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असम में झटके पर झटके खा रही कांग्रेस को संभालेंगे 'दो गोगोई', गौरव ने अखिल को मना लिया

लंबे समय तक सियासी बैठकों का दौर. कभी ना कभी हां. फिर गठबंधन से इनकार करने के बाद अखिल गोगोई आखिरकार असम में कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ने को तैयार हो गए हैं. कांग्रेस के गौरव गोगोई ने काफी मान-मनौव्वल के बाद उनको गठबंधन के लिए राजी कर लिया है.

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20 मार्च 2026 (अपडेटेड: 20 मार्च 2026, 10:54 PM IST)
Gaurav gogoi akhil gogoi assam congress raijor party
गौरव गोगोई (बाएं) और अखिल गोगोई (दाएं) असम चुनाव के लिए एक साथ आ गए हैं. (तस्वीरें- पीटीआई और इंडिया टुडे)

विधानसभा चुनाव से पहले असम की राजनीतिक फ़िज़ा तेजी से करवट ले रही है. कई सीनियर नेताओं के पार्टी छोड़ने से बैकफुट पर गई कांग्रेस के लिए अच्छी खबर आई है. काफी मान-मनौव्वल के बाद राज्य के दो गोगोई अब एक हो गए हैं. कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने क्षेत्रीय पार्टी रायजोर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई को गठबंधन के लिए राजी कर लिया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 19 मार्च की रात गौरव गोगोई और अखिल गोगोई ने एक मंच से गठबंधन का ऐलान किया. दोनों नेताओं ने मंच पर एक दूसरे को असम का ट्रेडिशनल गमछा देकर एक साथ आने का संदेश दिया. इस दौरान अखिल गोगोई ने कहा, 

आज रायजोर दल और कांग्रेस के बीच एक सहमति बन गई है. अब हमारी पार्टी गौरव गोगोई को असम का मुख्यमंत्री बनाने के लिए काम करेगी.

दिन में 'ना', फिर रात में बनी बात

19 मार्च को दिन में 11 बजे डिब्रूगढ़ के टी काउंटी होटल में अखिल और गौरव गोगोई मिले. दोनों के बीच की बैठक दोपहर बाद तक चली. पांच घंटे तक चले इस बैठक से निकलने के बाद अखिल मायूस नजर आए. उन्होंने पत्रकारों से कहा,

आज की बैठक बेनतीजा रही. कांग्रेस ने मीडिया के जरिए रायजोर दल को 13 सीट देने की बात फैलाई थी. लेकिन बैठक में पता चला कि इन 13 सीटों को भी कांग्रेस हाईकमान की मंजूरी नहीं मिली है. सीटों की लिस्ट खुद गौरव गोगोई ने तैयार की थी.

अखिल गोगोई के इस बयान के बाद कयास लगाए जाने लगा कि अब गठबंधन का चैप्टर ओवर हो गया है. लेकिन देर रात फिर दोनों गोगोई साथ आए और गठबंधन का ऐलान हो गया. दोनों नेताओं के बीच हुई समझौते के तहत रायजोर दल को 13 सीटें मिली हैं. इनमें से दो सीटों (गौरीपुर और गोलपाड़ा ईस्ट) पर कांग्रेस के साथ फ्रेंडली फाइट होगी. रायजोर दल के हिस्से आई सीटों में ढिंग भी शामिल है. यही वो सीट है जिस पर बात नहीं बन पाने के चलते दोनों दलों की बातचीत टूट गई थी.  

मार्घेरिटा सीट भी रायजोर दल के खाते में गई है. इस सीट से कांग्रेस उम्मीदवार प्रतीक बोरदोलोई ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी. वे अपने पिता प्रद्युत बोरदोलोई के साथ बीजेपी में चले गए. अखिल गोगोई अभी शिवसागर सीट से विधायक हैं. ये सीट भी बंटवारे में उनके खाते ही आई है, जहां से वो फिर से अपनी उम्मीदवारी पेश करेंगे.

रायजोर दल और कांग्रेस के बीच महीनों से बातचीत का दौर चल रहा था. पहले दोनों दलों क बीच की बातचीत डिरेल भी हो चुकी थी. रायजोर दल ने शुरुआत में 27 सीट मांगी थी. फिर इसे घटाकर 15 किया और आखिरकार 13 सीटों पर तैयार हुई. कांग्रेस ने 19 मार्च को उम्मीदवारों की तीसरी सूची जारी की. 

राज्य में कुल 126 विधानसभा सीटें हैं. पार्टी अब तक 101 सीटों पर प्रत्याशी उतार चुकी है. बाकी सीटें उसने अपने गठबंधन सहयोगियों के लिए छोड़ दी हैं. इनमें असम जातीय परिषद 10 सीट, ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस 2 सीट, CPI(M)1 सीट, CPI(ML)L 1 सीट और रायजोर दल 13 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. दो सीटों पर कांग्रेस के साथ उनकी फ्रेंडली फाइट होगी. 

दूसरी तरफ एनडीए गठबंधन में बीजेपी 89 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. जबकि असम गण परिषद 26 सीट और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट 11 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है. एनडीए का पूर्व सहयोगी यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल भी इस बार अकेले चुनावी मैदान में है. पार्टी ने अब तक 18 उम्मीदवारों का नाम घोषित कर चुका है.

गठबंधन से ऊपरी असम में कांग्रेस को बढ़त

अखिल गोगोई के रायजोर दल की ऊपरी असम (Upper Assam) के इलाके में मजबूत पकड़ मानी जाती है. नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) विरोधी आंदोलन के दौरान अखिल गोगोई को इन इलाकों में काफी समर्थन मिला था. अखिल गोगोई के साथ आने से ऊपरी असम की 46 सीटों पर कांग्रेस को मजबूती मिलने की उम्मीद है.

अखिल गोगोई आरटीआई कार्यकर्ता रहे हैं. वो अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान इंडिया अगेन्स्ट करप्शन से भी जुड़े रहे हैं. 2 अक्टूबर 2020 को उन्होंने अपने राजनीतिक दल रायजोर पार्टी की नींव रखी. साल 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने शिवसागर विधानसभा से जीत दर्ज की. इस दौरान वो CAA विरोधी प्रोटेस्ट के चलते जेल में थे. असम के इतिहास में वो जेल से चुनाव जीतने वाले पहले विधायक हैं. 

वीडियो: राजधानी: असम में हिमंता बिस्वा सरमा ने क्या दांव चल दिया?

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