पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर सरकार ने खुद को कितनी बड़ी 'चपत' लगा ली?
पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती होने से अब पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी घटकर 11 रुपये 90 पैसे प्रति लीटर पर आ गई है. अब तक पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 21 रुपये 90 पैसे प्रति लीटर लगती रही है. इसमें कटौती का फैसला अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बीच लिया गया है.

केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती का ऐलान किया है. लेकिन ये ऐलान सरकार के खजाने पर बड़ा असर डाल सकता है. अर्थशास्त्रियों ने बिजनेस टुडे टीवी से बातचीत में कहा कि सरकार के इस फैसले से हर साल 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का आर्थिक नुकसान हो सकता है.
पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती होने से अब पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी घटकर 11 रुपये 90 पैसे प्रति लीटर पर आ गई है. अब तक पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 21 रुपये 90 पैसे प्रति लीटर लगती रही है. इसमें कटौती का फैसला अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बीच लिया गया है.
हालांकि, आम लोगों के लिए पेट्रोल की दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. लेकिन इस कदम से सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ गया है. सरकारी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इससे तेल कंपनियों की कमाई पर कितना असर पड़ेगा, इसका सटीक अनुमान लगाना अभी मुश्किल है. बिजनेस टुडे के मुताबिक आयात के रुझानों और वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए पेट्रोल और डीजल की कीमतों की समीक्षा हर पखवाड़े (15 दिन) की जाएगी.
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने टीवी टुडे टीवी से बातचीत में कहा कि सरकारी टैक्स अधिकारियों ने संकेत दिया है कि राजस्व पर पड़ने वाले प्रभाव अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं. इनका आकलन हर 15 दिन में किया जाएगा. विवेक चतुर्वेदी ने कहा कि हालात लगातार बदल रहे हैं और इसे सामान्य स्थिति की तरह नहीं देखा जा सकता.
निर्यात के मोर्चे पर चतुर्वेदी ने बताया कि मौजूदा क्रैक मार्जिन को देखते हुए पेट्रोल पर अभी कोई निर्यात शुल्क नहीं लगाया गया है. वहीं सरकार ने डीजल के निर्यात पर टैक्स लगाया है. इससे दो हफ्ते में लगभग 1,500 करोड़ रुपये की कमाई होने की उम्मीद है.
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इस कदम का उद्देश्य पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को हतोत्साहित करना और घरेलू बाजार में पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करना है. बता दें कि कच्चे तेल की कीमत और उससे बने पेट्रोल-डीजल जैसे उत्पादों की कीमत के बीच कs अंतर को क्रैक मार्जिन कहते हैं. सरकार इस बात का पूरा प्रयास कर रही है कि ईंधन की कीमतों को बढ़ने न दिया जाS और तेल और गैस कंपनियों (ओएमसी) को भी सपोर्ट मुहैया कराया जाए. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से तेल कंपनियों को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है.
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