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हिडेन चार्ज के नाम पर नहीं लगेगा चूना, RBI ने इंतजाम कर दिया

RBI ने 'Responsible Business Conduct Amendment Directions, 2026' का मसौदा जारी किया है. इस मसौदे में बैंकों को सख्त निर्देश दिया है कि वे (बैंक) जुलाई 2026 तक अपनी वेबसाइटों और मोबाइल ऐप से सभी "डार्क पैटर्न" यानी ग्राहकों को गुमराह करने या उन पर दबाव डालने के लिए बनाई गई ट्रिक्स को हटाएं.

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No more hidden charges
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अब बैंकों से डिजिटल बैकिंग को पारदर्शी बनाने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं.
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प्रदीप यादव
25 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 10:30 PM IST)
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ऑनलाइन बैंकिंग के नाम पर हिडेन चार्ज का चूना लगाने का सिलसिला जल्दी ही खत्म हो सकता है. ऑनलाइन बिजनेस में शामिल कंपनियां हर रोज लाखों लोगों के साथ हिडेन चार्ज का खेल खेलती हैं. लेकिन अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों से इस तरह की प्रैक्टिस को रोकने और डिजिटल बैकिंग को पारदर्शी बनाने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं.

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि RBI ने 'Responsible Business Conduct Amendment Directions, 2026' का मसौदा जारी किया है. इस मसौदे में बैंकों को सख्त निर्देश दिया है कि वे (बैंक) जुलाई 2026 तक अपनी वेबसाइटों और मोबाइल ऐप से सभी "डार्क पैटर्न" यानी ग्राहकों को गुमराह करने या उन पर दबाव डालने के लिए बनाई गई ट्रिक्स को हटाएं. इस मसौदे में बैंकों की तरफ से फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग के तरीके पर सख्त नियम प्रस्तावित किए गए हैं. साथ ही किसी भी सर्विस को ऑफर करने से पहले ग्राहक की सहमति अनिवार्य की गई है.

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डार्क पैटर्न क्या हैं और RBI चिंतित क्यों है?

डार्क पैटर्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल की जाने वाली डिजाइन तकनीक हैं. इनका मकसद यूजर्स के व्यवहार को इस तरह प्रभावित करना है जिसे वे पूरी तरह से समझ न सकें. इनमें हिडेन चार्जेज, भ्रमित करने वाले विकल्प या ग्राहकों को अतिरिक्त सेवाएं लेने के लिए बार-बार प्रेरित करने वाले संकेत शामिल हो सकते हैं.

RBI का यह कदम लोकल सर्कल्स की तरफ से किए गए एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण के बाद आया है. इस सर्वे में 388 जिलों के 1 लाख 61 हजार से ज्यादा लोगों से फीडबैक लिया गया है. सर्वे के माध्यम से पता चला कि इस तरह के गलत तरीके कई ऑनलाइन बैंकिंग प्लेटफार्मों पर आम हैं.

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