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RBI ने कुछ नहीं किया लेकिन आम लोगों को फिर भी राहत मिल गई, कैसे?

रेपो-रेट जस की तस

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RBI has decided to keep the repo unchanged at 6.5%
RBI ने रेपो रेट को जस का तस रखा है. (फोटो: इंडिया टुडे)
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प्रदीप यादव
6 अप्रैल 2023 (अपडेटेड: 7 अप्रैल 2023, 07:12 AM IST)
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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने आम आदमी को बड़ी राहत ही है. आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ( एमपीसी) की बैठक के नतीजों का ऐलान करते हुए रेपो रेट को 6.50 फीसदी पर जस का तस रखा गया है. इसके पहले अनुमान जताया जा रहा था कि आरबीआई अपनी तीन दिन चली एमपीसी की बैठक में रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट का इजाफा कर सकता है.

क्या है Repo Rate?  

रेपो रेट उस दर को कहते हैं जिस दर पर RBI बैंकों को कर्ज देता है. रेपो रेट बढ़ने का सीधा मतलब है कि RBI से बैंकों को महंगा कर्ज मिलेगा. ऐसे में बैंक भी अपने ग्राहकों को महंगा लोन बांटेंगे. लेकिन रेपो रेट में इस बार बदलाव न होने से होम लोन , कार लोन समेत सभी तरह के लोन लेने वाले लोगों को कुछ राहत मिलेगी. हालिक मई 2022 से Repo Rate में लगातार छह बार बढ़ोतरी की जा चुकी है और 6 बार में आरबीआई ने रेपो रेट में 2.5 फीसदी का इजाफा किया है. आखिरी बार इसी साल आरबीआई ने फरवरी में हुई एमपीसी की बैठक में रेपो रेट में चौथाई फीसदी का इजाफा किया था. कोरोना महामारी के बढ़ते संकट को देखते हुए आरबीआई ने मार्च, 2020 में रेपो रेट को घटा दिया था. लेकिन 4 मई, 2022 को करीब दो साल बाद पहली बार 0.40 फीसदी की बढ़ोतरी की थी. वहीं, नए वित्त वर्ष में आरबीआई की एमपीसी की यह पहली बैठक थी. यह बैठक तीन अप्रैल 2023 को शुरू हुई थी.

एमपीसी की बैठक के बाद आरबीआई ने प्रेस कांफ्रेस में महंगाई और देश की अर्थव्यवस्था को लेकर भी कई जरूरी बातें कही हैं. 

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 के लिए रिटेल महंगाई का अनुमान 5.2 फीसदी रखा गया है. वहीं चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में खुदरा महंगाई दर 5.1 फीसदी रहने का अनुमान है.

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने दुनियाभर में जारी बैंकिंग संकट को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था काफी उतार-चढ़ाव से जूझ रही है. अमेरिका और यूरोप में जारी बैंकिंग संकट पर आरबीआई की पैनी नजर है. उन्होंने आगे कहा कि 2022-23 में जीडीपी में सात फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई है. दास ने बताया कि अप्रैल-जून 2023 में जीडीपी रेट 7.8 फीसदी और जुलाई-सितंबर 2023 अनुमान को 6.2 फीसदी पर बरकरार रखा गया है. इसके अलावा अक्टूबर-दिसंबर 2023 जीडीपी रेट 6 फीसदी से बढ़ाकर 6.1 फीसदी और जनवरी-मार्च 2024 जीडीपी रेट अनुमान को 5.8 फीसदी से 5.9 फीसदी किया गया है.

वीडियो: खर्चा पानी: फेडरल रिजर्व ने क़र्ज़ महंगा किया, भारत पर क्या असर होगा?

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