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और कितना गिरोगे 'रुपये'? 91 से भी नीचे चले गए, ऐसा तो इतिहास में कभी नहीं हुआ था

Rupee fall today: साल 2025 में रुपया अब तक एशिया की मुद्राओं में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी रहा है. इस साल एक जनवरी से 16 दिसंबर के बीच डॉलर के बरक्स रुपया 6.3% गिर चुका है.

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16 दिसंबर 2025 (अपडेटेड: 16 दिसंबर 2025, 01:53 PM IST)
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रुपया आलटाइम लो पर पहुंचा (फोटो क्रेडिट: Business Today)
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मंगलवार 16 दिसंबर को डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 91 के स्तर से नीचे फिसल गया. इतिहास में ये पहली बार है जब रुपया इतना नीचे पहुंच गया है. वैसे पिछले चार कारोबारी सत्रों से रुपये में गिरावट देखी जा रही है. लेकिन आज एक डालर कीमत 91 रुपये से भी ज्यादा नीचे पहुंच गई. मंगलवार, 16 दिसंबर को रुपया 4 पैसे कमजोर होकर 90.77 प्रति डॉलर पर खुला, लेकिन जैसे ही कारोबार आगे बढ़ा यह 35 पैसे टूटकर 91.08 के नए निचले स्तर पर पहुंच गया. 

न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग के अनुसार साल 2025 में रुपया अब तक एशिया की मुद्राओं में  सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी रहा है. इस साल  एक जनवरी से 16 दिसंबर के बीच डॉलर के बरक्स रुपया 6.3% गिर चुका है. केवल दिसंबर महीने में ही रुपये में 1.72% की गिरावट आई है.  3 दिसंबर 2025 को डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 90 के स्तर से नीचे गया था.

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बिजनेस स्टैंडर्ड की एक खबर में रुपये में गिरावट की 3 मुख्य वजहें बताई गई हैं. विदेशी निवेशकों की तरफ से भारत के शेयर बाजार से पैसा निकालने और अमेरिका के साथ ट्रेड डील में देरी के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है.इसके अलावा रुपये में  गिरावट के पीछे भारत का बढ़ता चालू खाता घाटा भी माना जा रहा है. नवंबर के व्यापार आंकड़ों में देश का व्यापार घाटा घटकर पांच महीने के निचले स्तर 24.53 अरब डॉलर (2.23 लाख करोड़ रुपये) पर आ गया. हालांकि  निर्यात साढ़े तीन साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया.

सोमवार 15 दिसंबर को भारत के वित्त राज्य मंत्री ने लोकसभा में एक बयान में कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में रुपये में गिरावट की वजहों की बात करें तो बढ़ता व्यापार घाटा और भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील में देरी है. जानकारों का कहना है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लगातार भारतीय शेयर मार्केट और डेट मार्केट से निवेश घटा रहे हैं. यह पैसा डॉलर में कनवर्ट कर रहे हैं इससे डॉलर की मांग बढ़ी है और रुपया कमजोर पड़ रहा है. इस महीने अब तक दुनियाभर के निवेशकों ने भारत के शेयर बाजार से 1 लाख 61 हजार करोड़ रुपये निकाले हैं. 

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