पिछले साल की बात है. तारीख थी 22 जून. स्वामी प्रसाद मौर्य ने BSP छोड़ दी. वोआदमी, जो मायावती के ऑफिस में फोन उठा-उठाकर अरबपति बना था. मौर्य ने आरोप लगाया किमाया टिकट बेचती हैं और इसी वजह से वो पार्टी छोड़ रहे हैं. माया ने बड़ा आदर्शवादीजवाब दिया. कहा, 'BSP कांशीराम की पार्टी है और वो परिवारवाद के सख्त खिलाफ थे. इसीआदर्श पर चलते हुए मैंने स्वामी के बच्चों को टिकट नहीं दिया, जिसकी वजह से वोपार्टी छोड़ गया. अच्छा ही हुआ. वो पुराना दल-बदलू है.' कुछ ऐसा ही बृजेश सिंह केसाथ भी हुआ था.अब फास्ट फॉरवर्ड करके आते हैं 2017 में. विधानसभा चुनाव के लिए माया अपने प्यादेचुन चुकी हैं. चार किस्तों में BSP के 401 कैंडिडेट घोषित हो चुके हैं और दो होनेअभी बाकी हैं. इन चारों लिस्ट्स का पोस्टमॉर्टम करने पर इंडियन एक्सप्रेस ने पायाकि सिर्फ छह महीने में ही मायावती अपनी बात से पलट गईं. उनके बांटे टिकट्स मेंईमानदारी की धूप कम, परिवारवाद की छाया ज्यादा दिखाई पड़ती है.आइए आपको बताते हैं कि किन घरों में मायावती की नेमतें बरसी हैं...--------------------------------------------------------------------------------1. मुजफ्फरनगर की बुढ़ाना सीट से माया ने सैयदा बेगम को उतारा है. सैयदा पूर्वसांसद कादिर राणा की पत्नी हैं. ये सैयदा का पहला चुनाव है. हालांकि, इससे पहलेउन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में नामांकन कराया था, लेकिन बाद में नाम वापस लेलिया था. राणा के भाई नूर सलीम मुजफ्फरनगर की ही एक और सीट चरथावल से बीएसपी केविधायक हैं और इस बार यहीं से दोबारा लड़ने जा रहे हैं.2. मुजफ्फरनगर की कठौली सीट से बीएसपी ने शिवन सिंह सैनी को उतारा है. ये उनका पहलाचुनाव है. शिवन पूर्व राज्यसभा सांसद राजपाल सिंह सैनी के बेटे हैं. राजपाल 2002में बीएसपी से विधायक बने थे और उनका राज्यसभा कार्यकाल 2015 में खत्म हुआ था.हाजी याकूब3. मायावती की पिछली सरकार में उनके मंत्री हाजी मोहम्मद याकूब. विवादित रहे थे. इसबार वो मेरठ साउथ सीट से कैंडिडेट हैं और उनके बेटे मोहम्मद इमरान को मेरठ की हीसरधाना सीट से टिकट मिला है. ये इमरान का पहला चुनाव है. याकूब 2014 के लोकसभाचुनाव में मुरादाबाद से लड़े थे, लेकिन हार गए थे.4. बीएसपी की पिछली सरकार में मंत्री रामवीर उपाध्याय इस बार हाथरस की सादाबाद सीटसे पांचवी बार चुनाव लड़ने जा रहे हैं. वो इस सीट के मौजूदा विधायक हैं. बीएसपी नेउनके भाई मुकुल को बुलंदशहर की शिखरपुर सीट से उतारा है. मुकुल ने 2014 मेंगाजियाबाद से लोकसभा चुनाव लड़ा था. वो हार गए थे.5. बिजनौर की रिजर्व सीट नेहतौर से मायावती ने विवेक सिंह पर भरोसा जताया है, जोअपना पहला चुनाव लड़ेंगे. विवेक के पिता वीर सिंह राज्यसभा सांसद हैं. नेहतौर केपिछले विधायक ओम कुमार थे, जो 2012 में बीएसपी के ही टिकट पर जीते थे. 2015 मेंउन्होंने बीजेपी जॉइन कर ली थी. पश्चिमी यूपी में वीर सिंह को बड़ा दलित नेता मानाजाता है.वीर सिंह6. संभल की रिजर्व सीट चंदौसी से बीएसपी ने विरमावती को टिकट दिया है. विरमावतीपूर्व विधायक गिरीश चंद्र जाटव की पत्नी हैं. जाटव ने 2007 में विधानसभा चुनाव जीताथा, लेकिन 2012 में हार गए थे. 