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ईरान-इजरायल लड़ाई में US की एंट्री से डरा मार्केट, सेंसेक्स 82000 और निफ्टी 25000 के नीचे

भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के लिए कारोबार की शुरुआत लाल निशान में हुई. सेंसेक्स सुबह 9 बजे के करीब 705.65 अंक नीचे खुला. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी(Nifty) 182.85 अंक नीचे 24,929.55 पर ट्रेड करता दिखा.

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US enters into iran israel war share market over the world tumbles
चीन को छोड़कर एशिया के सभी बाजार लाल निशान में ट्रेड कर रहे थे. निवेशकों को अब ईरान के जवाबी कदम का इंतजार.
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उपासना
23 जून 2025 (Published: 10:31 AM IST)
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ईरान इजरायल के बीच जारी संघर्ष (Iran Israel war) और उसमें अमेरिका की एंट्री के बाद भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ गए हैं. इसका असर शेयर बाजारों पर भी दिखने लगा है. 23 जून को भारतीय शेयर बाजार गिरावट (Indian Share Market) के साथ खुले. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स(Sensex) 705.65 अंक नीचे खुला. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty) 182.85 अंक नीचे 24,929.55 पर खुला.

शेयर बाजार के लिए बीता सप्ताह काफी मिलाजुला रहा था. शुक्रवार 20 जून को शेयर बाजार तीनों दिनों की गिरावट के बाद हरे निशान में बंद हुए थे. मगर शनिवार-रविवार को हुए डेवलपमेंट्स ने मार्केट का सेंटिमेंट कमजोर कर दिया है. 

HDFC सिक्योरिटीज में हेड ऑफ प्राइम रिसर्च देवर्श वकील ने कहा, 

‘ईरान-इजरायल के बीच में अमेरिका ने भी एंट्री ले ली है. उसने ईरानी न्यूक्लियर फैसिलिटीज पर हमला किया है. इस डिवेलपमेंट के बाद ग्लोबल रिस्क सेंटिमेंट और डांवाडोल हो गया है. जारी लड़ाई के चलते कच्चे तेल के दाम और ऊपर जा सकते हैं. ऐसे में इनवेस्टर सुरक्षित शेयरों या विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं.’

कुछ एनालिस्ट्स का ये भी कहना है कि भले ही ईरान इजरायल के बीच लड़ाई में अमेरिका ने एंट्री ने स्थिति और बिगाड़ दी है. लेकिन मार्केट पर इसका सीमित असर ही दिखेगा. ईरान जवाबी प्रतिक्रिया में कब और कौन से कदम उठाता है इसी से मार्केट की चाल तय होगी.

आपको बता दें कि शनिवार 21 जून को अमेरिका ने ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर हमला कर दिया था. जवाबी कार्रवाई में ईरान की संसद ने स्ट्रेट ऑफ हॉरमूज को बंद करने का फरमान सुना दिया. दुनिया भर में जाने वाले ऑयल और गैस का 20 फीसदी इसी रास्ते से जाता है.

एनालिस्ट्स को लगता है कि इस कदम से दुनिया भर में ऑयल और गैस की कीमतें बढ़ जाएंगी. महंगाई बढ़ने का भी रिस्क होगा. इधर ब्रेंट क्रूड यानी कच्चा तेल 81 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया था. बाद में कुछ गिरावट आई और यह 78.80 डॉलर के भाव पर सेटल हुआ.

हालांकि, तमाम चुनौतियों के बावजूद भारत बेहतर स्थिति में दिख रहा है. घरेलू अर्थव्यवस्था बुनियादी तौर पर मजबूत है. आरबीआई की नीतियों से भी इकॉनमी को सपोर्ट मिल रहा है. फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (FPI) ने मई में 19,860 करोड़ लगाए थे. मगर जून में FPI कुछ सतर्क हुए हैं. उन्होंने अब 4,192 करोड़ की निकासी की है. FPI की चाल बताती है कि भू-राजनीतिक स्तर पर कैसी स्थितियां बन रही हैं.

भारत के अलावा दूसरे एशियाई बाजारों में सेंटिमेंट निगेटिव हो चुका है. बैंकाक से लेकर जापान, सोल, हांगकांग और जकार्ता के शेयर बाजार गिरावट में कारोबार कर रहे थे. सिर्फ चीन इकलौता एशियाई बाजार है जो हरे निशान में बैठा हुआ है. वहीं उधर अमेरिकी बाजार शुक्रवार 20 जून की रात मिलेजुले सेंटिमेंट में दिखे. डाउ जोन्स 35.16 अंक ऊपर 42,206.82 पर बंद हुआ. वहीं S&P 500 13.03 अंक नीचे 5,967.84 पर और Nasdaq 98.86 नीचे 19,447.41 पर बंद हुए.

वीडियो: खर्चा-पानी: ईरान और इजरायल तनाव के चलते कौन सी चीजें महंगी हो सकती हैं?

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