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क्रेडिट कार्ड से बचना है तो गोल-बेस्ड इन्वेस्टिंग शुरू कर दीजिए, फायदे ही फायदे हैं

इस तरीके में आप पहले खर्च के बाद लोन की किस्त नहीं भरते हैं, बल्कि पहले अपने लक्ष्यों के लिए बचत करते हैं फिर अपनी जरूरत की चीजें खरीदते हैं.

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1 मई 2026 (अपडेटेड: 1 मई 2026, 07:54 PM IST)
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हर वित्तीय लक्ष्य के लिए अलग निवेश योजना बनाना गोल-बेस्ड इन्वेस्टमेंट है (फोटो क्रेडिट: Business today)
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आसान लोन और क्रेडिट कार्ड की सुविधा ने कई लोगों को जाने-अनजाने कर्ज के जाल में धकेल दिया है. अगर आप भी कर्ज के जाल से बचना चाहते हैं तो माइक्रो इन्वेस्टिंग के जरिये अपनी जरूरतों को पूरा कर सकते हैं. पर्सनल फाइनेंस की दुनिया में गोल-बेस्ड इन्वेस्टिंग का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है. इस तरीके में आप पहले खर्च के बाद लोन की किस्त नहीं भरते हैं, बल्कि पहले अपने लक्ष्यों के लिए बचत करते हैं फिर अपनी जरूरत की चीजें खरीदते हैं.

गोल-बेस्ड इन्वेस्टमेंट क्या है?

हर वित्तीय लक्ष्य के लिए अलग निवेश योजना बनाना गोल-बेस्ड इन्वेस्टमेंट है. उदाहरण के तौर पर, नया फोन या लैपटॉप लेने के लिए लोन लेकर उसकी किस्त भरने के बजाय खुद के फंड का इस्तेमाल. फैमिली ट्रिप के लिए निवेश करना, जैसे हर महीने दो-तीन हजार रुपये का निवेश करने से साल के अंत में एक ट्रिप का जुगाड़ हो जाता है. इसी तरह से घर की डाउन पेमेंट या किसी इमरजेंसी के लिए अलग फंड तैयार करना वगैरा.

छोटी बचत बड़ा फायदा 

फाइनेंस एक्सपर्ट शरद कोहली लल्लनटॉप से बातचीत में कहते हैं कि अक्सर लोग सोचते हैं कि जब उनके पास खूब पैसा होगा तब निवेश शुरू करेंगे. या एकमुश्त पैसा आएगा तब निवेश चालू करेंगे. लेकिन कई बार ये इंतजार सालों चलता रहता है और निवेश शुरू नहीं हो पाता है. लेकिन अगर कोई व्यक्ति सिर्फ 500 रुपये महीने से भी निवेश शुरू करता है, तो यह आदत लंबे समय में एक अच्छा फाइनेंशियल डिसिप्लिन बना सकता है. 

उनका कहना है कि छोटी रकम से शुरू किया गया निवेश, जैसे 1000-2000 रुपये की 'मिनी एसआईपी' भी कंपाउंडिंग की ताकत से समय के साथ बड़ा फंड तैयार कर सकता है. मान लीजिए आपको अगले दो साल बाद मनाली या वियतनाम जाना है, तो आज से दो-तीन हजार रुपये की मिनी SIP शुरू करें. साल के अंत में आपके पास इतनी रकम होगी कि आपको ट्रिप के लिए क्रेडिट कार्ड या लोन नहीं लेना पड़ेगा.

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माइक्रो इन्वेस्टिंग के फायदे क्या हैं?

यह तरीका पर्सनल फाइनेंस को ज्यादा अनुशासित बनाता है क्योंकि आप बिना योजना के खर्च करने के बजाय पहले से तय लक्ष्यों के हिसाब से पैसा अलग रखते हैं.

वित्तीय सलाहकार बंसत कुमार चतुर्वेदी लल्लनटॉप से बातचीत में कहते हैं, “माइक्रो इन्वेस्टिंग से फालतू खर्च कम होता है. क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन पर निर्भरता घटती है. कर्ज के जाल से छुटकारा मिलता है. गोल-बेस्ड इन्वेस्टमेंट धीरे-धीरे निवेश की आदत डालता है. जब हर महीने एक निश्चित तारीख को आपके खाते से 1000-2000 रुपये कटते हैं, तो यह आपकी जीवनशैली का हिस्सा बन जाता है.” 

यह आपको 'खर्च करने के बाद जो बचा उसे बचाओ' के बजाय 'बचाने के बाद जो बचा उसे खर्च करो' की आदत डालता है. वे आगे कहते हैं कि छोटा निवेश सिर्फ गैजेट्स के लिए नहीं, बल्कि 'इमरजेंसी फंड' के रूप में भी काम करता है. अचानक आए छोटे-मोटे खर्च (जैसे गाड़ी की मरम्मत या छोटी-मोटी बीमारी) के लिए आपको अपने मुख्य निवेश को नहीं छेड़ना पड़ता.

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