जिस गठबंधन को जिताऊ गठबंधन माना जा रहा था, वो बनने से पहले ही खतरे में पड़ गयाहै. शुक्रवार को अखिलेश यादव ने यूपी की 191 सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए.इनमें नौ सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस अपने कैंडिडेट्स उतारना चाहती है और पांचसीटें तो ऐसी हैं, जहां मौजूदा विधायक ही कांग्रेस का है.--------------------------------------------------------------------------------कांग्रेस में हड़कंप मचा हुआ है. सारे बड़े नेता दिल्ली में मीटिंग पर मीटिंग किएजा रहे हैं. उत्तर प्रदेश में किसे उतारें और कहां उतारें... समझ नहीं आ रहा है.सपा के साथ गठबंधन के मुद्दे पर एक हफ्ते से बयान देने वाले गुलाम नबी आजाद कहींदिख नहीं रहे हैं. कांग्रेस के किसी नेता का कोई बयान नहीं आ रहा है.अखिलेश की लिस्ट में 20.42% SC और 26.1% मुस्लिमों को जगह मिली है. उन्होंने अपनेकुछ मुस्लिम विधायकों का टिकट काटा भी है. ये लिस्ट पहले, दूसरे और तीसरे चरण केलिए है, जहां 209 सीटों पर चुनाव होना है. पार्टी ने 18 सीटों पर नाम घोषित नहींकिए हैं.कांग्रेस की इन पांच सीटों पर सपा ने उतारे कैंडिडेटमथुरा, खुर्जा, हापुर, शामली और बिलासपुर. ये वो पांच विधानसभाएं हैं, जहां अभीकांग्रेस का विधायक है, लेकिन सपा ने अपने मोहरे खड़े कर दिए हैं. मथुरा के विधायकहैं प्रदीप माथुर, जो यूपी में कांग्रेस विधायक दल के नेता हैं. यहां से अखिलेश नेअशोक अग्रवाल को टिकट दिया है. बुलंदशहर की खुर्जा की सीट पर मौजूदा विधायककांग्रेस के बंशी सिंह पहाड़ियां हैं, लेकिन अखिलेश ने यहां से नंदकिशोर बाल्मीकिको टिकट दिया है.हापुर से 2012 का चुनाव कांग्रेस के गजराज सिंह ने जीता था, लेकिन अखिलेश ने यहांतेजपाल पर भरोसा जताया है. मुजफ्फरनगर की शामली सीट से पिछला चुनाव कांग्रेस केपंकज कुमार मलिक ने जीता था, लेकिन सपा ने यहां से मनीष चौहान को उतार दिया है.बिलासपुर सीट है मुरादाबाद की, जहां कांग्रेस के संजय कपूर विधायक हैं, लेकिनअखिलेश ने यहां से बीना भारद्वाज को उतार दिया है.https://www.youtube.com/watch?v=-SNYbzFvWdQस्याना और स्वार बनीं नाक का सवालबुलंदशहर की स्याना और रामपुर की स्वार सीट भी सपा-कांग्रेस के बीच नाक का सवाल बनीहुई है. असल में स्याना के विधायक दिलनवाज खान ने पिछला चुनाव जीता तो कांग्रेस केटिकट पर था, लेकिन हाल ही में वो कांग्रेस छोड़कर बीएसपी में शामिल हो चुके हैं.कांग्रेस ये सीट सपा के लिए छोड़ने को राजी थी, लेकिन वो इसके बदले किसी और सीट कीडिमांड कर रही है. सपा ने यहां से राजकुमार लोधी को टिकट दिया है.आजम और उनके बेटे अब्दुल्लारामपुर की स्वार सीट पर दावा है सपा के सीनियर लीडर आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजमका, जो वहां से मौजूदा कांग्रेसी विधायक नवाब नवेद मियां के खिलाफ जीतना चाहते हैं.नवाब खानदान के खिलाफ लड़ने और जीतने की आजम की पुरानी राजनीति है. आजम की जिद परकांग्रेस ये सीट भी छोड़ने को तैयार हो गई, लेकिन इसके बदले वो मुरादाबाद की चमरौआकी सीट मांग रही है. यहां के मौजूदा विधायक बीएसपी के अली यूसुफ अली हैं. इस बारअखिलेश ने इस सीट पर नसीर अहमद को टिकट दे दिया है, जो पिछले चुनाव में दूसरे नंबरपर रहे थे और कांग्रेस तीसरे नंबर पर थी.देवबंद को भी बना दिया पेचीदासहारनपुर की एक विधानसभा सीट देवबंद पर अजब पॉलिटिक्स चल रही है. 2012 में यहां सेराजेंद्र सिंह राणा ने सपा के टिकट पर चुनाव जीता था. 2016 में जब उपचुनाव हुआ, तोकांग्रेस के माविया अली जीत गए. उन्होंने सपा कैंडिडेट मीना देवी को हराया था. अबवो सपा में शामिल हो गए हैं और सपा ने उन्हें देवबंद से टिकट भी दे दिया है.इसके अलावा सपा ने नोएडा और गाजियाबाद की सभी सीटों पर अपने कैंडिडेट उतार दिए हैं,जबकि कांग्रेस यहां की शहरी सीटों की डिमांड कर रही थी. मेरठ में भी यही हुआ.कांग्रेस यहां की शहरी सीटों पर नजरें जमाए बैठी थी, लेकिन सपा ने यहां से अपनेउम्मीदवारों की घोषणा कर दी है.https://www.youtube.com/watch?v=dOCnCXf0Q4wक्या कह रही है समाजवादी पार्टीसपा की लिस्ट आने के बाद जब कांग्रेस में अफरा-तफरी मची, तो सपा नेता किरणमय नंदामाहौल संभालने आगे आए. उन्होंने कहा, '54 सीटों पर कांग्रेस का पूरा अधिकार है. येवो सीटें हैं, जिन पर कांग्रेस पिछले चुनाव में या तो जीती थी या दूसरे नंबर पर रहीथी. इन 54 सीटों के अलावा सपा, कांग्रेस को 30 से 35 सीटें और देने को राजी है. सपाका फाइनल ऑफर 84 से 89 सीटों का है. हां, गायत्री प्रजापति और लखनऊ कैंट की सीट सपाके पास रहनी चाहिए. कांग्रेस ने सिटिंग MLA वाली किसी भी सीट पर क्लेम नहीं कियाथा, इसलिए सपा ने अपने कैंडिडेट घोषित कर दिए.'सपा के इस दांव से यूपी में गठबंधन खतरे में पड़ गया है. ये एक ऐसा दांव है, जिसकासबसे बड़ा नुकसान खुद सपा को ही हो सकतता है. अगर गठबंधन नहीं बनता है, तो बीएसपीऔर बीजेपी, दोनों फायदे में ही रहेंगी और उनके सत्ता में आने के संभावना बढ़ जाएगी.--------------------------------------------------------------------------------ये भी देखें:इन तीनों सीटों की वजह से फंसा है सपा-कांग्रेस का गठबंधनविधायकी भौकाल नाक पर, आचार संहिता ताक पर!1993 में यूपी ने बनाया था ऐसा चुनावी रिकॉर्ड, जो न कभी टूटा है, न कभी टूटेगा!इस तरकीब से मुलायम ने बीजेपी को दी थी ऐसी पटखनी कि वो कभी उबर नहीं पाई