“सच बोलो या इस्तीफा दो”, महुआ मोइत्रा ने LPG संकट और एपस्टीन विवाद पर हरदीप सिंह पुरी को घेरा
महुआ मोइत्रा ने लल्लनटॉप के दिए गए खास इंटरव्यू में एपस्टीन विवाद से लेकर हरदीप सिंह पुरी पर फोन कॉल के आरोप, बीजेपी आईटी सेल की रणनीति, और एलपीजी संकट तक कई मुद्दों पर सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि ट्वीट हटाने का दबाव बनाया गया, फर्जी नैरेटिव फैलाए गए और अब जनता गैस संकट से जूझ रही है. उनका साफ संदेश है- जवाब दो या इस्तीफा दो.

“एपस्टीन की फाइलों में आपका नाम 430 बार है. ये हाल तब है जबकि जारी किए गए 30 लाख ईमेल में से सिर्फ 62 ही डॉक्यूमेंटेड हैं. सोचा जा सकता है कि मामला कितना गंभीर हैै. आप कहते हैं कि आप उनसे नहीं मिले, लेकिन 14 मुलाकातों के दस्तावेजी प्रमाण हैं.”
राजनीति में कुछ इंटरव्यू ऐसे होते हैं जो सिर्फ बयान नहीं होते, बल्कि पूरा नैरेटिव बदलने की कोशिश करते हैं. ‘लल्लनटॉप’ के शो ‘जमघट’ में जब महुआ मोइत्रा आईं तो कुछ-कुछ ऐसा ही अहसास हुआ. एक ऐसा इंटरव्यू जिसमें एक तरफ इंटरनेशनल स्कैंडल का जिक्र है, तो दूसरी तरफ देश की घरेलू समस्याएं.
यहां कहानी कई लेयर में खुलती है-एपस्टीन विवाद, फोन कॉल का दावा, बीजेपी आईटी सेल पर आरोप और फिर अचानक एलपीजी संकट तक पहुंचती बहस.
एपस्टीन कनेक्शन: ट्वीट से तूफानमहुआ मोइत्रा ने हरदीप सिंह पुरी पर कुख्यात एपस्टीन फाइल्स से जुड़े होने के इल्जाम लगाएं तो ये मामला खूब सुर्खियों में रहा. अब महुआ ने ‘लल्लनटॉप’ को इस पूरे विवाद की इनसाइड स्टोरी भी बताई. जिसमें किसी बॉलीवुड फिल्म की तरह कई एंगल मौजूद थे.
महुआ कहती हैं कि वो देश-दुनिया को लेकर जागरुक हैं. लिहाजा संसार में कहीं भी कुछ गलत होता है तो वो उसका विरोध करती हैं. बकौल महुआ,
"जब भी दुनिया भर में कुछ घटित होता है, मैं उसका विरोध करती हूं. और इस मुद्दे को उठाना हमारा कर्तव्य है."
यहां वो खुद को एक ग्लोबल इश्यू उठाने वाली नेता के रूप में पेश करती हैं. महुआ का मानना है कि इसी वजह से उन्होंने एपस्टीन फाइल्स से हरदीप सिंह पुरी के कथित तौरपर जुड़े होने वाला वो ट्विट किया. लेकिन मामला यहीं नहीं रुकता.
महुआ सीधे- सीधे हरदीप सिंह पुरी का नाम एपस्टीन फाइलों से जोड़ते हुए आरोप लगाती हैं कि दोनों के बीच 14 मुलाकातों के दस्तावेजी सबूत मौजूद हैं. वो कहती हैं.
"इनमें से 99.9% मुलाकातें उनके घर पर, केवल दो साल की अवधि में हुईं. दो महीने की अवधि में 6 मुलाकातें हुईं. जिनमें वह उनसे बातचीत कर रहे थे और पूछ रहे थे कि आपका द्वीप कैसा था. मुझे लोगों को चुनने का आपका तरीका पसंद है."
महुआ कहती है कि पुरी और एपस्टीन के बीच की इस कथित बातचीत में कई बार “क्या मैं आ सकता हूं? क्या हम कॉफी पर मिल सकते हैं?” जैसी बातें होती हैं.
