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'मिस सेलिंग' पर क्या कर रहा RBI? 90 साल के बुजुर्ग को साल 2124 वाला बीमा बेच दिया गया

बैंक की एक शाखा के जरिए 90 साल के एक बुजुर्ग को अगले 100 साल में मैच्योर होनी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी बेच दी गई. इसका सालाना प्रीमियम लगभग 2 लाख रुपये था. मैच्योरिटी साल 2124-2126 के आसपास बताई गई.

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13 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 13 फ़रवरी 2026, 08:01 PM IST)
Mis-Selling RBI Insurance
मिस सेलिंग को कंट्रोल करने के लिए RBI ने क्या कदम उठाए हैं? (फोटो क्रेडिट: PTI और Unsplash.com)
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हाल ही में महाराष्ट्र के नागपुर से बैंकिंग-इंश्योरेंस सेक्टर में चल रही धोखाधड़ी को उजागर करने वाला केस सामने आया. आरोप है कि केनरा बैंक (Canara Bank) की एक शाखा के जरिए 90 साल के एक बुजुर्ग को अगले 100 साल में मैच्योर होनी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी बेच दी गई. इसका सालाना प्रीमियम लगभग 2 लाख रुपये था. मैच्योरिटी साल 2124-2126 के आसपास बताई गई. 

परिवारवालों ने आरोप लगाया कि पॉलिसी की शर्तें ठीक से समझाए बिना बुजुर्ग से फॉर्म भरवाया गया. मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो इसे 'मिस-सेलिंग' की गंभीर मिसाल बताया गया. विवाद बढ़ने के बाद बैंक ने जांच की बात कही. लेकिन इस घटना ने बुजुर्ग ग्राहकों की वित्तीय सुरक्षा और बैंक-इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. 

लेकिन ये पहला वाकया नहीं है. देश के अलग-अलग इलाकों से अक्सर 'मिस-सेलिंग' की खबरें आती रहती हैं. इसे लेकर RBI ने क्या कदम उठाए हैं, आगे विस्तार से जानेंगे.

मिस-सेलिंग क्या होती है?

मिस-सेलिंग का मतलब है किसी आदमी को गलत या अधूरी जानकारी देकर कोई सामान या सेवाएं बेच देना. उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक को सही जानकारी दिए बिना इंश्योरेंस पॉलिसी बेच देना. बिना जोखिम बताए शेयर बाजार से जुड़ा प्लान थमा देना. कहना कि गारंटीड रिटर्न मिलेगा. लेकिन फायदे की जगह नुकसान हो जाए. 

एक और मिसाल लेते हैं. मान लीजिए बैंक किसी ग्राहक को होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन वगैरा देता है, लेकिन छिपे चार्ज और शर्तें नहीं बताता है. ये सभी मिस-सेलिंग की कैटेगरी में आते हैं.

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मसौदा प्रस्ताव में क्या खास है?

इकोनॉमिक टाइम्स के पत्रकार जोएल रीबेलो की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को निर्देश दिया है कि किसी तरह के प्रोडक्ट्स या सर्विसेज की मिस सेलिंग साबित होने पर ग्राहक को पूरी राशि वापस करनी होगी. 12 फरवरी को जारी की गई ड्राफ्ट गाइडलाइंस में RBI ने कहा कि बैंकों को ग्राहक द्वारा उत्पाद/सेवा की खरीद के लिए भुगतान की गई राशि वापस करनी होगी. इसके अलावा, RBI ने कहा कि बैंकों को गलत बिक्री से हुए किसी भी नुकसान के लिए ग्राहक को मुआवजा देना होगा. 

RBI ने मिस सेलिंग को लेकर पहली बार इतने बड़े स्तर पर सख्ती बरती है. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट बताती है कि RBI ने बैंकों और गैर-वित्तीय वित्तीय संस्थानों (NBFC) द्वारा वित्तीय उत्पादों के विज्ञापन, मार्केंटिंग और बिक्री के तरीके की मनमानी रोकने के लिए एक मसौदा जारी किया है. इस प्रस्ताव पर 4 मार्च, 2026 तक लोगों से सुझाव मांगे गए हैं. केंद्रीय बैंक इन दिशानिर्देशों को 1 जुलाई से लागू कर सकता है.

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RBI को आगे क्यों आना पड़ा?

गलत तरीके से बीमा बेचना कोई मामूली समस्या नहीं है .इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट में बीमा नियामक IRDA यानी इंश्योरेंस रेगुलेटरी ऑथारिटी ऑफ इंडिया के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि वित्त वर्ष 2024-25 में 25 लाख से भी ज्यादा शिकायतें बीमा से जुड़ी थीं. इनमें से लगभग 1.2 लाख मामले अकेले जीवन बीमा से जुड़ी शिकायतें थीं. 

पिछले कुछ सालों में, बैंकों के माध्यम से बेची जाने वाली बीमा योजनाओं के बारे में बार-बार शिकायतें सामने आई हैं. ग्राहकों का कहना है कि उन्हें बताया गया था कि पॉलिसी फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह है . लेकिन बाद में उन्हें लंबी अवधि के लिए पॉलिसी को बंद रखने और उसे सरेंडर करने पर लगने वाले जुर्माने के बारे में पता चला. कुछ अन्य लोगों को उम्मीद से भी ज्यादा अवधि तक प्रीमियम भुगतान करने के लिए बाध्य होना पड़ा है.

मसौदे में क्या अच्छा है?

RBI ने साफ कहा है कि बैंक अपनी शाखाओं और एजेंटों के जरिये वित्तीय उत्पादों की मार्केटिंग और सेल्स के लिए जवाबदेह हैं. बैंक उत्पादों का डिस्ट्रिब्यूशन करते हैं. बीमा कंपनियां उनका बीमा करती हैं. लेकिन ग्राहक नियामकों के बीच उलझे रहते हैं. अब RBI एक समान मानक स्थापित करने का प्रयास कर रहा है. इंडिया टुडे की खबर में बताया गया है कि RBI का इरादा नेक है. लेकिन यह अभी प्रस्ताव भर ही है. जब तक अंतिम नियम कायदे नहीं बन जाते हैं तब तक कुछ कहना जल्दबाजी होगी. 

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