The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Election
  • 5 Unforgettable Moments from Assam Election Rallies: From Himanta's Bihu Dance to Rahul's Gamusa Magic

हिमंता का डांस, राहुल का गमछा और भैंसे का कोहराम, भुलाए ना भूलेंगी असम चुनावों की ये 4 कहानियां

Assam Elections 2026: असम चुनाव की रैलियों के 5 ऐसे मजेदार वाकये जो हमेशा याद रहेंगे. हेमंत बिस्वा सरमा के डांस से लेकर प्रियंका गांधी की चाय बागान वाली मेहनत तक, देखिए पूरी कहानी.

Advertisement
pic
5 मई 2026 (पब्लिश्ड: 04:18 PM IST)
Assam Elections 2026
असम चुनाव की वो 5 वायरल कहानियां
Quick AI Highlights
Click here to view more

असम विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए. बीजेपी को शानदार जीत भी मिल गई. लेकिन नतीजों की नहीं बल्कि आज हम बात करेंगे असम की उन यादों की जो राजनीति के शोर-शराबे के बीच हमारे चेहरों पर मुस्कान छोड़ गईं. चुनाव आते हैं और जाते हैं, जीत-हार के आंकड़े फाइलों में दब जाते हैं, लेकिन जो रह जाता है वो हैं इंसानी जज्बात और कुछ ऐसे पल जिन्हें देखकर दिल बोल उठता है कि भाई, राजनीति इतनी भी बोरिंग नहीं होती.

असम की धरती जितनी खूबसूरत है, वहां की राजनीति उतनी ही रंगीन है. ब्रह्मपुत्र की लहरों के किनारे जब रैलियों का रेला निकलता है, तो सिर्फ नारे नहीं लगते, वहां संस्कृति और सतरंगी यादें भी साथ चलती हैं. इस बार के चुनाव में भी कुछ ऐसा ही हुआ. सोशल मीडिया के दौर में रैलियों के गंभीर भाषण तो कम वायरल हुए, लेकिन वो मजेदार वाकये घर-घर पहुंच गए जिन्होंने नेताओं को एक आम इंसान के रूप में दिखाया.

आज हम इन्हीं 5 किस्सों का ऐसा पोस्टमार्टम करेंगे कि आपको लगेगा कि आप खुद गुवाहाटी के किसी चाय बागान में खड़े होकर ये सब देख रहे हैं.

1. हेमंत बिस्वा सरमा का बीहू और वो वायरल रील

असम की राजनीति की बात हो और मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा का जिक्र न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता. हेमंत सिर्फ राजनीति के खिलाड़ी नहीं हैं, वो जानते हैं कि जनता की नब्ज कैसे पकड़ी जाती है. एक चुनावी रैली के दौरान जब ढोल और पेपा की आवाज गूंजी, तो मुख्यमंत्री खुद को रोक नहीं पाए. उन्होंने मंच पर ही बीहू डांस शुरू कर दिया. उनके स्टेप्स इतने सधे हुए थे कि वहां मौजूद भीड़ झूम उठी.

ये सिर्फ एक डांस नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी ब्रांडिंग थी. असमिया अस्मिता और संस्कृति को भुनाने में हेमंत को महारत हासिल है. ये वीडियो जैसे ही इंस्टाग्राम पर आया, रील की बाढ़ आ गई. युवाओं ने इसे खूब शेयर किया. इसका असर ये हुआ कि जो युवा राजनीति से दूर भागते हैं, वो भी इस कनेक्ट की वजह से उनसे जुड़ गए. राजनीति में जब नेता जनता की भाषा में नाचता और गाता है, तो वो सिर्फ वोट नहीं मांगता, वो एक रिश्ता बनाता है.

himanta
हिमंता बिस्वा सरमा का डांस (फोटो- ANI)

2. प्रियंका गांधी का चाय बागान में 'टी-प्लकर्स' के साथ मुकाबला

प्रियंका गांधी जब असम पहुंचीं, तो उन्होंने एक अलग ही अंदाज अपनाया. वो सीधे चाय बागानों में पहुंच गईं. सिर पर टोकरी बांधी और महिला मजदूरों के साथ चाय की पत्तियां तोड़ने लगीं. ये तस्वीर देखते ही देखते पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई. प्रियंका ने वहां सिर्फ पत्तियां नहीं तोड़ीं, बल्कि उन महिलाओं के संघर्ष को करीब से समझा.

सर्द सुबह में जब वो चाय की झाड़ियों के बीच खड़ी थीं, तो वहां की महिलाओं ने उन्हें अपनी परंपराएं सिखाईं. ये वाकया इसलिए खास है क्योंकि असम की अर्थव्यवस्था में चाय बागानों का बहुत बड़ा रोल है. यहां के मजदूर चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. प्रियंका का ये कदम एक तरफ तो जज्बाती था, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती भी था. ये दिखाता है कि दिल्ली की राजनीति अब बंद कमरों से निकलकर खेतों और बागानों तक पहुंच चुकी है.
 

priyanka
चाय बागान में प्रियंका गांधी वाड्रा (फोटो- ANI)

3. निर्दलीय उम्मीदवार की 'भैंसा सवारी'

असम के चुनाव में इस बार एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने सबको हैरान कर दिया. एक निर्दलीय उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल करने के लिए लग्जरी कार छोड़कर भैंसे पर सवार होकर पहुंच गया. इसे देखकर लोग अपनी हंसी नहीं रोक पाए, लेकिन इसके पीछे का संदेश गहरा था. उम्मीदवार का कहना था कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि आम आदमी के लिए अब जानवर ही सहारा हैं.

