बहुत जल्दी में दिख रहे हैं 'टीपू भइया', कहीं लिभड़ न जाएं
जल्दी-जल्दी में रोड का उद्घाटन कर दिया, अब मेट्रो का करने जा रहे हैं.

सीन 1: भारत में एक शासक हुआ है टीपू सुल्तान. नाम तो बहुत है टीपू का, लेकिन जब आप उनके बारे में पढ़ेंगे, तो पाएंगे कि जनाब बड़ी जल्दबाजी में रहते थे. उनके पिता की ख्वाहिश हमेशा अपने राज्य को बढ़ाने की रही, लेकिन टीपू की चाहत सब कुछ जल्द से जल्द अपने नियंत्रण में करने की थी. परिणाम, पिता के गुजरने के बाद टीपू लंबे समय तक शासन का सुख नहीं उठा पाए.
सीन 2: उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव. प्यार से नाम दिया गया टीपू. काबिल तो बहुत हैं, लेकिन अति-उत्साह के मामले में टीपू सुल्तान से कहीं कम नहीं. यूज के लिए पूरी तरह तैयार किए बिना ही उन्होंने पिछले सप्ताह लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण कर दिया और अब 1 दिसंबर को वक्त से पहले लखनऊ मेट्रो का उद्घाटन करने जा रहे हैं. वजह, यूपी विधानसभा चुनाव. इस चुनाव के लिए उन्हें अभी तक तो जनता का पर्याप्त समर्थन मिलता दिख रहा है, लेकिन आधे-अधूरे प्रॉजेक्ट्स का ऐसे ताबड़तोड़ उद्घाटन नुकसान भी पहुंचा सकता है.
हुआ क्या है

इस हफ्ते सोमवार की देर रात को लखनऊ मेट्रो का गुपचुप ट्रायल किया गया. लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (LMRC) की टीम ने देर रात मेट्रो कोचों को डिपो से निकालकर सिंगार नगर मेट्रो स्टेशन तक गुपचुप तरीके से चलाया. ये प्री-ट्रायल था, जो आलमबाग डिपो से ट्रांसपोर्ट नगर के बीच हुआ. दूरी रही लगभग 5-6 किलोमीटर. इस मौके पर लखनऊ मेट्रो के बड़े अफसर और टेक्निकल टीम मौजूद रही.
ट्रायल में क्या निकला

मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला कि सोमवार देर रात हुए प्री-ट्रायल के दौरान ओवर हेड इलेक्ट्रिक वायर में खराबी आने की वजह से ट्रेन ट्रांसपोर्ट नगर मेट्रो स्टेशन पर खड़ी रही. ट्रेन को डिपो से सिंगार नगर मेट्रो स्टेशन पहुंचने में ही ढाई घंटे लग गए. प्री-ट्रायल पांच घंटे तक चला, जिसके बाद मंगलवार सुबह चार बजे ट्रेन को वापस डिपो में खड़ा कर दिया गया. ट्रायल के बाद LMRC के मुखिया ने दावा किया कि मेट्रो ट्रायल के लिए पूरी तरह तैयार है.
1 दिसंबर को क्या होगा

1 दिसंबर को अखिलेश यादव मेट्रो को हरी झंडी दिखाएंगे. कयास लगाए जा रहे हैं कि ये ट्रायल चार कोचों की ट्रेन को करीब छह किमी के छह स्टेशनों से गुजारा जाएगा. इस दौरान ट्रेन की स्पीड बहुत धीमी रखी जाएगी. ट्रेन डिपो से रैंप होते हुए ट्रांसपोर्ट नगर, कृष्णा नगर, सिंगार नगर, आलमबाग, आलमबाग बस स्टैंड और मवइया तक ले जाने का प्लान बनाया गया है. शुरुआत में स्पीड पांच से दस किमी प्रति घंटे की रहेगी, तो हर रोज धीरे-धीरे बढ़ाई जाएगी.
1 दिसंबर के बाद क्या होगा

2016 में ही अपना ड्रीम प्रॉजेक्ट लॉन्च करने का पूरा मन बना चुके अखिलेश असल में अपना अधूरा प्रॉजेक्ट लॉन्च करेंगे. अभी तक काम पूरा नहीं हुआ है. कई स्टेशनों का काम बाकी है, तो लोगों के लिए मेट्रो चलाने के बजाय काम पूरा किया जाएगा. इस प्रॉसेस में कम से कम छह महीने का वक्त लगेगा. दिल्ली में मेट्रो चलाने वाले इंडिया के मेट्रो-मैन ई. श्रीधरन पहले ही कह चुके हैं कि अक्टूबर, 2017 से पहले लखनऊ में मेट्रो नहीं चल पाएगी.
क्या-क्या काम बचे हैं

