समाजवादी पार्टी में पारिवारिक फूट के बाद चुनाव प्रचार का पहला वीडियो. अखिलेशयादव की तरफ से! ये विज्ञापन है. चुनाव में वोट हींचने के लिए. लेकिन सपा नहीं, येअखिलेश का विज्ञापन है. ताजा बवाल के बाद इस वीडियो के जरिये उन्होंने बता दिया हैकि वो अब क्या करेंगे.पहले वीडियो देखें:https://www.youtube.com/watch?v=NaZcnjneeVI&feature=youtu.be पहला निष्कर्ष यहीहै कि,अब खेल इमोशंस का हैहालिया बवाल से अखिलेश के पक्ष में जो सहानुभूति बनी है, उसमें और इजाफा करकेअखिलेश चुनाव में जाएंगे. वह अब एक स्वतंत्र यूनिट की तरह काम कर रहे हैं और'पुरानी सपा' से अलग अपनी ब्रांडिंग कर रहे हैं. उन्होंने साफ संदेश दिया है किचुनाव तक अगर वह सपा के साथ रहे, तो पार्टी उनकी अगुवाई में ही चुनाव लड़ेगी. टिकटमैं बांटूंगा, वो पहले ही कह चुके हैं. वीडियो की शुरुआत में स्क्रीन पर लिखा आताहै, 'मैं हर दिन अपने प्रदेश के बेहतर से बेहतर भविष्य के लिए खुद से एक वादा करताहूं.' फिर अखिलेश के घर के शॉट्स हैं, जहां वो पत्नी डिंपल और बच्चों के साथ खानाखा रहे हैं.--------------------------------------------------------------------------------एक समय वो भी था, जब 'नेताजी' मुलायम सिंह यादव की तस्वीर के बिना सपा में तहसीललेवल के पर्चे भी नहीं छपते थे. अब इतना खर्चा-वर्चा करवा के वीडियो बनवाया गया है,पर इसमें न मुलायम हैं, न शिवपाल. सिर्फ अखिलेश के व्यक्तित्व के इर्द-गिर्द बुनीगई भावनात्मक भव्यता है.--------------------------------------------------------------------------------इस वीडियो में आपने क्या देखा?पूरा वीडियो स्लो मोशन में है. जिसमें तिरंगे झंडे वाली CM की गाड़ी है, उनकीएंट्री के 'नायकत्व' फील वाले शॉट्स हैं. संबोधन के बीच में लोगों की तालियां हैं.कैमरा उनके हस्ताक्षर करते हाथ पर ठहरता है. उनकी चाल को फॉलो करता है. उनकीभंगिमाओं को करीब से दर्ज करता है. वे बुजुर्गों को चेक बांट रहे हैं. नौजवानों सेहाथ मिला रहे हैं. प्रशंसा पा रहे हैं. एक युवक दौड़कर आता है और उनके पैर छू लेताहै. फिर अचानक अखिलेश का पारिवारिक पक्ष दिखता है. एक ऐसा मुख्यमंत्री जिसे उसकेबेटा-बेटी क्रिकेट खेलने बुला लेते हैं और वो काम से जरा सी फुरसत लेकर चला जाताहै. अखिलेश अपने बेटे को गेंद फेंकते हैं और उसका शॉट देखकर बच्चों की तरहखिलखिलाते हैं.--------------------------------------------------------------------------------भारतीय राजनीति में इस तरह के विज्ञापन आप रोज नहीं देखते. जहां नेता अपनेपत्नी-बच्चों को साथ लेकर एक चुनावी कैंपेन बनवाए. भारत में नेता अगर अपने परिवारका त्याग कर दे तो इसे बहुत सारे लोग गुण ही मानते हैं. बहुत सारे नेताओं कीलोकप्रियता में उनके अविवाहित होने के तथ्य ने भी इजाफा किया है. जो नेता बहुतपारिवारिक हैं भी, वे अपने परिवार को सार्वजनिक जीवन से अलग ही रखते हैं. लेकिनअखिलेश अपने परिवार को साथ लाकर एक नई इमोशनल अपील पैदा कर रहे हैं. वह बताना चाहतेहैं कि हालिया टूट-फूट से कोई ये निष्कर्ष न निकाले कि लड़का पारिवारिक सेटअप कोतोड़ चुका है. वह अपने लिए वह पवित्र किस्म का सम्मान चाहते हैं, जो 'अपनेजैसे' घरेलू लोगों के लिए हमने आरक्षित कर रखा है. --------------------------------------------------------------------------------इसीलिए वीडियो के आखिर में वो अपने परिवार के साथ कैमरे की ओर 'हीरोइक' अंदाज़ मेंबढ़ते नजर आते हैं. स्क्रीन पर लिखा आता है, 'उत्तर प्रदेश मेरा परिवार है.' लैपटॉपवितरण योजना, समाजवादी पेंशन योजना, लोहिया आवास योजना और कन्या विद्या धन जैसीयोजनाओं का जिक्र इसके बाद आता है और सेकेंडों में चला जाता है. -------------------------------------------------------------------------------- अब तक सपा में सिर्फ 'नेताजी' के पांव ही छुए जाते थे. लेकिन अब अखिलेश 'नौजवानोंके बड़े भैया' के तौर पर उभरना चाहते हैं, जो कंप्यूटर और अंग्रेजी को साथ लेकरचलेगा. जो परिवार को साथ लेकर चलेगा. वीडियो में कोई वॉइस ओवर नहीं है. आप सिर्फतस्वीरें देखिए.--------------------------------------------------------------------------------इससे पहले अखिलेश यादव का 'काम बोलता है' कैंपेन का पहला वीडियो रिलीज किया गया.अखिलेश ने अपने पेज पर यह वीडियो डाला. यहां आप सपा के फहराते झंडे पर मुलायम कोदेख सकते हैं, लेकिन फोकस अखिलेश और उनके काम पर ही है. लखनऊ के तेजतर्रार नौजवानपक्षियों ने बताया कि इस वीडियो के पीछे अखिलेश के चहेते अफसर जीएस नवीन कुमारहैं. [facebook_embedded_posthref="https://www.facebook.com/yadavakhilesh/videos/1238381882851319"] अखिलेशजानते हैं कि सपा जिस तरह के प्रशासनके लिए कुख्यात रही है, अखिलेश उससे अलग छविरख पाए हैं. हालिया फूट के बाद खुलकर सामने आ गया है कि सपा में ताकत के कितनेध्रुव थे और इससे ये संदेश गया है कि 'गुंडई' के लिए 'दूसरे लोग' ही जिम्मेदारहोंगे. क्योंकि अखिलेश तो मुख्तार अंसारी को भी नहीं आने दे रहे थे. वो सिर्फ अपनेकाम और अपनी इमोशनल अपील के साथ चुनाव में उतरेंगे. [total-poll id=40862]https://www.youtube.com/watch?v=-SNYbzFvWdQ