महुआ का मानना है कि यह निश्चित रूप से एक अलग ही स्तर का मामला है. इसलिए उन्हें कुछ जवाब चाहिए. इसी वजह से उन्होंने वो चर्चित ट्विट किया था. जिसमें छिपाने जैसा कुछ नहीं था.
फोन कॉल का दावा: कहानी में ट्विस्टलल्लनटॉप को दिए गए महुआ मोइत्रा के इंटरव्यू का सबसे दिलचस्प हिस्सा भी यही है. महुआ मोइत्रा आरोप लगाती हैं कि उनके ट्विट के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने खुद उन्हें कॉल किया था. महुआ दावा करती हैं,
इसीलिए मैंने ट्वीट किया था. उसने कहा, तुम्हें वह शब्द बदलकर डिलीट कर देना चाहिए. मैंने कहा, मैं न तो डिलीट कर सकती हूं और न ही शब्द बदल सकती हूं.
महुआ यहीं पर नहीं रुकीं बल्कि पुरी पर और भी सख्त आरोपों की झड़ी लगा दी. महुआ आगे कहती हैं,
"उन्होंने कहा, मेरे लोग तुम्हारे पीछे पड़ने वाले हैं और मैं तुम्हारी मदद नहीं कर पाऊंगा."
महुआ का यह आरोप सीधा-सीधा राजनीतिक दबाव और डराने की कोशिश की तरफ इशारा करता है. हालांकि, इस तरह के दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी होती है. लेकिन राजनीतिक बहस में यह एक बड़ा नैरेटिव बन जाता है.
आईटी सेल और ‘फर्जी चैट’ का खेलमहुआ का अगला आरोप बीजपी के डिजिटल वॉरफेयर पर है. बकौल महुआ, उन्हें समझते देर नहीं लगी कि ‘आईटी सेल’ के लोग उनके पीछे पड़ने वाले हैं. वो कहती हैं,
"मुझे पता था कि बीजेपी की एक तय रणनीति है... उसी रात मैंने ट्वीट किया कि वे मेरे पीछे पड़ने वाले हैं."
महुआ दावा करती हैं कि 24 घंटे के भीतर फर्जी कंटेंट फैलाया गया और मामला अदालत तक जा पहुंचा. यहां वो उन घटनाओं का जिक्र भी करती हैं, जहां जांच और फॉरेंसिक की बात सामने आई.
“2 प्लस 2 = 4” वाला तर्कमहुआ अपने आरोप को लॉजिक से जोड़ते हुए कहती हैं,
"जब कोई कहता है कि लोग तुम्हारे पीछे पड़ेंगे और दो दिन बाद ऐसा होता है, तो यह 2 प्लस 2= 4 है."
यह एक क्लासिक पॉलिटिकल स्टाइल है. डायरेक्ट एविडेंस नहीं, लेकिन घटनाओं की कड़ी जोड़कर नैरेटिव बनाना.
इस्तीफा दो या हटाओ: सीधा संदेश‘लल्लनटॉप’ के शो ‘जमघट’ का सबसे क्लासिक मोड़ यहीं पर आता है. हरदीप सिंह पुरी पर सनसनीखेज इल्जाम लगाने के बाद जवाबदेही का मुद्दा उठाते हुए महुआ कहती हैं,
"सबसे पहले तो उसे इस्तीफा देना चाहिए... अगर वो इस्तीफा नहीं देते, तो उन्हें बर्खास्त कर दिया जाए."
महुआ यहां एक तरफ तो पुरी के इस्तीफे की मांग करती हैं, वहीं दूसरी तरफ ये भी कहती हैं कि वो हरदीप सिंह पुरी को बर्खास्त नहीं करवाना चाहतीं. मगर अगली ही लाइन में टीएमसी सांसद बड़ी सफाई से पीएम मोदी को भी मामले में घसीटते हुए कहती हैं.
“अगर वो (पुरी) इस्तीफा नहीं देते, तो मंत्रिमंडल का मुखिया कौन है? सिर्फ नरेंद्र मोदी जी. अगर वो इस्तीफा नहीं देते, तो पीएम को एक्शन लेना चाहिए. अगर ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल में कोई भी इस्तीफा नहीं देता, तो आखिरकार हम दीदी से अपील करेंगे कि आप मुख्यमंत्री हैं, इन्हें बर्खास्त कर दीजिए. यही होता है.”
