखिलेश के घर पिट गए. इसीलिए कहते हैं कि किसी केपरिवार के मामले में बड़ा सोच-संभलकर बोलना चाहिए.3. उदयवीर सिंहमुझे बर्खास्त होने का दुख नहीं है. दुख इस बात का है कि नेताजी तक सही बात पहुंचनहीं रही है. मैं मुख्यमंत्री के साथ हूं और हमेशा रहूंगा. ये उदयवीर वही हैं,जिन्होंने मुलायम को चिट्ठी लिख दुखी कर दिया था कि साधना अखिलेश के खिलाफ रचना रचरही हैं. काला जादू कर रही हैं. उदयवीर को छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दियागया है.उदयवीर अखिलेश के बचपन के दोस्त हैं. उनको अखिलेश का बेहद करीबी माना जाता है.4. गायत्री प्रजापतिसपा के ये नेता 2002 तक बीपीएल कार्ड होल्डर थे. अब लोकायुक्त के स्कैनर में हैं.करोड़ों की संपत्ति रखने का आरोप लगा है. माइनिंग में घोटाले का आरोप है. इसी चीजको आधार बनाकर अखिलेश यादव ने गायत्री को बर्खास्त कर दिया था. पर मुलायम के कहनेपर वापस ले लिया. फिर उसी वक्त गायत्री ने मुलायम और अखिलेश दोनों के पैर छुए.2011 में समाजवादी पार्टी के एक सम्मेलन में रामगोपाल यादव ने ऐलान किया कि अमेठीके गायत्री प्रजापति ने पार्टी को 25 लाख रुपये डोनेट किये हैं. उसके बाद गायत्रीने मुलायम के पैर छुए थे. उस वक्त गायत्री को लबरझड़पू समझा जाता था. पर ये आदमी1993 से ही चुनाव लड़ रहा है. इनके ही खिलाफ अमिताभ ठाकुर ने केस फाइल किया था. कुछलोग कहते हैं कि ये झूठ बोलते रहते हैं. ये पहले से ही बहुत धनी हैं.गायत्री प्रजापति--------------------------------------------------------------------------------कुछ तो था ही गायत्री में तभी 2012 में सपा ने अमिता सिंह की सीट अमेठी से गायत्रीको लड़वाया. यहां से गायत्री 1993, 1996 और 2002 में हार चुके थे. इस बार गायत्रीने अमिता सिंह को हरा दिया. 2012 में गायत्री ने एक पीआर एजेंसी भी हायर की थी. एकफाइव स्टार होटल में बुलाया गया सबको. गायत्री का निर्देश था कि रिपोर्टरों सेज्यादा फोटोग्राफरों को बुलाया जाए. ना जाने कहां से ढेर सारे फोटो खींचने वालेपहुंच गए थे. पीआर एजेंसी तो मुलायम की पार्टी के किसी नेता ने कभी हायर ही नहीं कीथी.-------------------------------------------------------------------------------- इस आदमी का कद इतना बढ़ा कि जब-जब अखिलेश ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया,गायत्री एक नए मंत्री के रूप में शपथ ले रहे थे. सिंचाई विभाग से लेकर माइनिंग तकसबमें गायत्री आ गए. बहुत कम लोगों से मिलने वाले रामगोपाल ने कभी भी गायत्री कोमना नहीं किया मिलने से. मुलायम ने उनको एक हेलिकॉप्टर भी दिया था लोकसभा चुनावोंमें. पार्टी बुरी तरह हारी लेकिन गायत्री स्टार कैंपेनर रहे.आर्ट्स ग्रेजुएट हैं गायत्री. हलफनामे में प्रॉपर्टी खरीदने-बेचने को अपना व्यवसायबताया था. पर मंत्री बनने के चार साल के अंदर गायत्री के नाम पर 13 कंपनियां खड़ीहैं. एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है गायत्री के पास. इन कंपनियों मेंगायत्री के बेटे, भाई, भतीजा सब डायरेक्टर हैं. ड्राइवर भी एक कंपनी रखे हुए है. एककंपनी के मालिक इनके बेटे अनुराग पर एक नाबालिग से रेप का भी आरोप है. दुबारामंत्री बनने के बाद गायत्री ने कहा- मुलायम भगवान शंकर, अखिलेश गणेश और मैं नंदीहूं.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ लीजिए:वो पॉलिटिक्स कौन सी थी, जिसका मुलायम भुट्टा भूनकर खा गएसपा की कलह में ‘छोटी बहू’ के पापा का क्या रोल है?शिवपाल सिंह यादव की पूरी कहानीमुलायम ने गले मिलवाया, लेकिन फिर झगड़ पड़े अखिलेश-शिवपालमुलायम के सामने शिवपाल ने अखिलेश को झपिलाया, आज निकाली सारी भड़ासनेताजी आपकी पार्टी है, पर मेरा भी तो करियर है: रोते हुए बोले अखिलेश यादवसपा का नया ड्रामा रिलीज़, चाचा शिवपाल समेत तीन मंत्री कैबिनेट से बाहर