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शेयर मार्केट में तगड़ा नुकसान हुआ है, वेदांता ग्रुप का हाल भी अडानी जैसा होगा?

ग्रुप के ऊपर भारी भरकम कर्ज है.

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वेदांता ग्रुप के मुखिया अनिल अग्रवाल (फाइल फोटो)
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प्रदीप यादव
28 फ़रवरी 2023 (अपडेटेड: 28 फ़रवरी 2023, 10:45 PM IST)
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हिंडनबर्ग की रिपोर्ट (Hindenburg Report) आने के बाद से अब तक अडानी समूह (Adani Group) का कारोबारी किला हिला हुआ है. लेकिन अब स्क्रैप किंग कहे जाने वाले अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाले कारोबारी घराने वेदांता समूह (Vedanta Group) के लिए भी कर्ज मुसीबत की वजह बन सकता है. खबर है कि अनिल अग्रवाल भी कर्ज के बोझ तले दबे हैं. न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक लंदन के शेयर मार्केट में लिस्टेड रह चुकी कंपनी वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड पर भारी भरकम कर्ज है. इतना ही नहीं, कंपनी को करीब 8300 करोड़ रुपये का विदेशी कर्ज अगले साल जनवरी तक चुकाना भी होगा. कंपनी ने यह कर्ज डॉलर बॉन्ड के तौर पर ले रखा है.

प्लान बनाया था, लेकिन…

दरअसल, पिछले साल जब अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें बढ़ाना शुरू किया था, इसी समय के आसपास रूस और यूक्रेन का युद्ध भी शुरू हुआ था. जिसके बाद चीजों के भाव आसमान छू रहे थे. इसी समय कर्ज के बोझ तले दबी वेदांता रिसोर्सेज और फायदे में चलने वाली भारतीय कंपनी वेदांता लिमिटेड के विलय की तैयारी चल रही थी. हालांकि, इसी बीच वेदांता रिसोर्सेज ने अपने कर्ज को मैनेज करने के लिए प्रयास जारी रखा और पिछले साल अपना कर्ज  लगभग 82 हजार 658 करोड़ रुपये से घटाकर 66 हजार 137 करोड़ रुपये के आसपास कर लिया था. 

वेदांता लिमिटेड की प्रमुख कंपनी वेदांता रिसोर्सेज की वेबसाइट के मुताबिक, कंपनी पर मार्च 2022 के अंत में करीब 80 हजार करोड़ रुपये का भारी कर्ज था. इसमें से करीब 25 हजार करोड़ रुपये का भुगतान उसे अप्रैल, 2023 में करना है.

अनिल अग्रवाल ने वेदांता रिसोर्सेज को कर्ज के संकट से बाहर निकालने के लिए वेदांता रिसोर्सेज और वेदांता लिमिटेड को मर्ज करने का प्लान इसलिए बनाया था क्योंकि वेदांता लिमिटेड के पास अच्छा खासा कैश फ्लो था. इस पैसे की मदद से कंपनी अपने कर्ज के बोझ को कम करना चाहती थे. लेकिन इस काम में अनिल अग्रवाल सफल नहीं रहे. अग्रवाल की कोशिशों को झटका तब लगा, जब उन्होंने इस साल सितंबर और जनवरी 2024 के बीच करीब 12,400 करोड़ रुपये बतौर कर्ज और बॉन्ड रीपेमेंट जुटाने की कोशिश की. लेकिन उनकी यह कोशिश सफल नहीं रही. 

पैसे जुटाने में दिक्कत हो सकती है

अब उनके सामने कई चुनौतियां दिखाई दे रही हैं. वेदांता रिसोर्सेज के अगस्त 2024 के बॉन्ड रेट 70 सेंट से नीचे पर कारोबार कर रहे हैं. ऐसे में वेदांता को हाल फिलहाल पैसे जुटाने में दिक्कतें आ सकती है. अगर वेदांता फंड नहीं जुटा पाती है तो उसकी क्रेडिट रेटिंग खराब हो सकती है. हालांकि, अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता रिसोर्सेज पर गौतम अडानी की कंपनियों की तुलना में तीन गुना कम कर्ज है. अडानी समूह पर दो लाख करोड़ रुपये का कर्ज का है. हालांकि, वेदांता पर कर्ज का बोझ भले ही अडानी से मुकाबले कम है, लेकिन उनका बॉन्ड निवेश ग्रेड के हिसाब से सबसे निचले पायदान पर चल रहा है, जो कंपनी के लिए चिंता का विषय है.

अनिल अग्रवाल अपने कर्ज को कम करने के लिए अपनी दूसरी कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड को बेचना चाहते हैं. हालांकि, सूत्रों का कहना है कि सरकार ने उन्हें ऐसा नहीं करने को कहा है. हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में सरकार की करीब 30 फीसदी हिस्सेदारी है. सरकार के इस आदेश के बाद अनिल अग्रवाल के कर्ज कम करने की योजना को झटका लग सकता है. वहीं रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल ने कहा कि अगर वेदांता अपने इंटरनेशनल जिंक एसेट्स को बेचकर करीब साढ़े सोलह हजार करोड़ रुपये नहीं जुटा पाती है, तो कंपनी पर दवाब बढ़ सकता है. 

कंपनी के सामने दोहरी मुश्किल

इस तरह से देखें तो कंपनी के सामने दोहरी मुश्किल है. पहली ये कि कैश नहीं होने की वजह से कंपनी को और पैसा लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. जिसकी वजह से कर्ज का बोझ और बढ़ेगा. इतना ही नहीं, क्योंकि फेडरल रिजर्व की ओर से भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी नहीं करने के कोई संकेत नहीं मिले हैं, जिसकी वजह से बाजार से फंड उठाना महंगा होगा.

इसके अलावा दूसरी समस्या राजनीतिक विरोध को लेकर है. इस वजह से हिंदुस्तान जिंक की डील को लेकर अनिल अग्रवाल सरकार पर दबाव नहीं बना पाएंगे. ऐसा करने से उन्हें सरकार की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है. अगर ऐसा हुआ, तो वेदांता समूह के सेमीकंडक्टर फैक्ट्री लगाने के प्लान को भी झटका लग सकता है. ताइवान के फॉक्सकॉन टेक्नॉलजी ग्रुप के साथ वेदांता समूह करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये की लागत से गुजरात में सेमीकंडक्टर फैक्ट्री लगाने जा रही है. 

इस प्रोजेक्ट पर महाराष्ट्र में विपक्षी दलों की भी पैनी नजर है. इसका कारण ये है कि पहले ये परियोजना महाराष्ट्र में शुरू होने वाली थी, लेकिन आखिरी समय में इस परियोजना को गुजरात में शिफ्ट कर दिया गया था. वहीं कर्ज मिलने में आ रही दिक्कतों का असर कंपनी के शेयरों पर भी दिखने लगा है.  मंगलवार 28 फरवरी को BSE पर वेदांता लिमिटेड का शेयर इंट्रा डे में लगभग 9 फीसदी की गिरावट के साथ 262 रुपये के स्तर पर पहुंच गया. खास बात है कि शेयर में लगातार 8वें कारोबारी दिन भी गिरावट बनी हुई है और आज कंपनी का शेयर 5 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया. एक महीने में वेदांता लिमिटेड का शेयर करीब 20 फीसदी टूट चुका है.

वीडियो: खर्चा पानी: अडानी ग्रुप में LIC का निवेश नुकसान में पहुंचा, पाॅलिसी होल्डर्स पर कितना असर पड़ेगा?

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