महुआ यहां इंटरनेशनल उदाहरण भी देती हैं. दूसरे देशों में नेताओं के इस्तीफे का जिक्र करके दबाव बनाती हैं. महुआ यहां मनमोहन सिंह मंत्रिमंडल में रेल मंत्री रहे पवन बंसल का उदाहरण भी देती हैं. और हरदीप सिंह पुरी से जांच में सहयोग करने की अपील करती हैं.
LPG संकट: जमीन पर असली गुस्साइंटरव्यू का सबसे दिलचस्प मोड़ उस वक्त आता है, जब इंटरनेशनल स्कैंडल से बात सीधे रसोई गैस पर आ जाती है. देश में मौजूदा LPG संकट का ज़िक्र करते हुए महुआ इस मामले पर हरदीप सिंह पुरी पर आरोपों की झड़ी लगा देती हैं.
महुआ कहती हैं,
"क्या वे एलपीजी की समस्या का समाधान कर रहे हैं? 13 दिन पहले, वे आए और झूठ बोला कि हमारे पास 75 दिनों के लिए पर्याप्त एलपीजी है. अब वे कह रहे हैं कि आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू हो गया है और 25 दिनों से आपूर्ति नहीं है."
और फिर महुआ एक सीधा सवाल दागती हैं,
"क्या वे इसे ठीक कर रहे हैं? मुझे बताइए."
यहां वो आम आदमी के मुद्दे को जोड़ती हैं. महुआ गैस की लाइन में खड़े लोग, सिलेंडर की किल्लत, और बढ़ती कीमतों का ज़िक्र करके केंद्र सरकार पर शब्दों के तीर छोड़ती हैं.
इंटरनेशनल पॉलिटिक्स का तड़कामहुआ सिर्फ घरेलू मुद्दों तक नहीं रुकतीं. वो इसे ईरान-रूस जैसे मुद्दों को भी जोड़ती हैं. साथ ही भारत की विदेश नीति तक जा पहुंचती हैं. महुआ कहती हैं,
“हम गुटनिरपेक्ष आंदोलन का हिस्सा थे. हमारा ईरान से कोई टकराव नहीं था. मगर आप (मोदी) ईरान से दुश्मनी मोल ले रहे हैं. आप इजरायल जाते हैं, मेडल लेते हैं और वापस आ जाते हैं. अगले दो दिनों में ईरान पर अटैक होता है. ईरान अब कह रहा है कि तेल 200 डॉलर प्रति बैरल तक जाएगा.”
महुआ का आरोप है कि विदेश नीति और ऊर्जा नीति के फैसलों का असर सीधे आम आदमी पर पड़ रहा है.
मीडिया पर हमलामहुआ ने अपने आरोपों के घेरे में मीडिया को भी ले लिया. महुआ बोलीं,
“समस्या ये है कि उन्होंने पूरा मीडिया खरीद लिया है. जब वे पूरा मीडिया खरीद लेते हैं, तो उनका पक्ष मजबूत हो जाता है और विरोधियों का कमजोर. वे चाहे झूठ को काला-सफेद बना दें.”
महुआ की ये वाली बात भारतीय राजनीति में अक्सर सुनाई देती है. लेकिन यहां इसे LPG और जनता की परेशानी से जोड़कर पेश किया गया है. महुआ का कहना है कि जो लोग गैस सिलेंडर लेकर कतार में खड़े हैं, जो लोग भाग-दौड़ कर रहे हैं, वे झूठ नहीं बोलते.
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कई मुद्दे, एक नैरेटिवइस पूरे इंटरव्यू हिस्से को अगर जोड़कर देखें, तो महुआ मोइत्रा तीन बड़े मैसेज देती दिखती हैं,
- सत्ता पर सवाल उठाओ-चाहे इंटरनेशनल मुद्दा हो या घरेलू
- जवाबदेही जरूरी है-इस्तीफा या कार्रवाई
- असली मुद्दा जनता है-LPG, महंगाई, रोजमर्रा की परेशानी
और सबसे अहम-राजनीति की लड़ाई सिर्फ संसद में नहीं, सोशल मीडिया, कोर्ट और इंटरव्यू-हर जगह लड़ी जा रही है.
वीडियो: जमघट: महुआ मोइत्रा ने एप्सटीन कांड, ईरान-अमेरिका जंग पर क्या कहा?

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