जावेद अख़्तर के बयान से ज़्यादा इस बात से तड़पेगा पाकिस्तान, चिकन भी नहीं बना पाएंगे!
पेट्रोल 250 का लीटर और चिकन 780 रुपये किलो मिल रहा है.

पाकिस्तान की स्थिति ख़राब है. और पाकिस्तान की ही नहीं, दक्षिणी एशिया के अधिकांश देशों की स्थिति ख़राब है. भारत की स्थिति ठीक है, और इस बात को एक चुटकी नमक के साथ पढ़ा-सुना जाना चाहिए. और ऐसे में स्थितियाँ और बुरी होने की खबरें आ रही हैं. जैसे वहाँ के सरकारी बैंक का एलान कि देश का मौजूदा करंट अकाउंट डेफ़िसिट और सिकुड़ गया है, पाकिस्तान ने अपने नागरिकों पर टैक्स लगाना शुरु कर दिया है और क्या पाकिस्तान के पास उबरने के साधन मौजूद हैं? इस सबपर बात करेंगे आज के एपिसोड में -
IMF ने पाकिस्तान को क़र्ज़ देने की क्या शर्तें लगाई हैं?गूगल पर कीवर्ड ही बन गया है 'पाकिस्तान इकोनॉमिक क्राइसिस'. मुल्क में महंगाई बढ़ रही है, बेरोज़गारी बढ़ रही है, पाकिस्तानी रुपये की हालत कमज़ोर हो रही है, निवेश लगातार घट रहा है. कमाई की तुलना में ख़र्च ज़्यादा है, तो फिस्कल डेफ़्सिट भी बढ़ रहा है. और, इस घटोतरी-बढ़ोतरी का नतीजा ये कि पेट्रोल-डीज़ल का दाम बढ़ रहे हैं, बिजली व्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है.
पाकिस्तान में आज जो आर्थिक हालत खराब हैं, उसके पीछे दो कारण हैं. पहला कारण, फ़ॉरेन एक्सचेंज की कमी. और दूसरा कारण, भारी-भरकम क़र्ज़.

