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ईरान जंग ने निकाला शेयर मार्केट का तेल, सेंसेक्स 1600 अंक टूटा, रुपया सबसे निचले स्तर पर

Stock Market Crash: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 93.89 रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जिससे आयात और महंगा हो गया है. जोखिम भरे माहौल का असर शेयर, बॉन्ड और सोने जैसे सभी एसेट्स पर पड़ा है.

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23 मार्च 2026 (अपडेटेड: 23 मार्च 2026, 11:25 AM IST)
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होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से कच्चे तेल की कीमत में उछाल आया. (ITG/AP/Rafiq Maqbool)
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वेस्ट एशिया के बढ़ते तनाव ने भारतीय शेयर बाजार की कमर तोड़ कर रख दी है. सोमवार, 23 मार्च को बाजार खुला, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के चलते निवेशकों ने जमकर बिकवाली की. सुबह करीब 10:13 बजे तक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का Sensex 1650.16 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ 72,882.80 पर आ गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का Nifty 50 भी 532.10 अंक टूटकर 22,583.20 के आसपास कारोबार करता दिखा.

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष अब चौथे हफ्ते में पहुंच चुका है. हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते नजर आ रहे हैं. खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चिंता बढ़ गई है, जो दुनिया में तेल सप्लाई का बहुत अहम समुद्री रास्ता है. यहां रुकावट आने से तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ रहा है.

कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं. तेल के लिए बाहरी देशों पर निर्भर रहने वाले भारत जैसे देशों के लिए चिंता बढ़ गई है. महंगा तेल मतलब महंगाई बढ़ेगी, देश का खर्च बढ़ेगा और आर्थिक ग्रोथ पर भी असर पड़ेगा.

इधर रुपये की हालत भी कमजोर हो गई है. सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 93.89 रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जिससे आयात और महंगा हो गया है. इंडिया टुडे से जुड़े सोनू विवेक की रिपोर्ट के मुताबिक, जियोजीत इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार ने बताया,

"वेस्ट एशिया में चल रही जंग चौथे हफ्ते में पहुंच गई है और अभी तक यह साफ नहीं है कि यह कब खत्म होगी. दुर्भाग्य से जंग बढ़ रही है."

उन्होंने आगे कहा,

"अनिश्चितता बहुत ज्यादा है और बाजार अब हालात पर नजर बनाए हुए हैं. इस जोखिम भरे माहौल का असर शेयर, बॉन्ड और सोने जैसे सभी एसेट्स पर पड़ा है."

सेक्टर की बात करें तो लगभग हर जगह गिरावट दिखी. मेटल शेयर सबसे ज्यादा टूटे, करीब 4 फीसदी नीचे आए. इसके अलावा पब्लिक सेक्टर यूनिट यानी सरकारी बैंक (PSU Banks), कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, फाइनेंशियल, ऑटो और रियल्टी सेक्टर में भी जोरदार गिरावट रही.

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी नहीं बचे. दोनों में करीब 3 फीसदी की गिरावट आई. इसका मतलब है कि गिरावट सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही. मार्केट टूटने का असर छोटी कंपनियों पर भी पड़ रहा है.

कुछ शेयर जैसे टाटा स्टील, अडानी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस और टाइटन में भारी गिरावट देखी गई. हालांकि आईटी सेक्टर थोड़ा संभला रहा, जहां HCL टेक्नोलॉजीज और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में हल्की बढ़त दिखी.

वीडियो: ईरान ने Strait of Hormuz की जगह कौन सा नया रास्ता निकाला?

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