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एक दिन में निवेशकों के 9 लाख करोड़ रुपये भस्म! सेंसेक्स के 'लथपथ' होने की 5 वजहें

सेंसेक्स और निफ्टी 3 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं. नए साल की शुरुआत से ही विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसे निकालने पर आमादा हैं.

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सेंसेक्स और निफ्टी 3 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं (फोटो क्रेडिट: Business today ). प्रतीकात्मक फोटो
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प्रदीप यादव
20 जनवरी 2026 (Updated: 20 जनवरी 2026, 10:06 PM IST)
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भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार 20 जनवरी को भारी गिरावट देखने को मिली. शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक ताश के पत्तों की तरह ढहते दिखे. बांबे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 1,066 अंक गिरकर 82,180.47 पर बंद हुआ. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में 353 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 25,232.50 पर बंद हुआ. इस गिरावट के साथ सेंसेक्स और निफ्टी 3 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं. यह लगातार दूसरा कारोबारी सत्र रहा जब बाजार में गिरावट देखने को मिली. 

सेंसेक्स देश की 30 बड़ी और मजबूत कंपनियों का सूचकांक है, जिन्हें बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में सूचीबद्ध कंपनियों में से चुना जाता है. वहीं, निफ्टी यानी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) 50 बड़ी कंपनियों का सूचकांक है. इसमें अलग-अलग सेक्टर की बड़ी कंपनियां शामिल होती हैं.

शेयर बाजार निवेशकों के 9 लाख करोड़ डूबे! 

बाजार में आई इस भारी गिरावट के चलते एक दिन में ही निवेशकों को करीब 9 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है. इकोनॉमिक टाइम्स की एक खबर में बताया गया है कि बीएसई पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) लगभग 9.46 लाख करोड़ रुपये घटकर 455.7 लाख करोड़ रुपये रह गया. मार्केट कैप का मतलब शेयर बाजार में लिस्टेड सभी कंपनियों के सभी शेयरों की कुल बाजार कीमत से होता है. 

हालांकि, शेयर बाजार में होने वाला नुकसान नोशनल होता है. इसका मतलब यह है कि जब तक निवेशक अपने शेयर बेचते नहीं हैं, तब तक यह नुकसान वास्तविक नहीं माना जा सकता है. शेयरों की कीमत गिरने से पोर्टफोलियो की वैल्यू घटती जरूर है, लेकिन अगर बाजार दोबारा संभल जाता है तो इस नुकसान की भरपाई भी हो जाती है. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में शेयर बाजार गिरने की कई वजहें बताई गई हैं.

आईटी शेयरों में दबाव

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 20 जनवरी को आईटी कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा दबाव में रहे. इसके चलते निफ्टी आईटी इंडेक्स 2.1% टूट गया. देश की प्रमुख आईटी कंपनी विप्रो (Wipro) लगभग 3% गिरा, जबकि LTIMindtree के शेयर 7% तक टूट गए. इससे आईटी सेक्टर की कमाई को लेकर चिंता बढ़ी. हाल ही में जारी वित्तीय नतीजों में बताया गया है कि LTIMindtree का मुनाफा घटा है.

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दुनियाभर के शेयर बाजारों में कमजोरी 

दुनियाभर के शेयर बाजारों में कमजोरी और टैरिफ की चिंता का असर भारत के शेयर बाजारों पर पड़ा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ की धमकी दी है. इससे वैश्विक बाजारों में डर का माहौल बना. एशियाई बाजार कमजोर रहे और अमेरिकी शेयर बाजारों में भी गिरावट दिखी.

विदेशी निवेशक भारत के शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं 

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार दसवें कारोंबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजारों से बिकवाली जारी रखी. 19 जनवरी को विदेशी निवेशकों ने करीब 3,263 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. इससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया. 

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, नए साल की शुरुआत से ही विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसे निकालने पर आमादा हैं. जनवरी के पहले हफ्ते में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 14,266 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे. इसके चलते 19 जनवरी 2026 तक विदेशी निवेशकों की कुल बिकवाली 26,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है. हालांकि, बाजार के लिए एक अच्छी बात ये रही है कि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने इस महीने अब तक 34 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत के शेयर खरीदे हैं. 

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शेयर ही जगह सोना-चांदी में निवेश बढ़ा रहे निवेशक

निवेशकों ने शेयर बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश के लिए सोना और चांदी में निवेश बढ़ाया है. इसके चलते सोना रिकॉर्ड स्तर के पास पहुंच गया, जबकि चांदी पहली बार 3 लाख रुपये प्रति किलो के पार निकल गई.

रुपये की कमजोरी ने 'काम' बिगाड़ा

रुपया लगातार पांचवें दिन कमजोर हुआ. डॉलर की मजबूत मांग और वैश्विक अनिश्चितता ने करेंसी मार्केट में भी दबाव बढ़ाया. इसका असर शेयर बाजार पर पड़ा. इसके अलावा ट्रंप के टैरिफ से जुड़े मामलों पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. इससे निवेशक जोखिम लेने से बचते नजर आए.

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