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युद्ध के दौरान यूक्रेन से लौटे भारतीय मेडिकल छात्रों को रूस का ऑफर

जिन भारतीय छात्रों की रूस-यूक्रेन जंग के दौरान पढ़ाई बीच में ही छूट गई थी. वे पिछले शैक्षणिक वर्षों को गंवाए बिना रूसी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर सकते हैं.

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15 जून 2022 (अपडेटेड: 15 जून 2022, 03:39 PM IST)
medical students
सांकेतिक( तस्वीर-आजतक)
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रूस-यूक्रेन का युद्ध भारतीय छात्रों के लिए भी परेशानी लेकर आया. युद्ध से पहले यूक्रेन में हजारों छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे. लेकिन युद्ध छिड़ जाने की वजह से भारतीय छात्रों को पढ़ाई बीच में छोड़कर घर लौटना पड़ा. इस कारण हजारों छात्रों का भविष्य अधर में है. फिलहाल ताजा अपडेट ये है कि यूक्रेन से भारत वापस लौटे मेडिकल छात्रों को रूस ने अपने कॉलेजों में एडमिशन ऑफर किया है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर मुताबिक भारत में रूसी दूतावास के उप प्रमुख रोमन बाबुश्किन ने कहा, 

जिन भारतीय छात्रों की रूस-यूक्रेन जंग के दौरान पढ़ाई बीच में ही छूट गई थी. वे पिछले शैक्षणिक वर्षों को गंवाए बिना रूसी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर सकते हैं.

स्कॉलरशिप भी मिल सकती है

जो छात्र यूक्रेन में स्कॉलरशिप पर पढ़ाई कर रहे थे उन्हें रूस में भी स्कॉलरशिप मिल सकती है. रशियन फेडरेशन के मानद वाणिज्य दूत और तिरुवनंतपुरम में रशियन हाउस के डायरेक्टर रथीश सी नायर ने बताया कि छात्रों की स्कॉलरशिप भी विश्वविद्यालयों द्वारा स्वीकार की जा सकती है.  हालांकि उन्होंने फीस वापसी को लेकर साफ कर दिया है कि इसे पूरा वापस नहीं किया जाएगा. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि जो फीस यूक्रेन में लग रही थी वो जरूरी नहीं कि रूस में पढा़ई के लिए पर्याप्त साबित हो. यानी कि रूस में पढ़ाई के दौरान छात्रों को अतिरिक्त फीस भी देनी पड़ सकती है. नायर ने कहा कि केरल के छात्र अपनी मार्कशीट और अन्य अकादमिक रिकॉर्ड लेकर रशियन हाउस से संपर्क कर सकते हैं. 

ऑपरेशन गंगा चलाकर छात्रों को लाया गया था वापस

आपको  बता दें कि भारत से बड़ी संख्या में छात्र मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन जाते हैं.  रूस-यूक्रेन में युद्ध शुरू होने के बाद ये छात्र वहां फंस गए थे. जिसके बाद भारत सरकार ने ''ऑपरेशन गंगा' चलाकर करीब 22 हजार भारतीय छात्रों को वहां से निकाला था. अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़कर आए इन छात्रों की सकुशल स्वदेश वापसी तो हो गई थी लेकिन ये सवाल बना हुआ था कि अब इनके भविष्य का क्या होगा? यूक्रेन से भारत वापस आए छात्रों में से कुछ ने भारतीय मेडिकल कॉलेजों में ही एडमिशन की मांग की थी. 

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