अभी तक सिर्फ तीन स्टेशन: ट्रांसपोर्टर, कृष्णानगर और सिंगार नगर का ही काम पूरा हुआ है. यहां भी लिफ्ट, इलेक्ट्रिफिकेशन और वेंडिंग मशीन का काम चल ही रहा है. ये रेड लाइन के स्टेशन हैं और इस लाइन पर अभी दुर्गापुरी और चारबाग स्टेशन का काम अधूरा है. लखनऊ में सड़क के ऊपर एक किमी की मेट्रो बनाने पर 15 करोड़ रुपए का खर्चा आ रहा है, जबकि जमीन के नीचे बनने वाली एक किमी मेट्रो पर 27 लाख का खर्चा आ रहा है.
कर क्या रहे हैं अखिलेश

2017 में यूपी में चुनाव होने हैं. फरवरी में आम बजट और रेल बजट एक साथ पेश किया जाएगा और मार्च में यूपी बोर्ड के एग्जाम होंगे. ऐसे में अभी ये साफ नहीं है कि चुनाव कब होगा. अखिलेश की मंशा आचार संहिता से पहले-पहले हवा अपने हक में करने की है. अभी तक अखिलेश इसमें कामयाब भी रहे हैं, लेकिन जल्दबाजी में वो आधे-अधूरे प्रॉजेक्ट्स का लोकार्पण करते जा रहे हैं. करीब एक हफ्ते पहले 21 नवंबर को लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे का उद्घाटन किया गया, लेकिन बाद में कहा गया कि लोगों के लिए इसे खोलने में दिसंबर तक का वक्त लगेगा.
यूपी की जनता में अभी तक अखिलेश की अच्छी छवि है. उन्हें विकास करने वाले नेता के तौर पर देखा जा रहा है. अखिलेश इसी छवि को और मजबूत करने में जुटे हुए हैं. दिसंबर के पहले सप्ताह में अखिलेश कुल 9 प्रॉजेक्ट्स का उद्घाटन करेंगे, जिनका शिलान्यास 2013 में किया गया था. इनमें से कई तो सड़के हैं, जिनका काम अभी पूरा नहीं हुआ है.
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद लोग बीजेपी ओर सम्मोहित जरूर हुए, लेकिन क्या नोटबंदी का फैसला उन्हें अखिलेश की तरफ मोड़ पाएगा, ये अभी तक साफ नहीं है. हालांकि, नोटबंदी के बावजूद महाराष्ट्र और गुजरात के निकाय चुनाव में बीजेपी ने एकतरफा जीत दर्ज की हैं.
मेट्रो और अखिलेश की एक इंट्रेस्टिंग बात

लखनऊ में मेट्रो को हरी झंडी दिखाने के बाद अखिलेश के नोएडा जाने का भी प्रोग्राम है, जहां उन्हें एक मेट्रो का उद्घाटन करके मेट्रो की सवारी करनी है. लेकिन, यूपी की सियासत का नोएडा से एक अंधविश्वास जुड़ा हुआ है. यूपी के नेता मानते हैं कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा में अपने सरकारी प्रोग्राम करता है, उसकी सत्ता चली जाती है. ये धारणा 25 साल से ज्यादा वक्त से चली आ रही है. ज्योतिषी भी तरह-तरह की गणनाएं पेश करके इस पुख्ता बनाते हैं.
राजनाथ सिंह जब यूपी के सीएम थे, तो उन्होंने नोएडा में बने फ्लाईओवर का उद्घाटन दिल्ली से किया था. 1999 में यूपी के सीएम राम प्रकाश गुप्ता एक बार नोएडा गए थे, जिसके बाद वो दोबारा कभी सीएम नहीं बन पाए. 2011 में मायावती ने नोएडा में कार्यक्रम करके इस धारणा को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन 2012 के चुनाव में वो हार गईं. अप्रैल, 2015 में अखिलेश को नोएडा में बनी एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी का उद्घाटन करना था, वो भी उन्होंने लखनऊ से ही किया था. इस प्रपंच में एनडी तिवारी, वीर बहादुर सिंह और कल्याण सिंह का नाम भी लपेटा जाता है. देखते हैं अब अखिलेश नोएडा आएंगे या नहीं.
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