सेंसेक्स-निफ्टी दोनों लाल, शेयर मार्केट में आए हाहाकार के पीछे हैं ये 5 वजह
Stock Market Crash: अमेरिकी और एशियाई बाजारों से मिले खराब संकेतों की वजह से भारतीय बाजार की शुरुआत बेहद खराब रही. सोमवार, 18 मई को बाजार खुलते ही मार्केट क्रैश हो गया. मार्केट में यह गिरावट क्यों आई? यह भी जान लीजिए.

पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने भारतीय शेयर मार्केट पर बुरा असर डाला है. अमेरिकी और एशियाई बाजारों से मिले खराब संकेतों की वजह से भारतीय बाजार की शुरुआत बेहद खराब रही. सोमवार, 18 मई को खुलते ही मार्केट क्रैश हो गया. बाजार में किसी एक सेक्टर नहीं, बल्कि चौतरफा बिकवाली का दबाव है. फाइनेंशियल, आईटी (IT) और मेटल सेक्टर के बड़े शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई.
मार्केट की हालिया स्थिति (सुबह 10:00 बजे तक)
सेंसेक्स (Sensex): 900.57 अंक (1.20%) टूटकर 74,337.42 पर कारोबार कर रहा है. निफ्टी 50 (Nifty 50): 282.10 अंक (1.19%) फिसलकर 23,361.40 के स्तर पर आ गया है. इस तेज गिरावट से बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैप में करीब 7 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई, जिससे यह घटकर 454 लाख करोड़ रुपये पर आ गया. मार्केट कैप शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों की कुल वैल्यू को कहते हैं.
शुरुआती कारोबार में लगभग सभी प्रमुख सेक्टर्स में बिकवाली (सेल-ऑफ) का दबाव देखा गया. बैंकिंग, आईटी, ऑटो और मेटल स्टॉक्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ा. बड़े लेवल पर मार्केट का सेंटिमेंट भी कमजोर रहा और मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी बेंचमार्क के साथ नीचे ट्रेड कर रहे हैं.
तेल की ऊंची कीमतों से देश के व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ने की आशंका है. साथ ही रुपये के कमजोर होने और घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर भी चिंता है. भारतीय रुपया तेजी से कमजोर हुआ है और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96 के निशान से नीचे आ गया. इससे महंगाई और लगातार विदेशी फंड के बाहर जाने की चिंता बढ़ गई.
बाजार में गिरावट के 5 बड़े कारणइकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट में बाजार में आई आज की गिरावट के पीछे कई कारण बताए गए हैं. आइए जानते की बाजार की गिरावट के 5 बड़े कारण क्या है?
1. अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से डर का माहौल
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान को नई चेतावनी दी, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है. UAE में ड्रोन हमला और सऊदी अरब की ड्रोन इंटरसेप्ट करने की खबरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी. जब दुनिया में युद्ध या बड़े तनाव की आशंका बढ़ती है, तो निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालना शुरू कर देते हैं. इसी डर की वजह से आज बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली.

2. बॉन्ड यील्ड रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची
अमेरिका समेत कई देशों में बॉन्ड यील्ड तेजी से बढ़ गई है. अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड फरवरी 2025 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई. आमतौर पर जब बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न मिलने लगता है, तो निवेशक शेयर बाजार की बजाय बॉन्ड में पैसा लगाना सुरक्षित मानते हैं. इससे इक्विटी बाजार में निवेश कम होता है और शेयर बाजार पर दबाव बढ़ जाता है.
3. रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर अपने अब तक के सबसे कमजोर स्तर 96.18 पर पहुंच गया. लगातार पांचवें दिन रुपये में गिरावट देखने को मिली. रुपये की कमजोरी से विदेशी निवेशकों का भरोसा प्रभावित होता है. इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी भारत पर दबाव बढ़ाया, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है. इससे बाजार में घबराहट और बढ़ गई.
4. कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल
ब्रेंट क्रूड की कीमत 110 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है. तेल की कीमतों में यह उछाल वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से आया. भारत जैसे देश के लिए महंगा तेल बड़ी चिंता है, क्योंकि इससे पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं और महंगाई बढ़ सकती है. कंपनियों की लागत बढ़ने का डर भी निवेशकों को परेशान कर रहा है.
5. वैश्विक बाजारों में भारी गिरावट
अमेरिका, यूरोप और एशिया के ज्यादातर बड़े शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली. जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंग सेंग, अमेरिका का नैस्डैक और S&P 500 सभी दबाव में रहे. जब दुनिया भर के बाजार गिरते हैं, तो उसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ता है. विदेशी निवेशक जोखिम कम करने के लिए उभरते बाजारों से पैसा निकालने लगते हैं. इससे भारतीय शेयर बाजार में भी बड़ी गिरावट आ जाती है.
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क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा,
"स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए कोई पहल नहीं हो रही है. इस वजह से ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 111 डॉलर प्रति बैरल हो गई है. क्रूड की कीमतों में बढ़ोतरी होने की वजह से अभी पेट्रोल और डीजल के दाम और बढ़ सकते हैं. इसका महंगाई पर बुरा असर पड़ेगा. अमेरिका के 10-साल के बॉन्ड यील्ड का बढ़कर 4.62% हो जाना भी एक नकारात्मक पहलू है."
उन्होंने आगे कहा कि रुपये में और गिरावट आने से करेंसी की कमजोरी और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) की बिकवाली का सिलसिला और तेज हो सकता है.
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