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मोदी सरकार और कितने सरकारी बैंक बेचने जा रही?

एक रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्र सरकारी बैंकों के प्राइवेटाइजेशन के लिए एक पैनल बनाने की तैयारी कर रहा है.

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public sector bank privatisation
देश में सरकारी बैंकों की संख्या फिलहाल 12 बैंक रह गई है. (तस्वीर- आजतक)
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प्रदीप यादव
16 मई 2023 (Updated: 16 मई 2023, 12:07 AM IST)
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केंद्र सरकार कुछ और सरकारी बैंकों को बेचने को लेकर जल्दी ही कोई बड़ा फैसला कर सकती है. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में कुछ सरकारी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार सरकारी बैंकों के प्राइवेटाइजेशन के लिए एक पैनल बनाने की तैयारी कर रही है. ये पैनल ही उन बैंकों का नाम तय करेगा जिन्हें बेचा जाना है. 

इससे पहले अप्रैल 2021 में नीति आयोग ने विनिवेश विभाग को दो सरकारी बैंकों का निजीकरण करने की सिफारिश की थी. इनमें कथित तौर पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक को शामिल किया गया था, लेकिन इनके निजीकरण को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया था.

एक सरकारी अधिकारी ने ईटी को बताया कि सरकार का पूरा ध्यान कुछ छोटे सरकारी बैंकों के निजीकरण पर है. इनमें बैंक ऑफ महाराष्ट्र और यूको बैंक जैसे छोटे बैंकों के प्राइवेटाइजेशन का फैसला लिया जा सकता है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बड़े बैंकों के निजीकरण की कोई योजना नहीं है. अधिकारी के मुताबिक आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी बेचने की कवायद से मिली सीख से नए बैंकों के निजीकरण की रणनीति को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा, 

'आईडीबीआई में हिस्सेदारी की बिक्री इसी साल होनी चाहिए. इसके मुताबिक हम तय करेंगे कि सरकार दो अन्य बैंकों से पूरी तरह बाहर निकलना चाहती है या कुछ हिस्सेदारी बरकरार रखना चाहती है.'

रिपोर्ट में एक सरकारी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि प्राइवेटाइजेशन के लिए बैंकों की पहचान करने के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी. इसमें छोटे और मझोले बैंकों के नाम शामिल है. बैंकों के परफॉर्मेंस और उनके लोन पोर्टफोलियो समेत कई अन्य पैरामीटर्स के आधार पर इस कमेटी को प्राइवेटाइजेशन के नाम तय करने होंगे. इस कमेटी में डिपार्टमेंट ऑफ इंवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और नीति आयोग के अधिकारी शामिल हो सकते हैं.

सरकार बैंकों के निजीकरण पर आगे क्यों बढ़ना चाहती है?
दरअसल सरकारी बैंकों की तिजोरियां खूब भर रही हैं. वित्त वर्ष 2022-23 के पहले नौ महीनों में सार्वजनिक क्षेत्र के सभी 12 बैंकों ने 70,166 करोड़ रुपये का कुल मुनाफा कमाया था, जो एक साल पहले की इसी अवधि के मुकाबले 43 फीसदी ज्यादा है. इसी तरह आंकड़ों पर नजर डालें तो बीते एक साल में निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में 65.4 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है. जबकि, इस दौरान निफ्टी 50 में केवल 16 फीसदी की ही बढ़त रही है.

2021 के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विनिवेश कार्यक्रम के तहत दो सरकारी बैंकों के निजीकरण का ऐलान किया था. इसी साल सरकार ने बैंकिंग कानून (संशोधन) बिल, 2021 को संसद में पारित कराने के लिए लिस्ट किया था. हालांकि, अभी तक इसे संसद में सरकार की ओर से पेश नहीं किया गया है. इस बिल के तहत सरकार 1970 और 1980 के बैंकिंग कंपनी एक्ट में संशोधन करना चाहती है. इसमें सरकारी बैंकों के अधिग्रहण और ट्रांसफर से जुड़े नियम है.

आपको बता दें कि 19 जुलाई 1969 को देश के 14 प्रमुख बैंकों का पहली बार राष्ट्रीयकरण किया गया था. इसके बाद 1980 में बैंकों के राष्ट्रीयकरण का दूसरा दौर चला जिसमें और छह निजी बैंकों को सरकारी कब्जे में लिया गया. राष्ट्रीयकरण के बाद शहर से चलकर बैंक गांव-गांव पहुंचे. 

1991 के आर्थिक संकट के बाद बैंकिंग क्षेत्र के सुधार के लिए नरसिंहम समिति बनी. इस समिति ने देश में नए प्राइवेट बैंकों को खोलने का सुझाव दिया था. साथ ही सरकारी बैंकों के विलय के लिए भी सिफारिश की. इस कमेटी की सिफारिश के बाद पहली बार 2008 में कुछ सरकारी बैंकों का विलय किया गया. इसके बाद 2017 और 2019 में कई छोटे बैंकों का बड़े बैंकों में विलय किया गया था. फिलहाल सरकारी क्षेत्र के सिर्फ 12 बैंक रह गए हैं.

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