ITR फाइलिंग में शानपत्ती दिखाई, 27 हजार का इनकम टैक्स दिया, 9 लाख का जुर्माना ठुक गया
इस जुर्माने के खिलाफ नेवासे ने पुणे स्थित आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) में चुनौती दी, लेकिन वे मुकदमा हार गए. इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूबनल ने जुर्माना बरकरार रखा.
.webp?width=210)
पुणे के एक शख्स नेवासे को गलत बिल लगाना भारी पड़ गया. कुछ हजार रुपये टैक्स बचाने के चक्कर में अब उसे लाखों रुपये का जुर्माना भरना पड़ सकता है. नेवासे ने एसेसमेंट ईयर 2022-23 के लिए ओल्ड टैक्स रिजीम के हिसाब से 10.65 लाख रुपये की डिडक्शन (कटौती) की गलत जानकारी दी थी. इसके बाद इनकम टैक्स आयकर विभाग ने नेवासे पर 9.44 लाख रुपये (वास्तविक टैक्स लायबिलिटी का 200%) का भारी भरकम जुर्माना ठोक दिया.
इस जुर्माने के खिलाफ नेवासे ने पुणे स्थित आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) में चुनौती दी, लेकिन वे मुकदमा हार गए. इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूबनल ने जुर्माना बरकरार रखा. इस केस के बारे में इकोनॉमिक टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में विस्तार से जानकारी दी है. इसके मुताबिक नेवासे ने 27 हजार 792 रुपये का इनकम टैक्स चुकाया था, लेकिन उन्हें 9 लाख 44 हजार 73 रुपये का जुर्माना अदा करने का आदेश दिया गया. यह उनके द्वारा चुकाई गई टैक्स लायबिलिटी का लगभग 34 गुना है.
जानबूझकर टैक्स छुपाने का आरोपट्रिब्यूनल ने पाया कि नेवासे ने जानबूझकर इनकम टैक्स के सेक्शन 80 डीडी, 80 सीसीडी, 80 डीडीबी, 80 ई, 80 ईईए, 80 ईईबी और 80 जीजीसी के तहत कटौती का दावा किया था, जबकि वह इस बात को अच्छे से जानते थे कि वह इसके लिए पात्र नहीं हैं. इस तरह नेवासे ने अपनी इनकम से कुछ रकम घटाकर टैक्स बचाने की कोशिश की.
ऊपर बताए गए सेक्शन इनकम टैक्स एक्ट में आते हैं. ये सेक्शन लोगों को कुछ खर्च या निवेश करने पर इनकम से रकम घटाने की छूट देते हैं. अगर कोई यह छूट पाने के योग्य है, तो वह अपनी इनकम से इन डिडक्शन के अनुसार रकम घटा सकता है और टैक्स कम देता है.
दरअसल, ट्रिब्यूनल की नजर नेवासे की तरफ से एक ‘राजनीतिक दल को दिए गए दान’ पर पड़ी. आयकर विभाग ने इस दावे को पूरी तरह से फर्जी पाया था. ट्रिब्यूनल ने पाया कि धारा 80 जीजीसी के तहत कटौती के बारे में नेवासे को अच्छी तरह पता था कि उन्होंने हकीकत में किसी भी राजनीतिक पार्टी को दान नहीं दिया था. फिर भी, उसने इसका दावा किया.
इसी तरह से ट्रिब्यूनल ने पाया कि और फर्जी कटौती इलाज के मद में दिखाई गई थी, जबकि आयकर विभाग ने पाया कि इलाज में ऐसा कोई खर्च नहीं किया गया था, इसलिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट नेवासे ने इस फर्जी डिडक्शन को भी झूठा माना. ट्रिब्यूनल ने कहा कि नवासे को अच्छी तरह पता था कि उन्होंने ऐसा कोई खर्च नहीं किया था, फिर भी इसका दावा किया. ट्रिब्यूनल कहना है कि इससे ही पता चलता है कि नेवासे ने जानबूझकर उन सभी कटौतियों का दावा किया जिनके लिए वह पात्र नहीं थे.
ट्रिब्यूनल का कहना है कि अगर नेवासे के मामले की जांच नहीं की जाती, तो वह आगे भी इसी तरह का फायदा उठाते रहते.
अब समझते हैं कि नेवासे कैसे 'पकड़े' गए?नेवासे ने 15 जून, 2022 को दाखिल किए अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में 13.25 लाख रुपये की कटौती दिखाने के बाद अपनी टैक्सेबल इनकम 5.71 लाख रुपये दिखाई. इसके अलावा, नेवासे ने 50,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन का दावा करते हुए 2.15 लाख रुपये का हाउस रेंट अलाउंस (HRA) भी दिखाया. एसेसमेंट ईयर 2022-23 के लिए उनकी कुल इनकम 21.61 लाख रुपये थी.
सबूत न मिलने पर फंसेनवासे अपने आयकर रिटर्न भरते समय अपनी कुछ डिडक्शन के डॉक्यूमेंट्स (बिल) पेश नहीं कर सके. आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण ने अपने आदेश में कहा कि नेवासे ने गलत दावे प्रस्तुत करने की बात स्वीकार की है.
आयकर विभाग ने पाया कि नेवासे 13.25 लाख रुपये के बजाय केवल 2.60 लाख रुपये की कटौती के पात्र थे. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को एक और गड़बड़ी मिली. वह थी नेवासे की 86,593 रुपये की अतिरिक्त HRA छूट. टैक्स डिपार्टमेंट के मुताबिक वो लगभग 1.29 लाख रुपये की एचआरए छूट के पात्र थे. इस गलत इनकम टैक्स रिपोर्टिंग के चलते नवासे की टैक्सेबल इनकम 5.71 लाख रुपये नहीं थी, बल्कि यह करीब 17.23 लाख रुपये बन रही थी. इसमें 2.60 लाख रुपये की कटौती और लगभग 1.29 लाख रुपये का एचआरए शामिल था.
इस तरह से 17.23 लाख रुपये की सालाना कमाई पर उन्हें 3.42 लाख रुपये का टैक्स चुकाना था. लेकिन उन्होंने 27,792 रुपये टैक्स भरा. इस तरह से उन्हें 3.14 लाख रुपये ज्यादा चुकाने चाहिए थे.
इनकम टैक्स की धारा 270 ए क्या है?टैक्स एक्सपर्ट विनोद रावल बताते हैं कि इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 270 ए के तहत अगर कोई टैक्सपेयर अपनी इनकम को कम बताता है या गलत बताता है, तो उस पर जुर्माना लगाया जाता है. ये जुर्माने दो प्रकार के होते हैं. इनकम को कम बताने पर जुर्माना अतिरिक्त आय पर लगने वाले कर का 50% होता है. वहीं, आय को गलत बताने (अधिक गंभीर मामले, जैसे झूठे दावे या फर्जी बिल से छूट) पर जुर्माना उस राशि पर लगने वाले टैक्स का 200% होता है.
वीडियो: IDFC बैंक घोटाले में 170 खातों से कुल 590 करोड़ रुपये निकाले गए, जांच में किन अधिकारियों के नाम?

.webp?width=60)

