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  • truck falls 40 feet one day after purchase: Why HDFC ERGO must now pay Rs 23.75 lakh despite ‘no claim’ status

एक दिन पुराना ट्रक 40 फीट नीचे गिरा, नियम नहीं था फिर भी क्यों मिले 23.75 लाख रुपये?

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने HDFC ERGO जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील खारिज करते हुए उस आदेश को बरकरार रखा है. इसमें बीमा कंपनी को इस नए ट्रक के मालिक को 23.75 लाख रुपये ब्याज सहित देने का निर्देश दिया गया था.

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ट्रक डिलीवरी के सिर्फ एक दिन बाद ही दुर्घटना में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था ()
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प्रदीप यादव
13 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 02:22 PM IST)
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राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने HDFC ERGO जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील खारिज करते हुए उस आदेश को बरकरार रखा है. इसमें बीमा कंपनी को इस नए ट्रक के मालिक को 23.75 लाख रुपये ब्याज सहित देने का निर्देश दिया गया था. यह ट्रक डिलीवरी के सिर्फ एक दिन बाद ही दुर्घटना में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है.

एवीएम जे. राजेंद्र (रिटायर), पीठासीन सदस्य और जस्टिस अनुप कुमार मेंदिरत्ता की पीठ इस कंपनी की तरफ से दायर अपील की सुनवाई कर रही थी. पीठ ने तेलंगाना राज्य उपभोक्ता आयोग के फैसले को सही ठहराया. NCDRC ने 10 फरवरी के अपने आदेश में कहा, “बीमा कंपनी को इस दावे को “टोटल लॉस” मानते हुए निपटाना जाना चाहिए था . साथ ही शिकायतकर्ता की तरफ दिए गए स्वतंत्र अनुमान को बीमा कंपनी द्वारा नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था.”

"सर्वेयर की रिपोर्ट अंतिम नहीं"

आयोग ने कहा कि सर्वेयर की रिपोर्ट आखिरी सत्य नहीं होती. बिना ठोस कारण के सर्वेयर ने सिर्फ चेसिस की मरम्मत लागत को आधार बनाया ताकि क्लेम इंश्योर्ड डिक्लेयर वैल्यू(IDV) के 75% से कम दिखाया जा सके.

उपभोक्ता से मिले अनुमान बताते हैं कि IDV 75% से अधिक थी. वाहन के सभी प्रमुख हिस्सों को नुकसान हुआ था. इसलिए यह साफ तरीके से “टोटल लॉस” का मामला था. आयोग ने यह भी माना कि शिकायतकर्ता उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत ‘उपभोक्ता’ की श्रेणी में आता है.

अपील खारिज और 10 हजार का जुर्माना लगाया 

राज्य उपभोक्ता आयोग के आदेश में कोई गलती न पाते हुए NCDRC ने बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी और 10,000 रुपये की अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया है. साथ ही छह सप्ताह के भीतर भुगतान का निर्देश दिया. ऐसा न करने पर 8% सालाना का ब्याज देना होगा.

खरीद के 24 घंटे के भीतर दुर्घटना

यह मामला तेलंगाना के नलगोंडा जिले के दंथुरी वेंकटेश का है. वेंकटेश ने 18 जून 2013 को एक टाटा डीजल ट्रक खरीदा था. वाहन का बीमा 25 लाख रुपये के IDV के साथ 18 जून 2013 से 17 जून 2014 तक था. 19 जून 2013 को यानी खरीद के अगले ही दिन यह ट्रक डिवाइडर से टकराकर पुल से लगभग 40 फीट नीचे खाई में गिर गया. चेसिस टूट गया और वाहन को भारी नुकसान हुआ. घटना की सूचना पुलिस और बीमा कंपनी दोनों को दी गई.

बीमा कंपनी ने ‘नो क्लेम’ बताकर मामला बंद किया था

बीमा कंपनी ने 3 अक्टूबर 2013 को दावा “नो क्लेम” बताते हुए बंद कर दिया. कंपनी का कहना था कि उपभोक्ता ने वाहन दोबारा जांच के लिए पेश नहीं किया और जरूरी दस्तावेज नहीं दिए. कंपनी के सर्वेयर ने मरम्मत लागत 11 लाख 39 हजार 880 रुपये आंकी, जो IDV के 75% से कम थी और कहा कि वाहन मरम्मत योग्य है.

उपभोक्ता ने दिए स्वतंत्र आकलन

उपभोक्ता ने अधिकृत वर्कशॉप के कई स्वतंत्र अनुमान पेश किए, जिनमें मरम्मत लागत 22 लाख रुपये से अधिक बताई गई. उपभोक्ता ने कहा कि भारतीय मोटर टैरिफ के जनरल रेगुलेशन-8 के मुताबिक, अगर मरम्मत लागत IDV के 75% से अधिक हो तो वाहन “कंस्ट्रक्टिव टोटल लॉस” माना जाता है. यहां 25 लाख रुपये के IDV का 75% यानी 18.75 लाख रुपये था, जबकि वास्तविक नुकसान इससे ज्यादा था.

राज्य उपभोक्ता आयोग ने फटकारा ?

तेलंगाना राज्य उपभोक्ता आयोग ने 25 जनवरी 2018 के आदेश में बीमा कंपनी की दलीलों की कड़ी आलोचना की थी. आयोग ने कहा कि नए वाहन को गंभीर संरचनात्मक नुकसान होने पर केवल कुछ पार्ट्स की कीमत जोड़ना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि ट्रक को सड़क पर चलने लायक बनाने के लिए जुड़े इस वाहन के कई हिस्सों को भी बदलना पड़ता है. आयोग ने यह भी कहा कि बीमा कंपनी ने अपनी जिम्मेदारी कम करने के लिए गलत तरीके से बचाव किया. आयोग ने उपभोक्ता को 23 लाख 75 हजार शिकायत की तारीख से 6% ब्याज और 5,000 रुपये खर्च के रूप में देने का आदेश दिया था.

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