पहले हाल की ख़बर जान लीजिए. पाकिस्तान ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से 6.5 अरब डॉलर का क़र्ज़ लिया था. 6.5 अरब डॉलर यानी क़रीब 53,825 करोड़. अब क़र्ज़ लिया है, तो चुकाना पड़ेगा. क़र्ज़ की शर्त थी कि 39 महीने में इसे चुका दिया जाए. ये क़र्ज़ पटा नहीं है, और उन्होंने IMF से और सहयोग राशि मांग ली है. कितनी? 9,097 करोड़. यानी 53,825 करोड़ चुका नहीं है, 9 हज़ार करोड़ और मांग रहा है. इसके लिए पाकिस्तान ख़ूब हाथ-पैर मार रहा है. पाकिस्तान के न्यूज़पेपर द न्यूज़ इंटरनेशनल के मुताबिक़, IMF ने हाल ही में पाकिस्तान से कहा कि वो 'एक देश के रूप में काम' करें और ऐसे क़दम न उठाएं, जो उन्हें और बदतर स्थिति में डाल दे.
IMF की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टलिना जॉर्जीवा ने एक समाधान भी दिया. क्रिस्टीना ने ख़ास तौर पर दो बातों पर ज़ोर दिया, जो पाकिस्तान को आर्थिक पतन से बचाने में मदद कर सकते हैं. सबसे पहले, उन्होंने कर राजस्व (tax revenues) बढ़ाने का सुझाव दिया. ताकि पब्लिक या निजी क्षेत्रों में अच्छा पैसा कमाने वाले अर्थव्यवस्था में योगदान करें. मतलब ये कि टैक्स-फैक्स लगाकर और पैसा उगाहा जाए. खजाने को भरा जाए. भरे हुए खजाने से काम किया जाए. दूसरी बात IMF ने ये कही कि सरकार को क़ीमती चीज़ों से सब्सिडी हटा लेनी चाहिए. इससे संसाधनों का बेहतर वितरण का हो सकेगा, क्योंकि क़ीमती प्रोडक्ट्स ख़रीदने वालों को सब्सिडी की ज़रूरत नहीं है. उन्होंने कहा था,
"IMF बहुत स्पष्ट था और है, कि हम पाकिस्तान के ग़रीब लोगों की मदद करना चाहते हैं. ऐसा नहीं होना चाहिए कि सब्सिडी से अमीरों को फायदा हो. सब्सिडी ग़रीबों को मिलनी चाहिए."
अब आज मन कर रहा है कि आर्थिक जगत की खबरों में थोड़ा साहित्य में पढ़ लेना चाहिए. ऐसे में याद आता है निदा फ़ाज़ली की ग़जल का शेर:
"अपना ग़म लेके कहीं और न जाया जाए
घर में बिखरी हुई चीज़ों को सजाया जाए"
कुछ ऐसी ही है पाकिस्तान की हालत. अपने ग़म का ख़ुद से इलाज करना है.
IMF की सख्त टिप्पणियों के बाद, पाकिस्तान की संसद ने सर्वसम्मति से एक विधेयक पास किया. नाम दिया: सरकार के वित्त (पूरक) विधेयक 2023 या 'मिनी-बजट'. ये क़दम IMF का लोन ख़त्म करने के लिए लिया. क्या-क्या किया?
# पाकिस्तान सरकार ने अब लग्ज़री सामान के आयात और सेवाओं पर टैक्स बढ़ा दिया है.
# सेल्स टैक्स को 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है.
# गाड़ियों से लेकर घरेलू उपकरणों तक. चॉकलेट से लेकर चूड़ी-बिंदी तक. बिज़नेस क्लास हवाई यात्रा, शादी हॉल, मोबाइल फोन और स्टाइलिश चश्मे ख़रीदने के लिए भी लोगों को ज़्यादा पैसा देना होगा.
हालांकि, इसमें भी 'दीन' का ख़याल रखा गया है. वित्त मंत्री इशाक़ डार ने बताया कि बिज़नेस क्लास से दक्षिण अमेरिका जाना है, तो ढाई लाख पाकिस्तानी रुपये एक्साइज़ ड्यूटी देनी होगी और अफ़्रीका या मिडल-ईस्ट जाना है, तो बस 75 हजार पाकिस्तानी रुपये. यूरोपीय देश हों या ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड या एशिया-पैसिफ़िक के बाक़ी देशों के लिए डेढ़ लाख पाकिस्तानी रुपयों की ड्यूटी तय की गई है.
हालत बिगड़ी कैसे?अब पाकिस्तान के लिए करो या मरो की स्थिति बनी कैसे, वो समझते हैं. पाकिस्तान में एक समस्या नहीं है. समस्याओं का कॉकटेल है, जिसमें अलग-अलग अनुपात में अलग-अलग समस्याएं हैं. बीते साल 2022 में जून से अक्टूबर के महीने में पाकिस्तान में बुरी बाढ़ आई थी. क़रीब सवा तीन करोड़ लोग प्रभावित हुए थे और आंकड़े बताते हैं कि ढाई लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा का नुक़सान हुआ था. बाढ़ के बाद देश की निर्भता आयात पर बढ़ गई. एक्सपोर्ट की स्थिति तो गत्तल-खाता थी ही. आयात-निर्यात में गैप बढ़ा और सांख्यिकि ब्यूरो के मुताबिक़, दिसंबर 2022 से जनवरी 2023 के बीच ट्रेड में 16 प्रतिशत की गिरावट हुई. 16 आपको छोटी संख्या दिखेगी. लेकिन आर्थिक मंदी के बीच जब आप 16 को रखकर देखेंगे तो पता चलेगा कि ये ठीकठाक गिरावट है.
फिर पाकिस्तान का रुपया भी टूटा और टूटकर बिखरने लगा. अगर आपको तुलनावाले कमेंट की लड़ाई करनी हो तो आप ये दलील देंगे कि जैसे भारत का रुपया टूटा, पाकिस्तान का भी वैसे ही टूटा. लेकिन भारत की स्थिति इतनी खराब नहीं है. साल 2022 में डॉलर की तुलना में पाकिस्तानी रुपया 30 प्रतिशत तक गिरा. गिरने से याद आया: GDP ग्रोथ. वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि इस साल पाकिस्तान का GDP ग्रोथ 2 प्रतिशत के आस-पास रहेगा. इधर GDP बढ़ नहीं रहा और मंहगाई बढ़े जा रही है. वित्तीय वर्ष 2023 में पाकिस्तान में मंहगाई दर 23% रहने की आशंका है.

दिक्कत और ज्यादा है. कई कंपनियों में कच्चा माल या विदेशी मुद्रा ख़त्म हो गई है, और उन्हें अपने ऑपरेशन्स बंद करने पड़ रहे हैं. सुज़ुकी मोटर कॉर्प हो गई. घंधारा टायर ऐंड रबर कंपनी हो या टोयोटा. ऐसी कई कंपनियां हैं जिन्होंने अपने ऑपरेशन्स रोक दिए हैं. ऐसा ही एक संकट पाकिस्तान में 1971 में आया था. भारत से युद्ध हारने के बाद, पाकिस्तान को बहुत नुक़सान हुआ था. तब भी पेट्रोल और खाद्य सामग्री की क़ीमतें बढ़ाई गई थीं. आज के हाल ये हैं कि पेट्रोल प्रति लीटर 250 रुपये का बिक रहा है और चिकन 780 रुपये का किलो. मौजूदा संकट में सरकार अपनी तरफ़ से ख़ूब जतन करने का दावा रही है. कुछ दिन पहले ही अमेरिका में पाकिस्तानी दूतावास की एक संपत्ति को नीलाम कर दिया. इसके अलावा शॉपिंग मॉल, रेस्तरां, शादी के हॉल और बाज़ारों को जल्दी बंद करने का आदेश दिया है, ताकि एनर्जी में जा रहे 62 अरब पाकिस्तानी रुपये बच जाएं. लेकिन समस्या अब स्ट्रक्चर की हो गई है और इसलिए सारी कोशिशें बेअसर होती दिख रही हैं.
पाकिस्तान के ख़राब होते हालातों से घबराकर अब लोग पाकिस्तान छोड़कर भागने लगे हैं. पाकिस्तान से विदेश जाने वाले लोगों की संख्या में अचानक तेज़ी देखी जा रही है.
वीडियो: पकिस्तान ने IMF के पैसे के लिए क्या किया कि जनता त्राहिमाम करने लगी?

