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क्या कुछ घंटे बाद रसोई गैस और CNG की कीमतें कम हो जाएंगी? क्या है सरकार का नया फॉर्मूला?

कहा जा रहा है कि इस फॉर्मूले से पाइप्ड नेचुरल गैस की कीमतें 10 प्रतिशत और CNG की कीमतें 6 प्रतिशत तक कम हो जाएंगी.

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सीएनजी (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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प्रदीप यादव
7 अप्रैल 2023 (अपडेटेड: 7 अप्रैल 2023, 08:47 PM IST)
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आपके किचन में पाइप के जरिये आने वाली गैस (PNG) और आपकी गाड़ी में इस्तेमाल होने वाली CNG जल्द सस्ती हो सकती है. केंद्र सरकार ने CNG और PNG कीमतें तय करने के लिए 6 अप्रैल को नए फॉर्मूले को मंजूरी दे दी. सरकार का कहना है कि नए फॉर्मूले के लागू होने के बाद से CNG और PNG की कीमतें 10 फीसदी तक घट जाएंगी.

शुक्रवार 7 अप्रैल को दिल्ली में CNG की कीमत 80 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास रही, जो नए फार्मूले के अमल में आने के बाद 73 रुपये प्रति किलो पर आ जाएगी. इसी तरह राजधानी में PNG की कीमत 53 रुपये 59 पैसे प्रति घन मीटर से घटकर 47 रुपये 59 पैसे प्रति घन मीटर तक आ सकती है.

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने संवाददाताओं से कहा कि घरेलू गैस की कीमतों को इंटरनेशनल गैस हब की जगह इंपोर्टेड क्रूड के साथ लिंक कर दिया गया है. अब घरेलू गैस की कीमत भारतीय क्रूड बास्केट के दाम का 10 फीसदी होगी. इतना ही नहीं, अब CNG और PNG की कीमत हर महीने तय होगी. पहले साल में दो बार यानी हर 6 महीने पर कीमतें तय की जाती थीं.

क्यों बढ़ते थे दाम?

भारत में घरेलू गैस की कीमतें मुख्य रूप से दुनिया के चार अंतरराष्ट्रीय गैस ट्रेडिंग हब (IGTH) से तय होती रही हैं. सरकार की प्रेस रिलीज के मुताबिक ये चार हब हैं हेनरी हब (अमेरिका), नेशनल बैलेंसिंग पॉइंटर (ब्रिटेन), अल्बेना और रूस. देश में गैस की कीमतें इन वैश्विक गैस उत्पादन केंद्रों से होने वाले व्यापार पर निर्भर थीं. 2014 की गाइडलाइंस के तहत एक साल में IGTH से उत्पादित गैस की कीमत का औसत निकाला जाता था और फिर उसे तीन महीने के अंतराल पर लागू किया जाता था. 

इसी के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें तेजी से घटती-बढ़ती थीं और इसका असर घरेलू गैस की कीमतों पर भी पड़ता था. लेकिन अब भारत विदेशों से जो गैस आयात करेगा, उसकी कीमत के आधार पर घरेलू गैस के दाम तय किए जाएंगे. 

2014 की गाइडलाइंस चलती थीं

अब तक घरेलू गैस की जो कीमतें तय होती थीं, उसके लिए अक्टूबर 2014 में गाइडलाइंस बनी थीं. उनके तहत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के आधार पर घरेलू बाजार में कीमतें तय होती थीं. पिछले साल रूस और यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद दुनियाभर में CNG, PNG की कीमतें रॉकेट की रफ़्तार से बढ़ी थीं. इसके बाद घरेलू गैस की कीमतें तय करने के लिए सरकार ने पिछले साल अक्टूबर में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के पूर्व सदस्य किरीट पारिख की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी. इस कमेटी के सुझावों पर ही केंद्र ने गाइडलाइंस में बदलाव किए हैं.

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि घरेलू गैस का दाम अब इंडियन क्रूड बास्केट की अंतरराष्ट्रीय कीमत का 10 फीसदी होगा. मान लीजिए अगर इंडियन क्रूड बास्केट का दाम 85 डॉलर प्रति बैरल है, तो भारत में घरेलू गैस की कीमत 8.5 डॉलर यानी उसका 10 फीसदी होगी. ये कीमत अब 6 महीने की बजाय हर महीने तय की जाएगी. 

उन्होंने बताया कि घरेलू गैस का फ्लोर प्राइस और सीलिंग प्राइस दोनों ही तय होंगी. फ्लोर प्राइस 4 डॉलर और सीलिंग प्राइस 6.5 डॉलर तय किया गया है. फ्लोर प्राइस यानी कम से कम कीमत और सीलिंग प्राइस यानी ज्यादा से ज्यादा कीमत. सीलिंग प्राइस को अभी दो साल के लिए तय किया गया है. दो साल बाद ये कैप बढ़ा दी जाएगी. अब तक ये होता था कि अगर अंततराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें बढ़ गईं तो गैस कंपनियों को नुकसान होता था और घट गईं तो आम लोगों को नुकसान होता था क्योंकि कीमत पहले तय हो चुकी थीं. लेकिन अब जो दो बड़े बदलाव हुए हैं, उससे गैस कंपनियां और आम लोगों दोनों को फायदा होने की बात कही गई है.

अब देखना ये है कि इन बदलावों से उपभोक्ताओं को वाकई में कोई राहत मिलती है या नहीं.

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