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डूबते रुपये, महंगे तेल के बीच RBI भरेगा सरकार की तिजोरी, 286588.46 करोड़ रुपये देगा

RBI Dividend to Government: आरबीआई ने बताया कि 2025–26 में उसकी कुल नेट इनकम 3.95 लाख करोड़ रुपये रही, जो इससे पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है. RBI की बैलेंस शीट भी 20.61% की ग्रोथ के साथ 91.97 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई.

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23 मई 2026 (अपडेटेड: 23 मई 2026, 11:39 AM IST)
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RBI की सेंट्रल बोर्ड मीटिंग में सरकार को डिविडेंड देने का फैसला किया गया. (PTI)
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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने वेस्ट एशिया संकट और रुपये के गिरते स्तर से जूझ रही केंद्र सरकार को बड़ी राहत दी है. 22 मई को RBI ने मोदी सरकार को 2,86,588.46 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया. यह रकम केंद्र सरकार को डिविडेंड (लाभांश) के तौर पर दी जाएगी. RBI की तरफ से सरकार को मिलने वाला यह अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड है. केंद्रीय बैंक ने 2025-26 वित्त वर्ष में मोटी कमाई की. सरप्लस का एक बड़ा हिस्सा सरकार की तिजोरी में जमा किया जाएगा. इस बीच, RBI ने एक मजबूत कंटिंजेंसी रिस्क बफर (CRB) भी बनाए रखा है.

22 मई को RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई RBI की 623वीं सेंट्रल बोर्ड मीटिंग में सरकार को 2,86,588.46 करोड़ रुपये (2.86 लाख करोड़ रुपये) देने का ऐलान किया गया. यह रकम मिलने से मोदी सरकार, सरकारी कमाई और खर्च के बीच फर्क को बेहतर तरीके से मैनेज कर पाएगी. यानी इससे फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) से निपटने में आसानी होगी. Fiscal Deficit (राजकोषीय घाटा) वह स्थिति है जब सरकार का कुल खर्च उसकी कुल कमाई (उधार को छोड़कर) से ज्यादा हो जाता है.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने वित्त वर्ष 2024-25 में केंद्र सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपये दिए थे. इस बार करीब 6.7 फीसदी या 17,998 करोड़ रुपये ज्यादा दिए जा रहे हैं. 2023-24 में RBI ने केंद्र सरकार को 2.10 लाख करोड़ रुपये और 2022-23 में 87,416 करोड़ रुपये दिए थे.

RBI की कमाई बढ़ी

RBI ने बताया कि 2025–26 में उसकी कुल नेट इनकम 3.95 लाख करोड़ रुपये रही, जो इससे पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है. RBI की बैलेंस शीट भी बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई. 31 मार्च 2026 तक इसमें 20.61 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

डिविडेंड से डेवलपमेंट

RBI से मिलने वाले इस बड़े डिविडेंड से सरकार को फाइनेंशियल तौर पर काफी राहत मिलेगी. इससे सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़क, एनर्जी, शहरी विकास और दूसरी बड़े प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा खर्च करने में आसानी होगी.

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RBI की प्रेस रिलीज. (RBI)

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं. डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से भारत के लिए बड़ी आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं, जिससे विदेश से सामान खरीदना महंगा हो गया है. ऐसे में RBI की तरफ से मिलने वाला बड़ा डिविडेंड सरकार की काफी मदद करेगा.

संकट के लिए RBI तैयार 

दुनिया में चल रहे भारी उतार-चढ़ाव और तेल संकट को देखते हुए RBI ने एहतियाती कदम भी उठाए हैं. केंद्रीय बैंक ने कंटिंजेंसी रिस्क बफर (CRB) को बढ़ाकर 1,09,379 करोड़ रुपये कर दिया है. अगर देश के सामने कोई भी बड़ा आर्थिक संकट आता है, तो CRB के जरिए RBI उससे निपटने की कोशिश करता है.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल RBI के इतने भारी सरप्लस का एक बड़ा कारण फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में RBI का डॉलर बेचना है. रुपये को लगातार गिरने से रोकने के लिए डॉलर बेचे गए, जिससे RBI को भारी मुनाफा हुआ. पिछले साल CRB का लेवल 44,862 करोड़ रुपये थे, जो इस साल 64,518 करोड़ रुपये के इजाफे के साथ 1,09,379 करोड़ रुपये हो गया है.

वीडियो: खर्चा पानी: क्या रुपया बनाम डॉलर की जंग में RBI का ध्यान कहीं और है?

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