अब कोई अपने फायदे के लिए 'ऊ ला ला ला ला ले ओ' नहीं बोल पाएगा
किंगफिशर बीयर के साथ लंबे समय से जुड़ा यह जिंगल अब बौद्धिक संपदा अधिकार कानून (Intellectual Property Right) के तहत रजिस्टर्ड हो गया है.
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शराब कंपनी यूनाइटेड ब्रेवरीज (United Breweries) को मशहूर किंगफिशर जिंगल ‘ऊ ला ला ला ला ले ओ’ के लिए साउंड मार्क रजिस्ट्रेशन मिल गया है. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रेड मार्क्स रजिस्ट्री ने ‘ऊ ला ला ला ला ले ओ’ को 31 जनवरी 2025 से रजिस्टर्ड करार दिया है. यह रजिस्ट्रेशन अगले 10 सालों तक वैध रहेगा. इसके बाद इसको रिन्यू किया जा सकता है.
किंगफिशर बीयर के साथ लंबे समय से जुड़ा यह जिंगल अब बौद्धिक संपदा अधिकार कानून (Intellectual Property Right) के तहत रजिस्टर्ड हो गया है. इसका मतलब हुआ कि अब इस जिंगल का इस्तेमाल कोई और कंपनी अपने प्रोडक्ट्स के प्रचार-प्रसार के लिए नहीं कर पाएगी.
क्या है बौद्धिक संपदा अधिकार ?बौद्धिक संपदा अधिकारों में उद्योगों से जुड़े आविष्कार, औद्योगिक डिजाइन, ट्रेडमार्क आदि के पेटेंट शामिल हैं. इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक ये अधिकारसाहित्यिक कृतियों (जैसे उपन्यास, कविताएं), फिल्मों, संगीत और दूसरी कलात्मक कृतियों को भी कवर करते हैं. इस अधिकार को कानूनी रूप से लागू करने के लिए आपको भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क नियंत्रक महानिदेशालय में रजिस्टर्ड कराना होता है.
पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क नियंत्रक महानिरीक्षक का कार्यालय मुंबई में है. पेटेंट का हेडऑफिस कोलकाता में है. शाखाएं चेन्नई, नई दिल्ली और मुंबई में भी हैं. वहीं, ट्रेडमार्क रजिस्ट्री मुंबई में है. इसकी शाखाएं कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद और नई दिल्ली में हैं.
साउंड मार्क क्या है?मिंट की एक खबर में क्लियरटैक्स के हवाले से बताया गया है कि साउंड मार्क कोई ध्वनि भी हो सकती है और इसमें शब्द भी हो सकते हैं. जिंगल, संगीत की कोई धुन साउंड मार्क के ही उदाहरण हैं. इनसे ग्राहकों के बीच किसी ब्रॉन्ड की पहचान बनाने में मदद मिलती है.
अगर कोई कंपनी अपने जिंगल या धुन को रजिस्टर करा लेती है तो दूसरी कंपनी उस जैसी ध्वनि का व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं कर सकती है. एक तरह से उस कंपनी को कानूनी सुरक्षा मिलती है.
ट्रेड मार्क्स रूल्स, 2017 के तहत साउंड मार्क को भी ट्रेडमार्क की श्रेणी के रूप में मान्यता दी गई है.
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