आपको बढ़िया नौकरी क्यों नहीं मिल रही जानते हैं?
समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग द्वारा जुटाए गए आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल अक्टूबर के बाद से लेकर अब तक दुनियाभर में 5 लाख से ज्य़ादा लोगों को अपनी जमी-जमाई नौकरी से हाथ धोना पड़ा है.

अप्रैल 2020 की बात है, जब कोरोना के चलते लॉकडाउन लगने से दुनिया की करीब आधी आबादी घरों में कैद थी और लोग ऑफिस की जगह घर से काम करना शुरू कर चुके थे. इसी दौरान वीडियो-स्ट्रीमिंग वेबसाइट वीमियो का जलवा था. लाखों लोग इस सेवाएं ले रहे थे. लोगों की डिमांड को पूरा करने के लिए कंपनी खूब पैसा खर्च कर रही थी. लेकिन तीन साल बाद यह कंपनी भारी मुश्किल से जूझ रही है. कंपनी की कमाई घट गई है और इसके शेयरों की कीमत तीन साल में 90 फीसदी से ज्यादा नीचे आ चुकी है. अब ये कंपनी बड़े पैमाने पर छंटनी करने जा रही है. लेकिन वीमियो इकलौती कंपनी नहीं है जो बड़े पैमाने पर लोगों को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा रही है.
समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग द्वारा जुटाए गए आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल अक्टूबर के बाद से लेकर अब तक दुनियाभर में 5 लाख से ज्य़ादा लोगों को अपनी जमी-जमाई नौकरी से हाथ धोना पड़ा है. ये आंकड़ा सिर्फ व्हाइट कॉलर जॉब्स का है यानी मोटे पैकेज वाली नौकरियां. छोट-मोटी कंपनियों में नौकरी से निकालने वाले लोगों को इसमें शामिल कर लिया जाये तो ये संख्या इससे भी ज्यादा पहुंच सकती है.
छंटनी करनी वाली कंपनियों में कई हाई-प्रोफाइल और दिग्गज टेक कंपनियां शामिल हैं. जैसे दुनियाभर में कंसल्टेंसी देने वाली फर्में जैसे मैकेन्जी, केपीएमजी भी लागत घटाने के लिए अपने कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा रही हैं. इसी तरह से ई कामर्स कंपनी FedEx और प्लेन बनाने वाली कंपनी बोइंग जैसी कंपनियां भी जॉब-कट कर रही हैं. इसके अलावा क्रेडिट सुइस और यूबीएस के मर्जर से भी हजारों लोगों की नौकरियां जाने का खतरा मंडरा रहा है. अमेरिका में बैकिंग सेक्टर में से उठी चिंगारी अब गोला बनकर न सिर्फ बैंकों को डूबो रही है बल्कि आईटी और टेक कंपनियां भी इसकी भेंट चढ़ रही हैं. ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक टेक कंपनियों ने पिछले 6 महीने में करीब पौने दो लाख, कंज्यूमर रिटेल कंपनियों ने करीब 1 लाख, वित्तीय क्षेत्र में 50 और रियल एस्टेट समेत अन्य क्षेत्रों में करीब डेढ़ लाख लोगों को नौकरी से निकाला जा चुका है.
इतना ही नहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये सिर्फ शुरुआत भर है और आगे जॉब सेक्टर के हालात और खराब होंगे. एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोविड महामारी के समय लगे लॉकडाउन के दौरान टेक कंपनियों में बड़े पैमाने पर हायरिंग हुई थी. तब माहौल अनुकूल था. लेकिन जैसे ही लॉकडाउन की पाबंदिया खत्म हुईं और मार्केट खुले तो टेक सेक्टर की सेहत बिगड़ने लगी. साथ ही दुनियाभर में गहराती आर्थिक मंदी ने भी जले पर नमक झिड़कने का काम किया है. इसका सबसे बुरा असर आईटी और टेक कंपनियों पर पड़ रहा है. जो कंपनियां ताबड़तोड़ भर्तियां करती थीं, अब वो उसी रफ़्तार से लोगों की छंटनी भी कर रही हैं. वहीं, आने वाले समय में चैटजीपीटी नई चुनौती बनकर उभर रहा है क्योंकि कंपनियों का रुझान ऑटोमेशन की ओर है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मैक्डॉनल्ड जल्द ही बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी करने जा रहा है. फिलहाल कंपनी ने अमेरिका में काम करने वाले कर्मचारियों और कुछ दूसरे स्टाफ को वर्क फ्रॉम होम के लिए कहा गया है. वहीं ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक ई-कॉमर्स दिग्गज वॉलमार्ट ने 2000 कर्मचारियों की छंटनी की योजना बनाई है. आईफोन बनाने वाली कंपनी एपल भी इस लिस्ट में जुड़ने वाली है और रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने कर्मचारियों को निकालना भी शुरू कर दिया है. इस समय पूरी दुनिया पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है. पहले ही अनुमान लगाया जा चुका है कि इस साल मंदी के आसार हैं. ऐसे में कई बड़ी कंपनियां पहले से ही लोगों को नौकरी से निकालने की बात कर रही हैं. फेसबुक की पैरेंट कंपनी Meta ने 10 हजार से ज्यादा कर्मचारियों की छुट्टी कर दी थी.
वैश्विक मंदी का असर भारत में दिखना शुरू भी हो चुका है. भारत की बड़ी आईटी कंपनियों ने अब तक भले ही बड़ी छंटनी का ऐलान नहीं किया हो लेकिन कई आईटी कंपनियों ने नई भर्तियों से किनारा कर लिया है जबकि एडटेक और दूसरे स्टार्टअप्स की हालत तो काफी खराब नजर आ रही है. शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वालीं बायजू जैसी कंपनियों ने पिछले साल 2500 लोगों की छंटनी की है. न्यूज बेवसाइट इंक 42 के मुताबिक भारत में 50 से ज्यादा स्टार्टअप ने अपने कर्मचारियों की छंटनी की है. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि फिलहाल टेक कंपनियों के शेयर 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं. इस साल इस सेक्टर की कंपनियों के मुनाफे में भारी कमी दिख रही है. आईटी कंपनियों के शेयरों का भी बुरा हाल है.
वीडियो: खर्चा पानी: गौतम अडानी और विनोद अडानी का असली सच सामने लाएगा सेबी?