2014 में वो बुलंदशहर से लोकसभा चुनाव में भी उतरे,लेकिन फिर हार गए. पार्टी ने अभी उन्हें मुरादाबाद और संभल का कॉर्डिनेटर बना रखाहै.7. बदायूं की बिल्सी सीट से बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़ने जा रहे मुसर्रत अली 2012का चुनाव भी जीते थे. वो इस सीट से विधायक हैं. इस बार पार्टी ने उनके भाई अरशद अलीको भी टिकट दिया है, जो बगल की ही सीट सहसावन से चुनाव लड़ेंगे.8. बरेली के मीरगंज से मौजूदा विधायक सुल्तान बेग भी अपनी सीट पर फिर से लड़ेंगे.मायावती ने उनके भाई सुलेमान बेग को भी बरेली की ही भोजीपुरा सीट से मैदान मेंउतारा है.9. मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बार फंस चुके मोहम्मद इकबाल को पार्टी सहारनपुर केबेहट से चुनाव लड़ाने जा रही है. सुप्रीम कोर्ट ने इनके खिलाफ जांच के आदेश भी दिएथे. इकबाल MLC रह चुके हैं और उनके भाई महमूद अली भी बीएसपी से जुड़े हैं और MLCहैं.विनय शंकर तिवारी10. गोरखपुर के बाहुबली नेता हरि शंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी को बीएसपीने गोरखपुर की चिल्लूपुर सीट से उतारा है. ये सीट 2012 में बीएसपी के टिकट पर हीराजेश त्रिपाठी ने जीती थी, लेकिन पिछले साल में वो बीजेपी में शामिल हो गए. विनयके भाई भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी खलीलाबाद से सांसद रहे हैं, लेकिन 2014 लोकसभाचुनाव में वो बीजेपी से हार गए थे.विनय का पॉलिटिकल रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है. 2007 के लोकसभा उपचुनाव में उन्होंनेबलिया से दावेदारी पेश की थी, लेकिन सपा के नीरज शेखर से हार गए थे. 2009 का लोकसभाचुनाव उन्होंने योगी आदित्यनाथ के खिलाफ लड़ा, जिसमें भी वो हारे. 2012 के विधानसभाचुनाव में बीएसपी ने उन्हें सिद्धार्थनगर की बांसी सीट से उतारा, लेकिन वो ये चुनावभी हार गए. विनय के मामा गणेश शंकर पांडे को महाराजगंज की पनियारा सीट से बीएसपी काटिकट मिला है.11. मायावती ने अंबेडकर नगर के पूर्व सांसद राकेश पांडे के बेटे रीतेश पांडे कोजलालपुर से एक बार फिर टिकट दिया है. रीतेश 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा के शेरबहादुर से हारे थे. राकेश पांडे ने 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन बीजेपी केहाथों हार गए थे.--------------------------------------------------------------------------------हाथी की इस चाल को देखकर पार्टी का सीनियर काडर परेशान और हताश है. कांशीराम केवक्त उसने किसी और तरह की राजनीति देखी थी, लेकिन अब उसे किसी और राजनीति का गवाहबनना पड़ रहा है. उनकी आंखों में ये यकीन साफ है कि पार्टी अपने आदर्शों औरउद्देश्यों से भटक गई है.परिवारवाद की वजह से दो बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने को वरदान बताने वाली मायावतीअब खुलकर उसी राह पर हैं. उनकी ये चाल उन्हें कहां ले जाएगी, ये तो वक्त बताएगा,लेकिन 2017 का विधानसभा चुनाव उनके भविष्य का दरवाजा है. एक राष्ट्रीय पार्टी 'करोया मरो' के मुकाबले में है.--------------------------------------------------------------------------------https://www.youtube.com/watch?v=xPugbbPSKlc--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:कौन हैं मायावती के भाई आनंद कुमार, जिन्होंने 49 कंपनियां खोलींबहनजी के भाईजी ने कमाया 18000 परसेंट का मुनाफा!आज से 37 साल पहले मायावती पर की गई थी पहली भद्दी टिप्पणीजब 21 साल की मायावती ने मंच पर जाकर केंद्रीय मंत्री की धज्जियां उड़ा दी थीं