''हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छूटा करते...''मुलायम और अखिलेश के दिल की दूरी भले बढ़ी हो, लेकिन घर की दूरी नहीं बढ़ी है. अखिलेशकी बेटियां अदिति (15) और टीना (10) अपने दादा मुलायम से मिलने उनके घर आ-जा रहीहैं. अब उन्हें क्या खबर कि बाप-बेटे के बीच क्या चल रहा है. उनके लिए तो मुलायमअब भी वैसे ही हैं, जैसे पहले थे. अखिलेश को भी इससे कोई तकलीफ नहीं है.यादव परिवार में भसड़ मची है. पापा, बेटा, चाचा... न जाने किसके बीच क्या-क्या चलरहा है. लेकिन, इस भसड़ में एक चीज मौजूं है. घर का बड़ा-बुजुर्ग घरवालों से चाहेजितना नाराज़ चल रहा हो, अपने नाती-पोतों से बातचीत करना बंद नहीं करता. बच्चे भीउनसे लिपटे रहते हैं. ऐसे में ऊपर लिखी ग़ज़ल की ये लाइन यूं ही याद आ जाती है.ज्यादा दिन नहीं हुए, जब मुलायम ने टीना से मजाक में कहा था,''तुम्हारे पापा बहुतजिद्दी हैं.'' टीना ने ये बात अखिलेश को बताई, तो अखिलेश हंसते हुए बेटी से बोले,''हां, वो तो मैं हूं.'' वैसे मुलायम का पुत्र-प्रेम जब-तब झलक ही जाता है. अब पिताहैं. कर भी क्या सकते हैं. अभी पिछले दिनों ही उन्होंने कहा था, 'अखिलेश हमारा लड़काहै. क्या करें, उसे गोली थोड़ी ही ना मार देंगे.' वैसे ऐसा नहीं कि बाप-बेटे के बीचसिर्फ तल्खियां ही हैं. रिश्ते को नर्म करने की कोशिश दोनों तरफ से हो रही हैं.NDTV के मुताबिक जब पिछले हफ्ते मुलायम इलेक्शन कमीशन के पास गए थे, तो उनके लखनऊवापस लौटते समय अखिलेश ने मन बनाया कि वो एयरपोर्ट पर उन्हें रिसीव करने जाएं.पत्नी डिंपल और बेटियां भी साथ जाने वाली थीं, लेकिन मुलायम के साथ अमर सिंह भी थे.जैसे ही अखिलेश को पता चला, उन्होंने पापा से मिलने का प्लान बदल दिया. मुलायमलगातार ऐसा जताने की कोशिश कर रहे हैं कि बाप-बेटे के बीच ज्यादा तनाव नहीं है,लेकिन उनका बस नहीं चल रहा है, इसलिए अंदर के झगड़े बाहर आ रहे हैं. संडे को मुलायमने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि वो राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और अखिलेश उत्तर प्रदेश केमुख्यमंत्री हैं. लेकिन, कलह बरकरार है और बाप-बेटे के गुट अब भी बंटे हुए हैं. बापके साथ शिवपाल और पार्टी के 'बाहरी' अमर सिंह साथ खड़े हैं, तो अखिलेश के साथरामगोपाल हैं. सोमवार को मुलायम साइकिल चुनाव निशान पर दावा ठोंकने इलेक्शन कमीशनपहुंचे थे. इससे पहले रामगोपाल ने डेढ़ लाख पन्नों का एक हलफनामा चुनाव आयोग में जमाकरवाया, जिसमें ज्यादातर विधायकों के सिग्नेचर थे. उन्होंने कहा कि भले ही साइकिलचुनाव निशान न रहे, अखिलेश अपने आप में यूपी में एक चेहरा है. हम चुनाव में जाएंगे.https://www.youtube.com/watch?v=AJCmImuMRM8 सपा में साइकिल पर दावे की बातें चलरही हैं. फिलहाल बाप-बेटे के गुट में कौन इसकी सवारी करेगा, ये तय नहीं है और सबसेबड़ी बात, अगर 17 जनवरी तक ये तय नहीं हुआ, तो चुनाव-आयोग ये चुनाव निशान फ्रीज करदेगा. फिर न साइकिल की गद्दी हाथ आएगी, न उसका हैंडल. हालांकि, चुनाव चिन्ह केमामले में रामगोपाल ने दूरदर्शिता दिखाते हुए इलेक्शन कमीशन से कहा है कि अगरसाइकिल फ्रीज होता है, तो वो मोटरसाइकिल लेना पसंद करेंगे. तमाम उठापटक के बीच दादामुलायम की आगे की पीढ़ियों को ये नहीं बताया गया है कि दादा और पापा आपस में लड़ रहेहैं. दूरियां बहुत आगे तक नहीं पहुंची हैं. ये अच्छी बात है.--------------------------------------------------------------------------------ये स्टोरी निशांत ने की है.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें- तो अखिलेश का चुनाव चिह्न बदल दिया रामगोपाल ने महीनों पहले मुलायम कोहटाने की भूमिका बना ली थी प्रो. रामगोपाल यादव ने