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प्रीमियम पेट्रोल के दाम बढ़ गए, आप जो पेट्रोल भरवाते हैं उसकी भी अपडेट है

इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से सप्लाई घटी है. इंटरनेशनल मार्केट में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 110-120 डॉलर प्रति बैरल के बीच चल रहा है. इस वजह से भारत में प्रीमियम ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं.

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20 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 04:40 PM IST)
Petrol price hike
कच्चे तेल का भाव 110-120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है (फोटो क्रेडिट: Business Today)
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प्रीमियम पेट्रोल वेरिएंट की कीमतें करीब 2 रुपये से 2 रुपये 30 पैसे प्रति लीटर तक बढ़ गई हैं. मनीकंट्रोल और सीएनबीसी आवाज जैसे बिजनेस न्यूज प्लेटफॉर्म्स ने 20 मार्च को ये जानकारी दी.

वहीं इंडिया टुडे ने कुछ शहरों से मिली जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से बताया है कि इंडियन ऑयल XP95 (Indian Oil’s XP95) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम पावर पेट्रोल (Hindustan Petroleum’s Power petrol) जैसे हाई-ऑक्टेन फ्यूल्स के दाम बढ़े हैं. हाई-ऑक्टेन फ्यूल वह ईंधन होता है जो इंजन में नॉकिंग को रोककर बेहतर परफॉर्मेंस देता है. 

वहीं, प्रीमियम पेट्रोल-डीजल डलवाने से इंजन की कार्यक्षमता बेहतर होती है. माइलेज भी थोड़ा सुधर सकता है. यह आम पेट्रोल-डीजल से महंगा होता है . इकोनॉमिक टाइम्स ने समाचार एजेंसी ANI के हवाले से बताया है कि प्रीमियम पेट्रोल के दाम 2 रुपये 9 पैसे से लेकर 2 रुपये 35 पैसे प्रति लीटर तक बढ़े हैं. 

सामान्य पेट्रोल के दाम जस के तस

न्यूज एजेंसी एनएनआई के मुताबिक सामान्य पेट्रोल-डीजल के दामों में किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ है. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव (मार्केटिंग एवं ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने भी इसकी पुष्टि की है. जैसा कि खबर में बताया गया है कि चूंकि यह बढ़ोतरी केवल प्रीमियम पेट्रोल वेरिएंट तक ही सीमित है, इसलिए आम लोगों पर इसका प्रभाव सीमित रहने की उम्मीद है.

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प्रीमियम पेट्रोल और डीजल क्यों महंगा हुआ?

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से सप्लाई घटी है. इंटरनेशनल मार्केट में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 110-120 डॉलर प्रति बैरल के बीच चल रहा है. इस वजह से भारत में प्रीमियम ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं. भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 85-90 परसेंट हिस्सा विदेशों से खरीदता है. इसमें बड़ी हिस्सेदारी खाड़ी देशों की भी है. इस क्षेत्र में लगातार तनाव बढ़ रहा है. 

दुनिया की जरूरत का करीब 20 परसेंट कच्चा तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ही ढोया जाता है. भारत में भी इसी रास्ते से कच्चा तेल आयात होता. भारत अपने 40-50 परसेंट कच्चे तेल की सप्लाई के लिए इस रूट पर निर्भर है. मिडिल ईस्ट में जारी जंग के चलते इस रास्ते में काफी दिक्कतें चल रही हैं.

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