भारत में इंटर्न्स को मिल रही ₹30 लाख महीना की सैलरी, कौन दे रहा और क्यों?
हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग में कंपनियां कंप्यूटर और एल्गोरिदम की मदद से ये पता लगाती हैं कि किन शेयरों में पैसा लगाने से फायदा हो सकता है. इसमें पलक झपकते ही सही ट्रेडिंग के फैसले लिए जाते हैं.
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शेयरों की समझ रखने वाले युवाओं को मोटा पैसा मिल रहा है. (सांकेतिक फोटो: Unsplash.com)
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