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सरकारी ठेकों में बोली लगाएंगी चीनी कंपनियां? रिपोर्ट में दावा, सरकार बैन हटाने की तैयारी कर रही

साल 2020 में भारत और चीन की सेनाओं के बीच गलवान घाटी में हुई जानलेवा झड़प के बाद सरकार ने चीनी कंपनियों पर सख्त पाबंदियां लगा दी थीं.

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Chinese firms bidding for Indian government contracts
चीनी कंपनियों को भारत में सरकारी ठेकों में बोली लगाने की छूट मिलने वाली है (फोटो क्रेडिट: India Today)
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प्रदीप यादव
8 जनवरी 2026 (Published: 08:13 PM IST)
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क्या जल्दी ही चीनी कंपनियां भारत में सरकारी ठेकों के लिए बोली लगाएंगी? खबर है कि वित्त मंत्रालय सरकारी ठेकों में चीनी कंपनियों की बोली पर लगे 5 साल पुराने प्रतिबंधों को हटाने की योजना बना रहा है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने दो सरकारी सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है.  

रिपोर्ट कहती है कि भारत-चीन सीमा पर तनाव काफी कम हुआ है. इसे देखते हुए ‘भारत सरकार चीन के साथ व्यावसायिक रिश्तों को फिर से मजबूत करना चाहती है’. साल 2020 में भारत और चीन की सेनाओं के बीच गलवान घाटी में हुई जानलेवा झड़प के बाद सरकार ने चीनी कंपनियों पर सख्त पाबंदियां लगा दी थीं. 

अब तक कोई भी चीनी कंपनी अगर भारत में किसी सरकारी टेंडर (ठेका) में हिस्सा लेना चाहती थी, तो उसे पहले भारत सरकार की एक खास कमेटी में रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता था. साथ ही सरकार से सुरक्षा मंजूरी लेनी भी अनिवार्य थी. इन सख्त पाबंदियों के चलते ज्यादातर चीनी कंपनियों को भारत में सरकारी ठेके नहीं मिल पाते थे. 

60-70 लाख करोड़ रुपये के सरकारी टेंडर

एक अनुमान के मुताबिक भारत सरकार हर साल 700 से 750 अरब डॉलर (60-70 लाख करोड़ रुपये) मूल्य के ठेकों के लिए बोली मंगाती है. रॉयटर्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार सरकारी ठेकों में बोली लगाने वाली चीनी कंपनियों के लिए रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता को हटाने की तैयारी कर रही है.

न्यूज एजेंसी को वित मंत्रालय के दो सूत्रों ने बताया कि अंतिम फैसला ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय (PMO)’ की तरफ से लिया जाएगा. हालांकि, वित्त मंत्रालय और PMO ने अब तक इस दावे की पुष्टि नहीं की है. 

रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता वाली एक उच्चस्तरीय समिति ने भी इन प्रतिबंधों में ढील देने की सिफारिश की थी. गौबा एक प्रमुख सरकारी थिंक टैंक के सदस्य हैं.

करीब आ रहे भारत-चीन

पिछले साल सितंबर महीने में चीन ने शंघाई सहयोग संगठन समिट की मेजबानी की थी. तब प्रधानमंत्री मोदी ने 7 साल में पहली बार चीन का दौरा किया था. यह दौरा ऐसे समय हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर 50% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, और पाकिस्तान से रिश्तों में गर्मजोशी दिखाई थी.

बाद में भारत और चीन ने व्यावसायिक रिश्तों को गहरा करने पर सहमति जताई. पीएम के दौरे के बाद दोनों देशों ने सीधी फ्लाइट्स फिर से शुरू कीं. भारत ने चीनी प्रोफेशनल्स के लिए बिजनेस वीजा मंजूरी की प्रक्रिया को आसान बनाया है.

वीडियो: अमेरिका भारत पर लगाएगा 500 प्रतिशत टैरिफ, क्या है वजह?

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