ये नजारा सोशल मीडिया पर टॉप ट्रेंड बन गया. लोग कहने लगे कि भाई, असली देसी स्वैग तो इसे ही कहते हैं. चुनाव में जब बड़े-बड़े काफिले और करोड़ों की गाड़ियां चलती हैं, तब एक भैंसे की सवारी ने सबका ध्यान खींच लिया. ये वाकया लोकतंत्र की उस खूबसूरती को दिखाता है जहां एक आम आदमी अपने विरोध को दर्ज कराने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है. इसने ये भी साबित किया कि चर्चा में आने के लिए करोड़ों रुपये नहीं, बस एक अलग सोच की जरूरत होती है.
 

Assam
असम में उम्मीदवार की भैंसा सवारी (फोटो- इंडिया टुडे)

4. राहुल गांधी का 'जादुई' असमिया गमछा

राहुल गांधी जब असम दौरे पर थे, तो उनके गले में हमेशा असमिया 'गमोसा' यानी गमछा दिखाई देता था. एक रैली के दौरान उन्होंने इस गमछे को लेकर एक इमोशनल बात कही. उन्होंने कहा कि ये सिर्फ कपड़ा नहीं है, ये असम की शान और गरिमा का प्रतीक है. उन्होंने इस गमछे को एक ढाल की तरह पेश किया जो असम की संस्कृति को बाहरी हमलों से बचाता है.

इस वाकये ने असम के लोगों के दिल को छू लिया. गमछा असमिया पहचान का सबसे बड़ा हिस्सा है. राहुल ने इसे जिस तरह से पहना और इसकी अहमियत बताई, उसने उन्हें वहां के लोगों के बीच 'अपना' बना दिया. विरोधियों ने इसे चुनावी स्टंट कहा, लेकिन आम जनता के लिए ये एक सम्मान की बात थी. राजनीति में प्रतीकों का बड़ा महत्व होता है और राहुल का ये जादुई गमछा इस चुनाव की सबसे यादगार छवियों में से एक बन गया.
 

Rahul
राहुल गांधी का असमिया गमछा (फोटो- ANI)

असम चुनाव का समाजशास्त्र और मनोविज्ञान

इन वाकयों को अगर हम सिर्फ मनोरंजन के चश्मे से देखेंगे, तो शायद बड़ी तस्वीर मिस कर देंगे. भारत में चुनाव सिर्फ सरकार चुनने का जरिया नहीं हैं, ये एक उत्सव हैं. असम जैसे राज्य में जहां जातीय पहचान और संस्कृति बहुत संवेदनशील विषय हैं, वहां इन मजेदार वाकयों का बड़ा राजनीतिक असर होता है.

जब कोई नेता नाचता है या चाय की पत्तियां तोड़ता है, तो वो जनता को ये संदेश देता है कि मैं आप जैसा ही हूं. मनोवैज्ञानिक तौर पर इसे 'मिररिंग' कहते हैं. यानी जनता को अपने जैसा व्यवहार करते हुए नेता में अपनी छवि दिखती है. इससे एक विश्वास पैदा होता है. मिडिल क्लास और आम आदमी को ये देखकर खुशी होती है कि जो सत्ता के शिखर पर बैठे हैं, वो भी जमीन की धूल फांक सकते हैं.

वहीं, सांड का घुसना या भैंसे की सवारी जैसे वाकये सिस्टम की खामियों और महंगाई जैसे मुद्दों को हंसी-हंसी में सबके सामने रख देते हैं. ये 'पॉलिटिकल सटायर' का एक जिंदा उदाहरण हैं. आने वाले समय में ये छोटी-छोटी बातें ही बड़े वोट बैंक को शिफ्ट करने की ताकत रखेंगी.

ये भी पढ़ें- घरेलू सहायिका से लेकर RG Kar पीड़िता की मां तक: वो 5 महिलाएं जिन्होंने बदल दी बंगाल के सत्ता की कहानी

क्या बदला और क्या बदलेगा

असम के इन 5 वाकयों ने ये साबित कर दिया कि राजनीति अब केवल मेनिफेस्टो और वादों तक सीमित नहीं है. अब ये 'पर्सनालिटी कल्ट' और 'डायरेक्ट कनेक्ट' का जमाना है. आने वाले चुनावों में हम देखेंगे कि नेता और भी ज्यादा ऐसे तरीके अपनाएंगे जिससे वो जनता के साथ सीधे जुड़ सकें.

डिजिटल इंडिया के इस दौर में हर छोटी घटना का रिकॉर्ड रहता है. ये 5 यादें असम के इतिहास में दर्ज हो गई हैं. चाहे वो हेमंत का डांस हो या राहुल का गमछा, ये सब मिलकर एक ऐसी कहानी बुनते हैं जो असम की विविधता को सलाम करती है. अंत में, चुनाव कोई भी जीते, जीत हमेशा उस लोकतंत्र की होती है जो हंसते-खेलते अपनी राय रखता है.
 

वीडियो: असम विधानसभा चुनाव का रिजल्ट देख CM हिमंता बिस्वा सरमा ने क्या प्रतिक्रिया दी?

Advertisement

Advertisement

()