The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Election
  • Afraid of Muslim vote slipping away amid talks of grand alliance, Mayawati calls mega meeting

UP के चुनाव में एक बड़ा भूचाल आ रहा है

प्रशांत किशोर सपा से मिल रहे हैं. अजित सिंह महागठबंधन के संकेत दे रहे हैं. बसपा को मुस्लिम वोट खिसकने का डर सता रहा है.

Advertisement
Img The Lallantop
फोटो - thelallantop
pic
पंडित असगर
8 नवंबर 2016 (अपडेटेड: 8 नवंबर 2016, 01:18 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

घरों के आगे चबूतरे बने होते हैं. जहां लोग बैठे गपियाते रहते हैं. चबूतरों के अलावा बरगद या नीम का पेड़ या फिर कोई चौक-चौराहा इन लोगों का ठिकाना बना होता है, जहां ये लोग एक खेल अक्सर खेलते हैं. उस खेल का नाम होता है बग्घी-बाघ. पता नहीं आपने नाम सुना होगा या नहीं. लेकिन अमरोहा, बिजनौर और मुरादाबाद जिलों में तो मैंने ये खेल खेलते देखा है और खेला भी है. इसमें चार बग्घे. यानी मोटे कंकड़ और 20 बग्घियां यानी छोटी कंकड़ियां होती हैं. और जमीन पर चौकोर खाने में टेढ़ी मेढ़ी रेखाएं खिंची होती हैं. जिनपर ये खेल खेला जाता है. इस खेल में बग्घों को बग्घियां जीतनी होती हैं. और बग्घियों का काम होता है वो बग्घों को बांध दें यानी शतरंज की चालों की तरह बग्घों की चाल ख़त्म कर दें, तो वो जीत जाएंगी.

कांग्रेस को चुनावी धार लगा रहे प्रशांत किशोर (पीके) अखिलेश यादव से मिलते हैं. और पीके सपा के चीफ से तीन दौर की लंबी मुलाकात करते हैं. समाजवादी पार्टी का सिल्वर जुबली प्रोग्राम होता है. और जनता परिवार से अलग होकर वजूद में आए दल यानी आरजेडी, आरएलडी और जेडीयू के नेता एक ही मंच पर नजर आते हैं. ये हलचल महागठबंधन की तरफ इशारा करती है.
अजित सिंह का कहना है कि अगर महागठबंधन हो जाता है तो मुस्लिम वोट कहीं नहीं जाएगा, बल्कि उस तरफ आएगा, जो बीजेपी को हराने की कुव्वत रखता है. और महागठबंधन ही बीजेपी को हरा सकता है. इसलिए मुस्लिम वोट महागठबंधन को ही मिलेगा.

यूपी में राजनेता ये ही वाला खेल खेल रहे हैं. राजनीति में ये चार बग्घे हैं. मुस्लिम, दलित, ब्राह्मण और यादव. बाकी जो जातियां बचीं, वो बग्घियां हैं. जाति की चालें चलकर राजनेता इन चार बग्घों से बाकी बग्घियों को जीत लेना चाहते हैं. सभी पार्टियां इन बग्घों को साधकर सत्ता कब्ज़ाना चाहती हैं. इन बग्घों को साधने के लिए ही महागठबंधन की सरगर्मियां नजर आने लगी हैं. आरएलडी चीफ अजित सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में महागठबंधन के साफ़ संकेत दिए हैं. अजित सिंह का कहना है कि सपा के प्रोग्राम में स्टेज पर मौजूद सभी दल गठबंधन चाहते हैं. मामला गिव एंड टेक का है. लेकिन सभी को अपनी इच्छाओं पर काबू रखना होगा. और ज्यादा देना होगा. तभी महागठबंधन शक्ल इख़्तियार कर सकता है. मुसलमान वोट खिसकता देख मायावती कांफ्रेंस करती हैं और कहती हैं, 'अगर सपा गठबंधन कर लेती है तो इसका मतलब होगा कि उसने पहले से ही अपनी हार मान ली. अगर उन्होंने काम किया होता तो सहारे की जरूरत नहीं पड़ती. यह पहले से ही हार चुके हैं. हारे लोगों को जनता स्वीकार नहीं करती.' मायावती का कहना है कि अगर महागठबंधन होता है तो इसका फायदा बीजेपी को ही होगा. भले ही उन्होंने बयान जारी कर दिया हो. लेकिन मुसलमानों के वोट खिसकने का डर पूरा है, इसलिए उन्होंने भी 10 नवंबर को मीटिंग बुलाई है, जिसमें पार्टी के जोनल और डिस्ट्रिक्ट लेवल के नेताओं शामिल होंगे. और पार्टी चुनावी रणनीति का रिव्यू होगा. क्योंकि बसपा दलित और मुसलमान वोट से सत्ता का ख्वाब सजाए हुए है. यूपी विधानसभा चुनाव नज़दीक आएं और सियासी भूचाल न आए. ये तो कोई बात नहीं हुई. कुछ तो जरूर ही पकेगा. आने वाले दिनों में कुछ बड़ा हेरफेर देखने को मिल सकता है. आने वाले दिनों में क्या होगा वो बाद में देखना, अभी जो हाल है, वो थोड़ा सा जान लो.

