The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Education
  • Acid attack survivor gets 95 percent number in cbse board exam results

एसिड अटैक में चेहरा, आंखें खोने वाली कफी ने CBSE परीक्षा में कितने नंबर हासिल किए?

टॉप करने के बाद कफ़ी ने जो संदेश दिया उसी को जीत का जज्बा कहते हैं.

Advertisement
Acid attacker survivor from Hisar tops CBSE Blind exams
एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए मिसाल बनीं कफ़ी. (फोटो- आजतक)
pic
पुनीत त्रिपाठी
12 मई 2023 (अपडेटेड: 12 मई 2023, 09:30 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

होली का दिन था. कफ़ी तब सिर्फ तीन साल की थीं. सबको होली खेलता देख वो भी रंगों का त्योहार मनाने घर से बाहर निकलीं. लेकिन रंग की जगह उनके चेहरे पर कुछ दहशतगर्दों ने तेजाब फेंक दिया. हमले के बाद कफ़ी की जान तो बच कई. लेकिन चेहरा बुरी तरह झुलस गया और आंखों की रौशनी चली गई. अब इसके आगे कोई सीधा ये बताए कि कफ़ी ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की परीक्षा में 95 पर्सेंट से ज्यादा नंबर हासिल किए हैं तो आपके चौंक जाने को हम समझ सकते हैं.

एसिड अटैक के पीड़ित जिंदा बच भी जाएं तो भी मेंटल ट्रॉमा से निकलना उनके लिए जिंदगी भर का संघर्ष बन जाता है. उससे जूझते हुए कोई माइल्सटोन हासिल करना वाकई में मिसाल देने वाला कारनामा है. कफ़ी ने भी ऐसा ही काम किया है. बेशक इस कामयाबी के पीछे उनकी हिम्मत और योग्यता के अलावा परिवार का सपोर्ट भी शामिल है.

एसिड अटैक के बाद कफ़ी और उनके परिवार ने कभी हार नहीं मानी. उनके परिजनों छह सालों तक देश के कई अस्पतालों के चक्कर काटे हैं. हालांकि लाख कोशिशों के बाद भी कफ़ी की देखने की क्षमता वापस नहीं आ पाई.

कफ़ी पर ये हमला 2011 में हरियाणा के हिसार में हुआ था. आंखें गंवाने के बाद कफ़ी का स्कूल में अन्य बच्चों की तरह पढ़ना मुमकिन नहीं था. इसलिए माता-पिता उन्हें चंडीगढ़ के ब्लाइंड इंस्टीट्यूट में ले आए. यहीं पढ़ाई करते हुए कफ़ी ने दसवीं में 95.20 फीसद अंक हासिल किए हैं. इंडियन एक्सप्रेस में छपी हिना रोहतकी की रिपोर्ट के मुताबिक कफ़ी का सपना आईएएस ऑफिसर बनने का है. वो कहती हैं,

Embed

हादसे के वक्त कफ़ी के पिता पवन एक लोहे की दुकान चलाते थे. हमले के बाद आगे परिवार चलाने के लिए परिवार को हिसार छोड़ना पड़ा. दूसरी तरफ हमले के तीनों आरोपी दो साल बाद जेल से बाहर आ गए. इसके खिलाफ 2019 में पवन ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. मामले में सुनवाई पेंडिंग है. फिलहाल पवन चंडीगढ़ के सेक्टर 17 में चपरासी की नौकरी करते हैं. बेटी की कामयाबी पर पिता कहते हैं,

Embed

कफ़ी भले देख नहीं पातीं, लेकिन अपने परिवार की समस्याओं से वाकिफ हैं. वो बताती हैं,

Embed

रिपोर्ट के मुताबिक कफी ने ब्रेल लिपि, एजुकेशन वीडियो और अन्य चीज़ों की मदद से सभी सब्जेक्ट्स के बेसिक्स को अच्छी तरह समझा. उसके बाद आगे की तैयारी की. उनके इरादों की ताकत के आगे ये कहना भी हल्का लगता है, फिर भी कहना तो पड़ेगा. बहुत कड़ी मेहनत करके कफ़ी ये मुकाम हासिल किया है. वो आगे ह्यूमैनिटिज़ की पढ़ाई करना चाहती हैं और आईएएस अधिकारी बनने का इरादा रखती हैं.

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: CBSE 10th, 12th रिजल्ट में फेल हों या पास, ये वीडियो आपको देखना चाहिए!

Advertisement

Advertisement

()