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RBI ने मनी मार्केट की टाइमिंग में किया बदलाव, नया ट्रेडिंग टाइम पता चला?

कोरोना महामारी के चलते कई तरह की दिक्कतों और लोगों के संक्रमित होने के खतरे को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने अप्रैल 2020 में समय में बदलाव किया था.

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ट्रेडिंग करते निवेशक (सांकेतिक तस्वीर)
8 दिसंबर 2022 (Updated: 8 दिसंबर 2022, 12:50 IST)
Updated: 8 दिसंबर 2022 12:50 IST
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मनी मार्केट में अब देर तक कारोबार होगा. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बुधवार 8 दिसंबर को विभिन्न बाजारों के लिए ट्रेडिंग की टाइमिंग बढ़ा दी है. मनी मार्केट का प्रबंधन और रेगुलेशन RBI के हाथ में है. RBI ने अपने एक बयान में कहा है कि अब डिमांड/नोटिस/टर्म मनी, कमर्शियल पेपर, सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट और मनी मार्केट के कॉरपोरेट बॉन्ड सेगमेंट में बाजार के समय को बढ़ाने का फैसला किया गया है.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के इस फैसले के बाद कॉल/नोटिस/टर्म मनी, कॉमर्शियल पेपर और सर्टिफिकेट्स ऑफ डिपॉजिट्स, कॉरपोरेट बॉन्ड्स में रेपो और रुपये के इंटेरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स में डेढ़ घंटे ज्‍यादा कारोबार होगा. कोरोना महामारी के चलते कई तरह की दिक्कतों और लोगों के संक्रमित होने के खतरे को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने अप्रैल 2020 में समय में बदलाव किया था. अब RBI ने उसमें फिर से बदलाव कर दिया है.

आगामी 12 दिसंबर से लागू होने वाले नए समय के तहत कॉल/नोटिस/टर्म मनी मार्केट शाम 5 बजे बंद होगा. कमर्शियल पेपर और सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट का बाजार भी शाम 5 बजे बंद हो होगा, जबकि कॉर्पोरेट बॉन्ड में भी कारोबार शाम 5 बजे समाप्त हो जाएगा. इसी टाइमिंग पर रुपया ब्याज दर डेरिवेटिव क्लोजिंग के लिए जाएंगे.

फिलहाल कॉल/नोटिस/टर्म मनी मार्केट में सुबह 9 बजे से दोपहर बाद 3.30 बजे तक ट्रेडिंग होती है. गर्वनमेंट सिक्‍योरिटीज और रेपो मार्केट में फिलहाल 9 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक काम होता है. इनके समय में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है.  आसान भाषा में समझें तो सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट बैंक और डिपॉजिटर के बीच एक तरह की सहमति होती है, जिसमें एक तय अवधि के लिए पहले से तय फंड को फिक्‍स किया जाता है. अब तक फेडरल डिपॉजिट इंश्‍योरेंस कॉरपोरेशन (FDIC) द्वारा जारी किया जाता रहा है. लेकिन रीजनल रूरल बैंक भी इसे जारी कर सकेंगे.

मार्केट से उधार लेने के लिए कंपनियां तरह-तरह के तरीके अपनाती हैं. यदि उन्हें लंबी अवधि के लिए कर्ज लेना होता है तो वे बांड जारी करती हैं, लेकिन जब थोड़े समय के लिए पैसे की जरूरत पड़ती है तो कंपनियां कमर्शियल पेपर जारी कर पूंजी जुटाती हैं. इसके जरिये उन्हें बिना कुछ गिरवी रखे ही थोड़े समय के लिए उधार मिल जाता है. इसी तरह से सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट एक तरह का मनी मार्केट इंस्‍ट्रूमेंट है. जब कोई निवेशक किसी बैंक में एक तय अवधि के लिए इलेक्‍ट्रॉनिक फॉर्म में फंड जमा करता है तो उन्‍हें सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट जारी किया जाता है. वहीं, कारपोरेट बॉन्ड्स का इस्तेमाल कंपनियां फंड जुटाने के लिए करती हैं. इसमें निवेश करने वाले निवेशकों को पहले से इंटरेस्ट मिलता है. 

 

वीडियो: RBI ने लगातार 5वीं बार ब्याज दर क्यों बढ़ाई?

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