सबसे पहले आरएलडी

अजित सिंह वेस्ट यूपी में जाटों के सबसे बड़े लीडर. ये ही उनकी यूएसपी है. वो कांग्रेस, बीजेपी और एसपी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ चुके हैं. सबसे ज्यादा सही बीजेपी के साथ रहे. बीजेपी के साथ 2009 में पांच सांसद बने. 2002 में विधानसभा चुनाव में 14 विधायक बने. इसकी ख़ास वजह वेस्ट यूपी में जो बीजेपी का वोट बैंक था, जिसकी जाट वोटरों के साथ ट्यूनिंग बैठ जाती थी और उन्हें एक पाले में खड़े होने में कोई ऐतराज नहीं होता था. लेकिन मुजफ्फरनगर दंगों के बाद हालात बदल चुके हैं. जाट वोटर बीजेपी के पाले में शिफ्ट हो गया है. यानी अजित सिंह की चमक ख़त्म हो चुकी है. दंगों की वजह से जाट और मुस्लिम के बीच दूरी बढ़ी है. और अजित का साथ आना गठबंधन के लिए कितना फायदेमंद होगा, ये इससे अंदाजा लगाया जा सकता है.

कांग्रेस यूपी में कहां है?

यूपी में कांग्रेस के लिए प्रशांत किशोर जमीन तलाश रहे हैं. मगर कहां है, ये उनको अभी तक नहीं पता चला. कांग्रेस ने पिछले विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी को चुनाव प्रचार में उतारा. राहुल गांधी ने तमाम रोड शो के अलावा तकरीबन 200 से ज्यादा जन सभाएं कीं, लेकिन नतीजा वो नहीं मिला. अब यूपी में रीता बहुगुणा भी कांग्रेस का दामन छोड़कर बीजेपी में शामिल हो चुकी हैं. फर्क तो पड़ेगा ही बॉस.

सपा की खटपटाहट

सपा खानदान में खूब राजनीतिक ड्रामा हुआ. वो रचा हुआ था या सब खुद ब खुद होता गया, इसका तो पता नहीं. लेकिन इस ड्रामे का असर चुनाव पर ज़रूर पड़ेगा. मौजूदा हालात ये हैं कि सपा से मुस्लिम वोट छिटका है. इसकी वजह सपा सरकार के दौरान हुए दंगे भी है. महागठबंधन होने पर क्या फायदा मिलेगा, इसके बारे में अटकलें लगाने से बेहतर ये जान लेना सही है कि ये वही सपा है जो बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में शामिल हुई और फिर अलग हो गई. हालांकि सपा ने उम्मीद के मुताबिक सीटें न मिलने की बात कहकर कदम पीछे हटाये थे, लेकिन मुस्लिमों में ये ही मैसेज गया कि सपा बीजेपी से मिली है. इस शक को और गहराकर मायावती मुसलमानों को अपने पाले में लेने के लिए लगी हैं. एक प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा था कि सपा और बीजेपी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं.

बसपा और बीजेपी

बीजेपी वो ही खेल करना चाहती है, जो लोकसभा में किया. ओबीसी के साथ दलित वोट को भी खींच लेना. बसपा भले ही मुस्लिम वोट अपने साथ होने का दावा कर रही हो, अगर महागठबंधन हो जाता है तो इसका एक ये मैसेज जाएगा कि बाकी पार्टियां बीजेपी को हराने के लिए लामबंद हो रही हैं. इसके कई नतीजे हो सकते हैं. बीजेपी अगर हिंदुत्व पर दलितों के वोट बटोर पाई, तो बसपा मुस्लिम वोट बटोरने के चक्कर में दलित वोट भी खो बैठेगी.
प्रशांत किशोर और सपा की मुलाकातें. सपा के स्टेज पर आरजेडी, आरएलडी, जेडीयू का एक साथ आना क्या गुल खिलाता है और मायावती क्या रणनीति अपनाती हैं और बीजेपी क्या सियासी भूचाल लाती है. इसके लिए आने वाले दिनों का ही इंतजार कीजिए. वो क्या है न कि ऊंट किस करवट बैठेगा. कुछ नहीं पता होता वैसे ही सियासत का कुछ नहीं पता. बस अटकलें ही लगाई जा सकती हैं.

https://www.youtube.com/watch?v=xPugbbPSKlc&index
 

ये भी पढ़ें

मायावती के लिए मुस्लिम वोट बटोरेगा 28 साल का ये लड़का

बसपा ने कुरान पढ़ना शुरू कर दिया है

अटल बिहारी ने सुनाया मौलवी साब का अजीब किस्सा

क्या इंदिरा गांधी को 'दुर्गा' कह कर पलट गए थे अटल बिहारी?

Advertisement

Advertisement

()